Sambhal: पश्चिम बंगाल में बाबरी मस्जिद के नाम पर निर्माण की निंदा, मुसलमानों में बाबरी मस्जिद का दर्द आज भी जिंदा - चौधरी मुशीर
पश्चिम बंगाल में बाबर के नाम पर बाबरी मस्जिद के निर्माण को लेकर सियासत गरमा गई है। इस मामले में सम्भल के AIMIM नेता एवं नगर पालिका
उवैस दानिश, सम्भल
पश्चिम बंगाल में बाबर के नाम पर बाबरी मस्जिद के निर्माण को लेकर सियासत गरमा गई है। इस मामले में सम्भल के AIMIM नेता एवं नगर पालिका परिषद सम्भल की AIMIM चेयरमैन के पति चौधरी मुशीर अली ने कड़ा ऐतराज जताते हुए इसकी निंदा की है। उन्होंने कहा कि मस्जिद अल्लाह का घर होती है और मस्जिद के नाम पर किसी को सियासत करने का हक नहीं है।
चौधरी मुशीर अली ने कहा कि मस्जिदों के नाम खलीफा या पैगंबरों के नाम पर होने चाहिए, न कि किसी ऐसे नाम पर जिससे विवाद और राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश की जाए। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि बाबर के नाम पर मस्जिद का नाम रखना केवल टीआरपी और सुर्खियां बटोरने का प्रयास है। ऐसे लोग इस्लाम की मूल भावना के खिलाफ काम कर रहे हैं और उन्हें इस्लाम के हवाले से लताड़ लगाई जानी चाहिए। उन्होंने 1992 में बाबरी मस्जिद के ढहाए जाने का जिक्र करते हुए कहा कि उस घटना का दर्द आज भी मुसलमानों के दिलों में है। ऐसे में बाबरी मस्जिद के नाम पर किसी नए विवाद को खड़ा करना न सिर्फ गलत है बल्कि जख्मों को फिर से हरा करने जैसा है।
उन्होंने पश्चिम बंगाल में बाबर के नाम पर बनाई जा रही कथित बाबरी मस्जिद पर कड़ा विरोध दर्ज कराया। इसके साथ ही चौधरी मुशीर अली ने बाबा बागेश्वर द्वारा नई बाबरी मस्जिद को 1992 की तरह ढहाने की चेतावनी को भी टीआरपी पाने की कोशिश बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि इस तरह के बयान देने वाले कुछ खास लोगों के एजेंट के रूप में काम कर रहे हैं और समाज में नफरत फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने सभी से अपील की कि मस्जिद और धर्म के नाम पर विवाद खड़ा करने से बचें और अमन-चैन व भाईचारे को बनाए रखें।
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