Baitul News : मध्यप्रदेश वन राज्य निगम बैतूल में संभागीय प्रबंधक खुद है जज, बिना किसी आदेश के गबन के आरोपी पर एफआईआर के बाद बहाली पर उठ रहे सवाल

मौके पर ले जाने के बजाए जहाँ कोई मामला है नही है वहां घुमा दिया जाता है पर सही जगह जहाँ वाकई में भृष्टाचार किया गया है वहाँ लेकर ही नही जाते और अधिकारी को मीडिया के ही खिलाफ भड़काने में ....

Jun 23, 2025 - 23:32
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Baitul News : मध्यप्रदेश वन राज्य निगम बैतूल में संभागीय प्रबंधक खुद है जज, बिना किसी आदेश के गबन के आरोपी पर एफआईआर के बाद बहाली पर उठ रहे सवाल

मीडिया के सवाल करने पर कहा "I HAVE A POWER TO APOINT HIM " 

शशांक सोनकपुरिया, बैतूल- मध्यप्रदेश

By INA News Baitul.

मध्यप्रदेश के बैतूल में मध्यप्रदेश वन राज्य निगम के जंगलों में वाकई जंगल राज ही चल रहा है एयर यहाँ के अधिकारियों की तो एक अलग ही दुनिया है ऐसा इसीलिए है कि यहाँ किसी भी मामले में जिम्मेदार ही जज बने हुए है और किसी भी मामले की जांच में लीपापोती कर उच्चाधिकारियों को गुमराह करने की कला में माहिर है मीडिया द्वारा मामले उठाने पर उच्चाधिकारियों को ही गुमराह कर दिया जाता है कि मामला अभी का नही पुराना है.मीडिया वाले गलत खबरें प्रकाशित कर रहे है और मौके पर ले जाने के बजाए जहाँ कोई मामला है नही है वहां घुमा दिया जाता है पर सही जगह जहाँ वाकई में भृष्टाचार किया गया है वहाँ लेकर ही नही जाते और अधिकारी को मीडिया के ही खिलाफ भड़काने में भी पीछे नही हटते एसडीओ और संभागीय प्रबंधक ताजा मामला रामपुर भतोड़ी परियोजना मण्डल बैतूल का है जहाँ चुनाहजुरी परिक्षेत्र की आवरिया और काजली वन सुरक्षा समिति में जो बोनस राशि 72 लाख रुपये डली थी जिसको रेंजर और वन रक्षक ने मिलकर हजम कर लिया था और गबन के मामलों में शिकायत मिलने पर जांच भी करवाई.जिसमें दोषी पाए जाने नाकेदार और रेंजर पर पर एफआईआर भी करवाई गई थी आरोपी रेंजर और नाकेदार की गिरफ्तारी होनी थी और कोर्ट के आदेश अनुसार कार्य किया जाना था पर यहाँ तो बिना किसी कोर्ट आदेश के संभागीय प्रबंधक खुद को न्यायाधीश समझ बैठी है जिन्होंने बिना किसी आदेश के नाकेदार को बहाल कर चोपना परिक्षेत्र में नियुक्ति भी कर दी.अब सवाल यह उठ रहा है कि किस आदेश के तहत बहाली की गई और क्या पुलिस रिकॉर्ड में जो नाकेदार फरार है उसकी सूचना बहाली के पूर्व पुलिस को क्यों नही दी गई अब इस मामले में खुद संभागीय प्रबन्धक का संरक्षण साफ नजर आ रहा है अब देखना यह होगा कि उच्चाधिकारियों द्वारा मामले में संज्ञान लेकर जांच करवाई जाती है या संभागीय प्रबंधक अपने आप को जज समझकर इसी तरह अपनी मर्जी निगम पर थोपती रहेंगी।

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