Ballia : इंसान तो छोडिये साहब, अब तो बेजुबान भी नहीं हैं सुरक्षित- बछिया के साथ दुराचार करने वाला व्यक्ति गिरफ्तार

पुलिस ने इस मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी के खिलाफ सख्त धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 303(3) और 317

Dec 22, 2025 - 22:08
Dec 22, 2025 - 23:11
 0  190
Ballia :  इंसान तो छोडिये साहब, अब तो बेजुबान भी नहीं हैं सुरक्षित- बछिया के साथ दुराचार करने वाला व्यक्ति गिरफ्तार
Ballia : इंसान तो छोडिये साहब, अब तो बेजुबान भी नहीं हैं सुरक्षित- बछिया के साथ दुराचार करने वाला व्यक्ति गिरफ्तार

Report- S.Asif Hussain Zaidi

उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में एक चौंकाने वाली और घिनौनी घटना सामने आई है, जो समाज की विकृत मानसिकता को उजागर करती है। दुबहर थाना क्षेत्र के संवरुबांध गांव में एक 44 वर्षीय व्यक्ति ने एक बेजुबान बछिया के साथ अमानवीय और अप्राकृतिक कृत्य किया। आरोपी की पहचान पिंटू राजभर के रूप में हुई है। इस घटना ने न केवल गांव बल्कि पूरे इलाके में आक्रोश और स्तब्धता की लहर दौड़ा दी है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि जब इंसान सुरक्षित नहीं तो बेजुबान पशु कैसे सुरक्षित रह सकते हैं?घटना की विस्तृत जानकारी के अनुसार, आरोपी पिंटू राजभर ने बछिया के मुंह में रस्सी बांधकर उसे नियंत्रित किया और फिर यह घृणित कार्य किया। यह हरकत गांव में ही कहीं हुई, जहां बछिया को बांधकर रखा गया था। जैसे ही इस अमानवीय कांड की भनक गांववालों को लगी, गुस्साए ग्रामीणों की भीड़ मौके पर जुट गई। लोगों में इतना आक्रोश था कि उन्होंने खुद आरोपी को पकड़ लिया और तुरंत पुलिस को सूचना दी। पुलिस टीम मौके पर पहुंची और आरोपी को हिरासत में ले लिया। बछिया को भी बरामद कर लिया गया, जिसकी मेडिकल जांच की जा रही है।पुलिस ने इस मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी के खिलाफ सख्त धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 303(3) और 317(2) के साथ-साथ पशुओं के प्रति क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 की धारा 11(1)(a) के तहत केस दर्ज किया गया है। ये धाराएं अप्राकृतिक कृत्य, क्रूरता और पशु उत्पीड़न से संबंधित हैं। आरोपी को जल्द ही न्यायालय में पेश किया जाएगा, जहां उसे कड़ी सजा की उम्मीद है। दुबहर थाने के प्रभारी ने बताया कि जांच जारी है और कोई भी दोषी बख्शा नहीं जाएगा।

यह घटना समाज में बढ़ती विकृति का एक और उदाहरण है। पशु, जो बेजुबान और निर्दोष होते हैं, उन्हें भी मानव की हवस का शिकार बनाया जा रहा है। पशु क्रूरता निवारण अधिनियम का उद्देश्य ही पशुओं को अनावश्यक पीड़ा से बचाना है, लेकिन ऐसे मामले बताते हैं कि कानून के बावजूद अपराधी बेखौफ हैं।

Also Click : Lucknow: ‘किसान सम्मान दिवस’ मनाएगी योगी सरकार, पूर्व प्रधानमंत्री ‘भारत रत्न’ चौधरी चरण सिंह की 123वीं जयंती पर होगा आयोजन

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow