नव गीत- देव उठनी एकादशी पर नव गीत

सोये बहुत देव अब जागो...

Nov 14, 2024 - 15:53
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नव गीत- देव उठनी एकादशी पर नव गीत

     आचार्य संजीव वर्मा सलिल 
विश्ववाणी हिंदी संस्थान, जबलपुर

सोये बहुत देव अब जागो

सोये बहुत
देव! अब जागो...
तम ने
निगला है उजास को।
गम ने मारा
है हुलास को।
बाधाएँ छलती
प्रयास को।
कोशिश को
जी भर अनुरागो...
रवि-शशि को
छलती है संध्या।
अधरा धरा
न हो हरि! वन्ध्या।
बहुत झुका
अब झुके न विन्ध्या।
ऋषि अगस्त
दक्षिण मत भागो...
पलता दीपक
तले अँधेरा ।
हो निशांत
फ़िर नया सवेरा।
टूटे स्वप्न
न मिटे बसेरा।
कथनी-करनी
संग-संग पागो...
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