Ayodhya : बीजेपी में राम मंदिर आंदोलन के नेताओं पर पेटेंट वार, लखनऊ बनाम दिल्ली- राम की राजनीति में छिड़ी अंदरूनी जंग

इसी राजनीतिक पृष्ठभूमि में पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और राज्यसभा सदस्य लक्ष्मीकांत बाजपेई विनय कटियार के अयोध्या स्थित हिंदू धाम आवास पर पहुंचे। जिला उपाध्यक्ष कृष्ण कुमा

Jan 8, 2026 - 22:52
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Ayodhya : बीजेपी में राम मंदिर आंदोलन के नेताओं पर पेटेंट वार, लखनऊ बनाम दिल्ली- राम की राजनीति में छिड़ी अंदरूनी जंग
Ayodhya : बीजेपी में राम मंदिर आंदोलन के नेताओं पर पेटेंट वार, लखनऊ बनाम दिल्ली- राम की राजनीति में छिड़ी अंदरूनी जंग
अयोध्या, जिसके नाम पर भारतीय जनता पार्टी ने केंद्र की सत्ता हासिल की, आज पार्टी के अंदर राजनीतिक संघर्ष का केंद्र बन गई है। अब राम मंदिर पर अधिकार की लड़ाई शुरू हो गई है। राम मंदिर आंदोलन ने बीजेपी को हिंदुत्व का चेहरा दिया, लेकिन आंदोलन से जुड़े कई बड़े नेता अब हाशिए पर हैं। लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, उमा भारती जैसे नाम अब मुख्यधारा से दूर हैं। राम मंदिर बन गया, लेकिन आंदोलन के योद्धा बाहर हो गए। इसी क्रम में पूर्व राज्यसभा सदस्य विनय कटियार का आक्रामक रवैया पार्टी में हलचल मचा रहा है। विनय कटियार ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय को स्वयंभू बताकर हमला किया। उन्होंने अयोध्या लोकसभा और विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने की इच्छा जताई। क्या यह व्यक्तिगत असंतोष है या पार्टी के अंदर अयोध्या की कमान पर कब्जे की चुनौती?

इसी राजनीतिक पृष्ठभूमि में पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और राज्यसभा सदस्य लक्ष्मीकांत बाजपेई विनय कटियार के अयोध्या स्थित हिंदू धाम आवास पर पहुंचे। जिला उपाध्यक्ष कृष्ण कुमार पांडेय और कमला शंकर पांडेय ने इस मुलाकात का इंतजाम किया। दोनों के बीच बंद कमरे में करीब 25 मिनट तक चर्चा हुई। इसे सामान्य भेंट बताया जा रहा है, लेकिन राजनीतिक हलकों में नए गठजोड़ की अफवाहें हैं। राम मंदिर के पड़ोसी जिले से पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह का वायरल वीडियो भी इसी असंतोष की मिसाल है। वीडियो में वे कहते हैं कि राम मंदिर आंदोलन में शामिल रहे, बाबरी विध्वंस में नामजद हुए, आडवाणी की रथयात्रा में चले, लेकिन न्योता नहीं मिला। यह शिकायत पार्टी के अंदर उबलते गुस्से का इजहार है।

2014 के बाद यह पहली बार है जब राम मंदिर आंदोलन से जुड़े नेता कैमरे पर खुद को अलग-थलग बता रहे हैं। इससे पता चलता है कि पार्टी में लखनऊ और दिल्ली के बीच सत्ता का संतुलन अब खुलकर सामने आ रहा है। एक स्थानीय नेता का नाम बार-बार लिया जा रहा है, जो कटियार जैसे लोगों को बर्दाश्त नहीं कर सका। क्या अयोध्या की धरोहर कुछ चुनिंदा लोगों तक सिमट रही है?

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खुद राम मंदिर आंदोलन से जुड़े थे। सत्ता में आने के बाद वे हिंदुत्व के बड़े चेहरे बने। अयोध्या के विकास में उनका हाथ है, लेकिन दिल्ली से उनके संबंधों पर उठते सवाल इस जंग को और गहरा बनाते हैं। अब सवाल है कि क्या बीजेपी में राम से ज्यादा राम पर कब्जा महत्वपूर्ण हो गया है? क्या आंदोलन के योद्धाओं को इस्तेमाल कर किनारे कर दिया गया? और क्या अयोध्या फिर से राजनीतिक संघर्ष का शिकार हो रही है? संकेत बताते हैं कि राम मंदिर बन चुका है, लेकिन बीजेपी के अंदर राम की राजनीति की सबसे बड़ी लड़ाई अब शुरू हुई है। और इसका मैदान अयोध्या है।

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