Deoband : दारुल उलूम वक्फ के वरिष्ठ उस्ताद मौलाना कमर उस्मानी का निधन, मजार-ए-कासमी में किए गए सुपुर्द-ए-खाक
एक विद्वान शिक्षक होने के साथ-साथ वे एक बेहतरीन शायर भी थे। उनके गजल संग्रह 'नूरो निकहत' को काफी पसंद किया गया और इसके लिए उन्हें उत्तर प्रदेश उर्दू अकादमी ने सम्मानित भी किया था। उनके निधन की सूचना मिलते ही उनके घर पर लोगों की भारी
इस्लामिक शिक्षा जगत की जानी-मानी शख्सियत और दारुल उलूम वक्फ के वरिष्ठ उस्ताद मौलाना कमर उस्मानी का 91 वर्ष की आयु में लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। उनके इंतकाल की खबर फैलते ही देवबंद और आसपास के क्षेत्रों में शोक की लहर दौड़ गई। मोहल्ला अबुल बरकात के रहने वाले मौलाना कमर उस्मानी ने अपनी शिक्षा दारुल उलूम से पूरी की थी और इसके बाद वे जीवनभर शिक्षण कार्य से जुड़े रहे। उन्होंने दारुल उलूम वक्फ में लंबे समय तक छात्रों को हदीस की शिक्षा दी।
एक विद्वान शिक्षक होने के साथ-साथ वे एक बेहतरीन शायर भी थे। उनके गजल संग्रह 'नूरो निकहत' को काफी पसंद किया गया और इसके लिए उन्हें उत्तर प्रदेश उर्दू अकादमी ने सम्मानित भी किया था। उनके निधन की सूचना मिलते ही उनके घर पर लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई। दोपहर के समय दारुल उलूम के परिसर में उनकी अंतिम नमाज पढ़ी गई और इसके बाद उन्हें मजार-ए-कासमी कब्रिस्तान में दफनाया गया। उनके निधन पर संस्थान के प्रमुख मौलाना अबुल कासिम नोमानी, मौलाना सुफियान कासमी, प्रसिद्ध शायर डॉक्टर नवाज देवबंदी और अन्य विद्वानों ने गहरा दुख व्यक्त करते हुए इसे समाज के लिए एक अपूरणीय क्षति बताया है।
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