धर्मांतरण का रैकेट- छांगुर बाबा ने 1500 से अधिक हिंदू महिलाओं को बनाया निशाना, विदेशी फंडिंग से रची डेमोग्राफी बदलने की साजिश। 

BalrampurRacket: उत्तर प्रदेश के बलरामपुर जिले में अवैध धर्मांतरण के एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है। इस रैकेट का सरगना जमालुद्दीन उर्फ छांगुर बाबा, जो खुद...

Jul 12, 2025 - 16:15
 0  44
धर्मांतरण का रैकेट- छांगुर बाबा ने 1500 से अधिक हिंदू महिलाओं को बनाया निशाना, विदेशी फंडिंग से रची डेमोग्राफी बदलने की साजिश। 
धर्मांतरण का रैकेट- छांगुर बाबा ने 1500 से अधिक हिंदू महिलाओं को बनाया निशाना

उत्तर प्रदेश के बलरामपुर जिले में अवैध धर्मांतरण के एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है। इस रैकेट का सरगना जमालुद्दीन उर्फ छांगुर बाबा, जो खुद को पीर और सूफी संत बताता था, को यूपी एटीएस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। जांच में खुलासा हुआ है कि छांगुर ने 1500 से अधिक हिंदू महिलाओं को लालच, धमकी और प्रेमजाल के जरिए इस्लाम कबूल करने के लिए मजबूर किया। उसका मकसद देश की जनसंख्या संरचना (डेमोग्राफी) को बदलना और भारत को इस्लामी राष्ट्र बनाने की साजिश रचना था। इस रैकेट को विदेशी फंडिंग से बल मिला, जिसमें 100 करोड़ रुपये से अधिक की राशि 40 से ज्यादा बैंक खातों में जमा की गई।

  • रैकेट का खुलासा और गिरफ्तारी

यूपी एटीएस और एसटीएफ ने 4 जुलाई 2025 को बलरामपुर के उतरौला थाना क्षेत्र के मधपुर गांव में छापेमारी कर छांगुर बाबा उर्फ जमालुद्दीन और उसकी करीबी सहयोगी नीतू रोहरा उर्फ नसरीन को गिरफ्तार किया। इससे पहले, 8 अप्रैल 2025 को छांगुर के बेटे महबूब और सहयोगी नवीन रोहरा को भी हिरासत में लिया गया था। छांगुर पर पहले से गैर-जमानती वारंट जारी था और उस पर 50,000 रुपये का इनाम घोषित था।

जांच में पता चला कि छांगुर ने बलरामपुर, अयोध्या, और आसपास के जिलों में एक संगठित नेटवर्क बनाया था, जो गरीब, असहाय, विधवा, और मानसिक रूप से कमजोर महिलाओं को निशाना बनाता था। वह चमत्कार, इलाज, और आर्थिक मदद का लालच देकर या फर्जी मुकदमों में फंसाने की धमकी देकर धर्मांतरण करवाता था। एटीएस ने छांगुर की आलीशान कोठी से धार्मिक किताबें, कलावा, और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस बरामद किए, जो हिंदू महिलाओं को गुमराह करने के लिए इस्तेमाल किए जाते थे।

  • विदेशी फंडिंग और संपत्तियां

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने खुलासा किया कि छांगुर के 40 से अधिक बैंक खातों में 106 करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि जमा की गई थी। यह फंडिंग खाड़ी देशों, विशेष रूप से सऊदी अरब, तुर्की, और पाकिस्तान से आई थी। छांगुर और उसके सहयोगियों ने इस धन से बलरामपुर में शोरूम, आलीशान बंगले, और लग्जरी गाड़ियां खरीदीं। उसकी 3 करोड़ की कोठी पर प्रशासन ने बुलडोजर चलाया, और नीतू रोहरा की अवैध संपत्ति पर भी कार्रवाई हुई।

एटीएस के अनुसार, छांगुर और उसके सहयोगी 40 से 50 बार इस्लामी देशों की यात्रा कर चुके थे। नवीन रोहरा और नीतू ने 2015 में दुबई के अल फारूक उमर बिन खताब सेंटर में खुद का धर्मांतरण कराया था, जहां उनके नाम क्रमशः जमालुद्दीन और नसरीन रखे गए। नवीन ने 2016 से 2020 के बीच 19 बार दुबई की यात्रा की। यह फंडिंग स्विस बैंक और अन्य विदेशी खातों के जरिए भी की गई थी।

छांगुर का रैकेट विशेष रूप से हिंदू महिलाओं को निशाना बनाता था। जांच में सामने आए कुछ प्रमुख तथ्य इस प्रकार हैं:

लालच और धमकी: छांगुर गरीब और असहाय लोगों को आर्थिक मदद, नौकरी, या शादी का लालच देता था। बात न मानने पर फर्जी मुकदमों में फंसाने की धमकी दी जाती थी।

प्रेमजाल: लखनऊ की गुंजा गुप्ता को अबू अंसारी ने “अमित” बनकर प्रेमजाल में फंसाया और छांगुर की दरगाह में ले जाकर उसका धर्मांतरण करवाया। उसका नाम बदलकर अलीना अंसारी रखा गया।

ब्रेनवॉश: छांगुर अपनी कोठी और चांद औलिया दरगाह में उर्स और अन्य कार्यक्रम आयोजित करता था, जहां हिंदू धार्मिक प्रतीकों का इस्तेमाल कर लोगों का ब्रेनवॉश किया जाता था।

जाति आधारित रेट: रैकेट ने धर्मांतरण के लिए रेट तय किए थे—ब्राह्मण/क्षत्रिय/सरदार लड़कियों के लिए 15-16 लाख रुपये, पिछड़ी जाति की लड़कियों के लिए 10-12 लाख रुपये, और अन्य जातियों के लिए 8-10 लाख रुपये।

लक्षित समूह: निसंतान, विधवा, और मानसिक रूप से कमजोर महिलाएं मुख्य निशाना थीं। छांगुर उन्हें चमत्कार और इलाज का लालच देता था।

एटीएस के मुताबिक, छांगुर ने 3000 से 4000 लोगों का धर्मांतरण कराया, जिनमें 1500 से अधिक महिलाएं थीं। उसका नेटवर्क अयोध्या, आजमगढ़, और महाराष्ट्र तक फैला था, और वह भारत-नेपाल सीमा पर “दावा केंद्र” स्थापित करने की योजना बना रहा था।

छांगुर और नीतू को 7 दिन की रिमांड पर एटीएस को सौंपा गया है, जहां उनकी विदेशी फंडिंग और नेटवर्क की गहन जांच हो रही है। उनके खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 120बी (आपराधिक साजिश), 420 (धोखाधड़ी), और उत्तर प्रदेश अवैध धर्मांतरण निषेध अधिनियम, 2021 के तहत मामला दर्ज किया गया है।

एटीएस ने छांगुर की कोठी से बरामद दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसों से विदेशी फंडिंग का हिसाब-किताब मिला। उसके बेटे महबूब और सहयोगी नवीन लैपटॉप पर यह हिसाब रखते थे। जांच में यह भी पता चला कि छांगुर ने पुलिस, प्रशासन, और स्थानीय खुफिया इकाई (एलआईयू) के कुछ अधिकारियों को रिश्वत देकर अपने पक्ष में कर लिया था, जिसके कारण उसकी गतिविधियां लंबे समय तक पकड़ में नहीं आईं।

2022 में पांचजन्य ने छांगुर के कन्वर्जन रैकेट का खुलासा किया था, जिसमें 1500 से अधिक हिंदू महिलाओं के धर्मांतरण का दावा किया गया था। इस खुलासे के बाद भी कार्रवाई में देरी हुई, लेकिन 2025 में एटीएस और ईडी की संयुक्त कार्रवाई ने इस नेटवर्क को ध्वस्त कर दिया।

इस मामले ने उत्तर प्रदेश में हिंदू-मुस्लिम सौहार्द पर सवाल उठाए हैं। कई हिंदू संगठनों ने इस रैकेट की निंदा की और इसे “लव जिहाद” का हिस्सा बताया। लखनऊ में कुछ पीड़िताओं, जैसे मांडवी शर्मा और एलेना अंसारी, ने “घर वापसी” कर अपनी कहानियां साझा कीं, जिसमें उन्होंने बताया कि कैसे उन्हें ब्रेनवॉश कर इस्लाम कबूल करवाया गया।

X पर इस मामले को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं देखी गईं। एक यूजर ने लिखा, “छांगुर बाबा जैसे लोग भारत की एकता को तोड़ने की साजिश रच रहे हैं।” एक अन्य ने कहा, “विदेशी फंडिंग से धर्मांतरण का यह खेल देश के लिए खतरा है।” ये पोस्ट्स लोगों की भावनाओं को दर्शाती हैं, लेकिन तथ्यों की पुष्टि के लिए विश्वसनीय नहीं हैं।

विपक्षी दलों ने सरकार से सवाल किया कि इतने बड़े रैकेट को इतने सालों तक क्यों नहीं रोका गया। समाजवादी पार्टी के एक नेता ने कहा, “यह सरकार की नाकामी है कि विदेशी फंडिंग से इतना बड़ा नेटवर्क चल रहा था।” वहीं, सत्तारूढ़ भाजपा ने इस कार्रवाई को अपनी सख्त नीति का परिणाम बताया।

उत्तर प्रदेश में अवैध धर्मांतरण के मामले पहले भी सामने आए हैं। 2024 में लखनऊ की एनआईए कोर्ट ने मोहम्मद उमर गौतम और 15 अन्य को अवैध धर्मांतरण के लिए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। छांगुर का मामला भी इसी तरह की साजिश को उजागर करता है, जहां विदेशी फंडिंग और संगठित नेटवर्क का इस्तेमाल धार्मिक सौहार्द को बिगाड़ने के लिए किया जा रहा था।

जांच एजेंसियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती इस रैकेट के अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन को उजागर करना है। ईडी और एटीएस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि फंडिंग का स्रोत कौन-कौन से संगठन थे और इसका इस्तेमाल कहां-कहां हुआ। साथ ही, स्थानीय प्रशासन और पुलिस की भूमिका भी सवालों के घेरे में है, क्योंकि छांगुर ने अधिकारियों को रिश्वत देकर अपनी गतिविधियां चलाईं।

Also Read- कर्नाटक में कर्ज के विवाद में पति ने पत्नी की नाक काटी: पुलिस ने शुरू की जांच, पीड़िता का इलाज जारी।

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow

INA News_Admin आई.एन. ए. न्यूज़ (INA NEWS) initiate news agency भारत में सबसे तेजी से बढ़ती हुई हिंदी समाचार एजेंसी है, 2017 से एक बड़ा सफर तय करके आज आप सभी के बीच एक पहचान बना सकी है| हमारा प्रयास यही है कि अपने पाठक तक सच और सही जानकारी पहुंचाएं जिसमें सही और समय का ख़ास महत्व है।