ग्रामीण विकास हेतु पशुपालन है रीढ की हड्डी, कैसे करें पालतु पशुओं का रखरखाव

भारत कृषि प्रधान देश है। कृषि में पशुपालन का महत्व नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। यदि भारतीय कृषि का सच्चे उद्देश्य से विकास करना है तो पशुपालन के....

Nov 14, 2024 - 16:15
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ग्रामीण विकास हेतु पशुपालन है रीढ की हड्डी, कैसे करें पालतु पशुओं का रखरखाव

अरविन्द सुथार पमाना

 लेखक परिचय- वरिष्ठ कृषि एवं पर्यावरण पत्रकार, अनार एवं बागवानी विशेषज्ञ, कृषि सलाहकार, मोटिवेटर एवं किसानों के मार्गदर्शक। 

भारत कृषि प्रधान देश है। कृषि में पशुपालन का महत्व नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। यदि भारतीय कृषि का सच्चे उद्देश्य से विकास करना है तो पशुपालन के कार्यों में वैज्ञानिक परिवर्तन लाना अति आवश्यक है। देश में 60% से अधिक ग्रामीण जनसंख्या है। सुदूर पश्चिमी राजस्थान जैसे इलाकों में पशुपालन आजीविका का मुख्य स्रोत है। किसानों को पशुपालन में वैज्ञानिक तकनीकी गतिविधियों हेतु दिशा निर्देश आवश्यक है। जैसे ग्याभिन भैंस को उचित मात्रा में सूर्य की रोशनी मिल सके इसका ध्यान रखें। सूर्य की रोशनी से भैंस के शरीर में विटामिन-डी बनता है जो कैल्शियम के संग्रहण में सहायक है जिससे पशु को बयाने के उपरांत दुग्ध ज्वर से बचाया जा सकता है। ऐसा पाया गया है की गर्भावस्था के अंतिम माह में पशु चिकित्सक द्वारा लगाया जाने वाला विटामिन ई व सिलेनियम का टिका प्रसव उपरांत होने वाली कठिनाईयों जैसे की जेर का न गिरना इत्यादि में लाभदायक होता है।

गर्भाधान के 60-90 दिनों के बाद गर्भावस्था की पुष्टि के लिए जानवरों की जाँच योग्य पशु चिकित्सकों द्वारा कराई जानी। पशु के राशन में 2 फीसदी मिनरल मिक्सचर जरूर मिलाएँ। पशुओं से ज्यादा दूध लेने और उन को लम्बे समय तक सेहतमंद बनाए रखने के लिए उन्हें संतुलित मात्रा में चारादाना (राशन) देना जरूरी होता है। संतुलित राशन में खनिज लवण के साथ पोषक तत्त्व, प्रोटीन, विटामिन वैगरह तय मात्रा में रखें जाते हैं। नवजात बच्चा पैदा होने के 2-3 घंटे बाद पहला गोबर करता है। अगर ऐसा नहीं करे तो उसे 30 मिलीलीटर अरंडी का तेल पीला दे।

पशुओं में जूं, चिचड़ी, किलनी आदि का कम उम्र के पशुओं पर प्रतिकूल प्रभाव ज्यादा होता है। इसकी रोकथाम के लिए खाद्य तेल (जैसे अलसी का तेल) का एक पतला लेप अथवा साबुन के गाढ़े-घोल का इस्तेमाल एक सप्ताह के अंतराल पर दो बार करना चाहिए।

गाय और भैंस दोनों का यौन चक्र (कामोत्तेजना काल) 18-21 दिन में एक बार 18-24 घंटे के लिए होता है. लेकिन भैंस में, चक्र गुपचुप तरीके से होता है और  किसानों के लिए एक बड़ी समस्या प्रस्तुत करता है. किसानों के अल-सुबह से देर रात तक 4-5 बार जानवरों  की सघन निगरानी करनी चाहिए. उत्तेजना का गलत अनुमान बांझपन के स्तर में वृद्धि कर सकता है। उत्तेजित पशुओं में दृश्य लक्षणों का अनुमान लगाना  काफी कौशलपूर्ण  बात है। 21 दिन में पुन: चक्र नहीं दिखाने पर डॉक्टर से सलाह लें। 

हमेशा ऐसे पशुओं को खरीदने का प्रयास करना चाहिए जिनका जन्म, प्रजनन आदि से लेकर उत्पादन आदि का रिकार्ड रखा गया हो। लेकिन ऐसा रिकॉर्ड केवल सरकारी फार्मों, कॉमर्शियल डेरी फार्मो एवं प्रजनन संबंधी शोध केन्द्रों पर ही रखा जाता है। नस्ल सुधार के लिए गाय को जिस सांड के पास ले जाते हैं उसकी पिछली वंशावली का पता लगाना चाहिए।

 बार चालाक किस्म के बकरी, गाय/भैंस के नीचे किसी दूसरी अनुपयोगी गाय/भैंस का नवजात बछड़ा बाँध देते हैं तथा उसे ताज़ी ब्याही बताकर अधिक कीमत में बेचकर धोखा दे देते है। इससे बचने के लिए बच्चे को उसकी माँ के नीचे लगाकर देखना चाहिए।

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पशुओं के ब्याने पर जेर नहीं गिरने पर सबसे बेहतर उपाय यही है कि योनि के रास्ते बायाँ हाथ डालकर मासन्कुर एवं दलों को छुड़ाया जाए तथा दाएं हाथ से जेर का जितना हिस्सा आसानी से निकलता है उसे धीमे-धीमे निकाला जाए। अगर पूरी तरह जेर नहीं निकल पा रहा है तो खींचतान नहीं करना चाहिए। किसान भाई कभी भी फेट या CLR बढाने के लिए दूध में मिलावट नहीं करें, आप यदि डेयरी पर दूध बेचते हैं तो यह ध्यान रखें कि आपके घर का दूध देश के बच्चों के शरीर में पहुंचने वाला है।

रिजका व नेपियर की तुलना में अजोला में 4-5 गुणा उच्च गुणवत्ता वाली प्रोटीन पाई जाती है। यह एक तैरती हुई जलीय फर्न है जिसे जादुई फर्न या हरा सोना या पशुओं के लिए चवनप्राश की संज्ञा दी गई है।

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