Politics News: दिल्ली क्लासरूम घोटाला- मनीष सिसोदिया (Manish Sisodia) और सत्येंद्र जैन (Satyendra Jain) को ACB का समन, 2000 करोड़ के भ्रष्टाचार के आरोपों में पूछताछ।
दिल्ली सरकार के भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने आम आदमी पार्टी (AAP) के वरिष्ठ नेताओं और पूर्व मंत्रियों मनीष सिसोदिया (Manish Sisodia)...
दिल्ली सरकार के भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने आम आदमी पार्टी (AAP) के वरिष्ठ नेताओं और पूर्व मंत्रियों मनीष सिसोदिया (Manish Sisodia) और सत्येंद्र जैन (Satyendra Jain) को 4 जून 2025 को एक कथित 2000 करोड़ रुपये के क्लासरूम निर्माण घोटाले के सिलसिले में समन जारी किया। यह मामला दिल्ली के सरकारी स्कूलों में 12,748 क्लासरूम और अर्ध-स्थायी संरचनाओं के निर्माण में कथित वित्तीय अनियमितताओं से संबंधित है, जो AAP सरकार के कार्यकाल के दौरान हुआ। ACB ने 30 अप्रैल 2025 को दोनों नेताओं के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) की धारा 13(1) और भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 409 (आपराधिक विश्वासघात) और 120-B (आपराधिक साजिश) के तहत एक प्राथमिकी (FIR) दर्ज की थी। सत्येंद्र जैन (Satyendra Jain) को 6 जून और मनीष सिसोदिया (Manish Sisodia) को 9 जून को पूछताछ के लिए बुलाया गया है। इस मामले ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है, जिसमें AAP ने इसे भारतीय जनता पार्टी (BJP) की "राजनीतिक साजिश" करार दिया है, जबकि BJP ने इसे दिल्ली की जनता के लिए "न्याय का क्षण" बताया है।
यह मामला पहली बार 2019 में सामने आया, जब BJP नेताओं कपिल मिश्रा, हरीश खुराना, और नीलकांत बख्शी ने ACB में शिकायत दर्ज की थी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि दिल्ली के सरकारी स्कूलों में जोन 23, 24, और 28 में अतिरिक्त क्लासरूम के निर्माण में गंभीर वित्तीय अनियमितताएं हुईं। शिकायत के अनुसार, प्रत्येक क्लासरूम का निर्माण लागत 24.86 लाख रुपये थी, जो सामान्य लागत (लगभग 5 लाख रुपये प्रति क्लासरूम) से लगभग पांच गुना अधिक थी। यह परियोजना, जिसकी कुल लागत 2800 करोड़ रुपये से अधिक थी, में 34 ठेकेदारों को अनुबंध दिए गए, जिनमें से कई कथित तौर पर AAP से जुड़े थे।
2020 में, केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) की मुख्य तकनीकी परीक्षक की रिपोर्ट ने इस परियोजना में कई खामियों को उजागर किया। रिपोर्ट में कहा गया कि सरकारी वित्तीय नियमों, केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (CPWD) के नियमों, और निविदा प्रक्रियाओं का उल्लंघन हुआ। इसमें बिना उचित बोली के ठेके दिए जाना, परियोजना लागत में 17% से 90% तक की वृद्धि बिना नई निविदा के, निजी सलाहकारों की नियुक्ति बिना उचित प्रक्रिया के, और समयसीमा व धन के कुप्रबंधन जैसे उल्लंघन शामिल थे।
2022 में, दिल्ली सरकार के सतर्कता निदेशालय ने इस कथित घोटाले की जांच की सिफारिश की और मुख्य सचिव को एक रिपोर्ट सौंपी। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मार्च 2025 में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17-A के तहत इस मामले में FIR दर्ज करने की मंजूरी दी, जिसके बाद ACB ने 30 अप्रैल 2025 को मनीष सिसोदिया (Manish Sisodia) और सत्येंद्र जैन (Satyendra Jain) के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की।
- ACB की कार्रवाई और समन
ACB ने अपनी प्रारंभिक जांच में पाया कि 2015-16 में वित्त समिति द्वारा लागत और समयसीमा को सीमित करने के निर्णय के बावजूद, अधिकांश परियोजनाओं में बड़े पैमाने पर देरी और लागत वृद्धि हुई। ACB के अनुसार, क्लासरूम की निर्माण लागत 1,200 रुपये प्रति वर्ग फुट से बढ़कर 2,292 रुपये प्रति वर्ग फुट हो गई, और 205.45 करोड़ रुपये की लागत को "समृद्ध निर्माण विनिर्देशों" के उपयोग के लिए जिम्मेदार ठहराया गया, जिसके लिए नई निविदाएं नहीं बुलाई गईं।
ACB ने 4 जून 2025 को सत्येंद्र जैन (Satyendra Jain) को 6 जून और मनीष सिसोदिया (Manish Sisodia) को 9 जून को पूछताछ के लिए बुलाया। मनीष सिसोदिया (Manish Sisodia) उस समय दिल्ली के उपमुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री थे, जबकि सत्येंद्र जैन (Satyendra Jain) लोक निर्माण विभाग (PWD) मंत्री थे, जो इस परियोजना के कार्यान्वयन के लिए जिम्मेदार था। ACB के डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस श्वेता सिंह चौहान ने कहा, "जांच में भारी लागत वृद्धि और खरीद नियमों का उल्लंघन सामने आया है। 34 ठेकेदारों, जो कथित तौर पर AAP से जुड़े थे, को अनुबंध दिए गए।"
- AAP और BJP की प्रतिक्रियाएं
AAP ने इन आरोपों को खारिज करते हुए इसे BJP की "राजनीतिक साजिश" करार दिया। AAP के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अनुराग ढांडा ने कहा, "जिस तरह से सिसोदिया और अन्य नेताओं के खिलाफ मामले दर्ज किए जा रहे हैं, ऐसा लगता है कि जल्द ही उनके खिलाफ कुर्सी पर बैठने या दस्तावेज में अल्पविराम न लगाने के लिए भी मामले दर्ज हो सकते हैं।" AAP ने दावा किया कि BJP सरकारी संस्थाओं का दुरुपयोग AAP नेताओं को निशाना बनाने के लिए कर रही है।
दूसरी ओर, दिल्ली BJP अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने ACB से तत्कालीन मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की भूमिका की भी जांच करने की मांग की। उन्होंने कहा, "यह AAP और उसकी पिछली सरकार के भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई में एक निर्णायक क्षण है।" महाराष्ट्र BJP विधायक राम कदम और दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मंजिंदर सिंह सिरसा ने भी AAP की आलोचना की, जिसमें सिरसा ने कहा, "2000 करोड़ रुपये का घोटाला, जहां अस्थायी आश्रयों को 8,800 रुपये प्रति वर्ग फुट की दर से बनाया गया, जो पांच सितारा होटल बनाने की लागत से अधिक है।"
दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष देवेंद्र यादव ने भी इस मामले में AAP पर निशाना साधा और कहा कि यह FIR कांग्रेस द्वारा पहले उठाए गए भ्रष्टाचार के आरोपों को मान्य करता है। उन्होंने इसे दिल्ली शराब नीति मामले जितना बड़ा घोटाला बताया।
यह मामला AAP के लिए एक बड़ा झटका है, क्योंकि पार्टी ने अपनी शिक्षा सुधारों को अपनी सबसे बड़ी उपलब्धि के रूप में प्रचारित किया था। AAP की चुनावी रणनीतियां दिल्ली के सरकारी स्कूलों और कॉलेजों में सुधार पर केंद्रित रही हैं। इस घोटाले के आरोपों ने पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचाया है, खासकर तब जब सिसोदिया और जैन दोनों पहले से ही अन्य मामलों में जमानत पर हैं। सिसोदिया को 2023 में दिल्ली शराब नीति मामले में CBI ने गिरफ्तार किया था, और जैन को 2022 में मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने गिरफ्तार किया था।
यह मामला भारत में भ्रष्टाचार और जवाबदेही के व्यापक मुद्दों को भी उजागर करता है। सोशल मीडिया, विशेष रूप से X पर, इस मामले को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। @news24tvchannel ने लिखा, "दिल्ली के पूर्व मंत्री मनीष सिसोदिया (Manish Sisodia) और सत्येंद्र जैन (Satyendra Jain) को ACB का समन। ACB ने अप्रैल महीने में दोनों के खिलाफ स्कूलों में क्लासरूम्स के निर्माण में भ्रष्टाचार के संबंध में FIR दर्ज की थी।" @BJP4Delhi ने इस कार्रवाई को दिल्ली की जनता के लिए न्याय की दिशा में एक कदम बताया।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यह मामला जटिल है, क्योंकि इसमें कई पक्ष शामिल हैं, और सबूतों को सत्यापित करने में समय लग सकता है। हालांकि, CVC की 2020 की रिपोर्ट और ACB की प्रारंभिक जांच ने मजबूत आधार प्रदान किया है, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई हो सकती है। ACB ने इस मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17-A के तहत मंजूरी प्राप्त करने के बाद FIR दर्ज की। यह धारा सार्वजनिक सेवकों के खिलाफ भ्रष्टाचार से संबंधित अपराधों की जांच के लिए मंजूरी की आवश्यकता को रेखांकित करती है। ACB अब मंत्रियों, सरकारी अधिकारियों, और ठेकेदारों की भूमिका की जांच कर रही है।
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