भारत निर्वाचन आयोग ने नई दिल्ली में मुख्य निर्वाचन अधिकारियों का सम्मेलन आयोजित किया, मतदाता सूची के डिजिटलीकरण पर हुई चर्चा
सम्मेलन में मुख्य निर्वाचन अधिकारियों ने अपने-अपने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाताओं की संख्या, अंतिम एसआईआर की अर्हता तिथि और पिछली बार पूर्ण किए गए एसआईआ
भारत निर्वाचन आयोग ने नई दिल्ली में भारतीय अंतर्राष्ट्रीय लोकतंत्र एवं निर्वाचन प्रबंधन संस्थान (आईआईआईडीईएम) में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों का तीसरा सम्मेलन आयोजित किया। इस सम्मेलन में उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा और उप मुख्य निर्वाचन अधिकारी अमित सिंह ने हिस्सा लिया। सम्मेलन का उद्देश्य राष्ट्रव्यापी विशेष मतदाता गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभ्यास की तैयारियों का आकलन करना और मतदाता सूची के डिजिटलीकरण सहित अन्य महत्वपूर्ण पहलुओं पर चर्चा करना था।
सम्मेलन का उद्घाटन मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने किया, जिसमें चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी भी उपस्थित थे। इस दौरान आयोग ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों के कार्यालयों द्वारा एसआईआर के लिए की गई तैयारियों की समीक्षा की। बिहार के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने अपनी प्रस्तुति में एसआईआर के दौरान अपनाई गई रणनीतियों, सामने आई चुनौतियों और सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा किया, ताकि अन्य राज्य उनके अनुभवों से सीख सकें।
सम्मेलन में मुख्य निर्वाचन अधिकारियों ने अपने-अपने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाताओं की संख्या, अंतिम एसआईआर की अर्हता तिथि और पिछली बार पूर्ण किए गए एसआईआर के आधार पर मतदाता सूची की स्थिति पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने अपनी वेबसाइटों पर मतदाता सूची के डिजिटलीकरण और अपलोडिंग की प्रगति भी साझा की। इसके अलावा, पिछले एसआईआर के आधार पर वर्तमान मतदाताओं के साथ मिलान की स्थिति पर भी चर्चा हुई, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि मतदाता सूची में कोई त्रुटि न रहे।
आयोग ने यह सुनिश्चित करने के लिए भी समीक्षा की कि किसी भी मतदान केंद्र पर 1,200 से अधिक मतदाता न हों। इसके लिए मतदान केंद्रों के युक्तिकरण की प्रक्रिया की स्थिति पर भी विचार-विमर्श किया गया। मुख्य निर्वाचन अधिकारियों ने सुझाव दिए कि पात्र नागरिकों को मतदाता सूची में शामिल करने और अपात्र व्यक्तियों को हटाने के लिए कौन से दस्तावेज स्वीकार किए जाएं। यह भी जोर दिया गया कि दस्तावेज जमा करने की प्रक्रिया को इतना सरल रखा जाए कि पात्र नागरिकों को कोई परेशानी न हो।
सम्मेलन में जिला निर्वाचन अधिकारियों (डीईओ), निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों (ईआरओ), सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों (एईआरओ), बूथ स्तर अधिकारियों (बीएलओ) और बूथ स्तर एजेंटों (बीएलए) की नियुक्ति और प्रशिक्षण की स्थिति की भी समीक्षा की गई। आयोग ने इन अधिकारियों के प्रशिक्षण को और प्रभावी बनाने के लिए दिशा-निर्देश दिए, ताकि मतदाता सूची की तैयारी और निर्वाचन प्रक्रिया में कोई कमी न रहे।
इस सम्मेलन से उत्तर प्रदेश सहित सभी राज्यों को अपनी तैयारियों को और मजबूत करने का अवसर मिला। नवदीप रिणवा ने कहा कि उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची के डिजिटलीकरण और युक्तिकरण के लिए पहले से ही कई कदम उठाए गए हैं, और इस सम्मेलन से प्राप्त सुझावों को लागू कर प्रक्रिया को और बेहतर किया जाएगा। यह सम्मेलन न केवल निर्वाचन प्रक्रिया को पारदर्शी और समावेशी बनाने में मदद करेगा, बल्कि यह भी सुनिश्चित करेगा कि हर पात्र नागरिक को मतदान का अधिकार मिले।
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