Barabanki News: सीएम डैशबोर्ड में खराब रैंकिंग पर डीएम का सख्त रुख, अधिकारियों को चेतावनी
डीएम ने स्पष्ट चेतावनी दी कि जिन विभागों की रैंकिंग 'ए' ग्रेड से नीचे है, उनके अधिकारियों का वेतन तत्काल प्रभाव से रोक दिया जाए और उनसे स्पष्टीकरण मांगा जाए। उन्होंने ...
बाराबंकी : बाराबंकी में मुख्यमंत्री की प्राथमिकता वाली 37 योजनाओं (सीएम डैशबोर्ड) की प्रगति की समीक्षा के लिए आयोजित बैठक में जिलाधिकारी शशांक त्रिपाठी ने खराब प्रदर्शन वाले विभागों के प्रति कड़ा रुख अपनाया। बैठक में विभिन्न योजनाओं की प्रगति की बारीकी से जांच की गई, और कमजोर प्रदर्शन पर नाराजगी जताते हुए अधिकारियों को तत्काल सुधार के निर्देश दिए गए।
खराब प्रदर्शन पर नाराजगी
जिलाधिकारी ने फैमिली आईडी, ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में दैनिक बिजली आपूर्ति, जल जीवन मिशन, मध्याह्न भोजन योजना, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम), ग्रामीण अभियंत्रण, सेतु निर्माण, मनरेगा, दिव्यांग पेंशन, और 15वें वित्त आयोग की ओडीओपी टूल किट योजना जैसी योजनाओं में अपेक्षित प्रगति न होने पर गहरी नाराजगी व्यक्त की।
विशेष रूप से फैमिली आईडी योजना में धीमी गति को लेकर उन्होंने सभी संबंधित अधिकारियों को दैनिक निगरानी सुनिश्चित करने का आदेश दिया। डीएम ने कहा, "कोई भी पात्र लाभार्थी योजना के लाभ से वंचित नहीं रहना चाहिए। लापरवाह अधिकारियों को चिन्हित कर तुरंत सक्रिय किया जाए।"
कठोर कार्रवाई के निर्देश
डीएम ने स्पष्ट चेतावनी दी कि जिन विभागों की रैंकिंग 'ए' ग्रेड से नीचे है, उनके अधिकारियों का वेतन तत्काल प्रभाव से रोक दिया जाए और उनसे स्पष्टीकरण मांगा जाए। उन्होंने जोर देकर कहा कि सीएम डैशबोर्ड की प्रगति में किसी भी तरह की लापरवाही अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
सड़क और सेतु निर्माण पर जोर
बैठक में जिले की सड़कों के निर्माण और मरम्मत कार्यों की स्थिति पर भी चर्चा हुई। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना और लोक निर्माण विभाग के तहत सेतु निर्माण की प्रगति को तेज करने के लिए अधिकारियों को त्वरित कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए। डीएम ने कहा कि बुनियादी ढांचे के विकास में किसी भी तरह की देरी स्वीकार्य नहीं होगी।
जिलाधिकारी शशांक त्रिपाठी का सख्त रवैया दर्शाता है कि बाराबंकी प्रशासन मुख्यमंत्री की प्राथमिकता वाली योजनाओं को लागू करने में कोई कोताही नहीं बरतेगा। अधिकारियों को अब प्रदर्शन सुधारने और समयबद्ध तरीके से लक्ष्य पूरे करने की चुनौती है, ताकि जिले की रैंकिंग में सुधार हो और पात्र लाभार्थियों को योजनाओं का पूरा लाभ मिल सके।
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