Deoband News: जमीयत ने वक्फ संशोधन कानून को सुप्रीम कोर्ट में दी चुनौती, जमीयत अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी बोले- वक्फ की हिफाजत करना हमारा धार्मिक कर्तव्य
कहा कि यह कानून भारतीय संविधान पर सीधा हमला है। क्योंकि संविधान न सिर्फ सभी नागरिकों को समान अधिकार देता है, बल्कि पूर्ण धार्मिक स्वतंत्रता भी प्रदान करता है। बिल मुसलमानों की...
By INA News Deoband.
देवबंद: जमीयत उलमा-ए-हिंद ने वक्फ संशोधन कानून को सर्वोच्च अदालत में चुनौती दी है। जमीयत के वकीलों ने रिट याचिका दाखिल कर केंद्र सरकार को नोटिफिकेशन जारी करने से रोकने के लिए अंतरिम आदेश की भी मांग की है। जमीयत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने रविवार को कहा कि हमने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि अगर यह बिल कानून बन गया तो हम इसे देश की सर्वोच्च अदालत में चुनौती देंगे। इसलिए राष्ट्रपति की मुहर लगते ही जमीयत ने इस कानून के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में रिट याचिका दाखिल कर की है।
कहा कि यह कानून भारतीय संविधान पर सीधा हमला है। क्योंकि संविधान न सिर्फ सभी नागरिकों को समान अधिकार देता है, बल्कि पूर्ण धार्मिक स्वतंत्रता भी प्रदान करता है। बिल मुसलमानों की धार्मिक स्वतंत्रता छीनने की साजिश है, जो पूरी तरह संविधान के खिलाफ है। जमीयत की राज्य इकाईयां भी इस कानून के खिलाफ संबंधित राज्यों के हाईकोर्ट में याचिकाएं दाखिल करेंगी। क्योंकि हम न्यायपालिका पर पूरा भरोसा रखते हैं। जैसे अन्य मामलों में न्याय हुआ, वैसे ही इस संवेदनशील और असांवैधानिक कानून पर भी हमे न्याय मिलेगा।
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मौलाना मदनी ने तथाकथित सेक्युलर दलों की आलोचना करते हुए कहा कि हमने इस कानून को रोकने के लिए हर संभव प्रयास किए। संविधान रक्षा सम्मेलन कर उन लोगों के जमीर को जगाने का प्रयास किया जिन्होंने सत्ता के लालच में संविधान की मूल आत्मा को ही भूला दिया।लेकिन अफसोस खुद को सेक्युलर कहने वाली पार्टियों ने न सिर्फ मुसलमानों के हितों का सौदा किया, बल्कि संविधान को भी अपने पैरों तले कुचल डाला। उनका असली चेहरा पूरे देश के सामने उजागर हो गया।
मौलाना अरशद मदनी ने कहा कि इन नेताओं का व्यवहार सांप्रदायिक ताकतों से भी ज्यादा खतरनाक है। क्योंकि इन्होंने दोस्त बनकर पीठ में छूरा घोंपा है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि सेक्युलर जनता और खासकर मुसलमान इन्हें कभी माफ नहीं करेंगे। मदनी ने संसद में बिल का विरोध करने वाले सेक्युलर सांसदों और संसद के बाहर इस कानून के खिलाफ आवाज उठाने वाले न्यायप्रिय नागरिकों का आभार जताया है।
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