तुर्कमान गेट हिंसा: दिल्ली अदालत ने 5 आरोपियों की जमानत याचिका पर फैसला सुरक्षित रखा, दो नए आरोपियों को 8 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा।
तुर्कमान गेट इलाके में फैज-ए-इलाही मस्जिद के पास दिल्ली नगर निगम द्वारा हाईकोर्ट के आदेश पर चलाए गए अतिक्रमण हटाने के अभियान के दौरान 6-7 जनवरी
- तुर्कमान गेट पथराव मामले में दिल्ली की तीस हजारी अदालत ने पांच आरोपियों की जमानत याचिका पर सुनवाई पूरी कर फैसला कल तक के लिए सुरक्षित रख लिया है
- हिंसा के दौरान पुलिस पर हमले के आरोप में दो नए गिरफ्तार आरोपियों को अदालत ने 8 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है
- तुर्कमान गेट हिंसा मामले में बचाव पक्ष ने कस्टोडियल वायलेंस के आरोप लगाए जबकि पुलिस ने जमानत का विरोध करते हुए जांच जारी रखने की मांग की
तुर्कमान गेट इलाके में फैज-ए-इलाही मस्जिद के पास दिल्ली नगर निगम द्वारा हाईकोर्ट के आदेश पर चलाए गए अतिक्रमण हटाने के अभियान के दौरान 6-7 जनवरी की मध्यरात्रि को हिंसा भड़की थी। इस दौरान भीड़ ने पुलिस और नगर निगम की टीम पर पथराव किया था जिसमें क्षेत्र के थाना प्रभारी सहित पांच पुलिसकर्मी घायल हो गए थे। पुलिस ने इस घटना के बाद चांदनी महल थाने में भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की थी जिसमें सार्वजनिक सेवक को कर्तव्य निर्वहन में बाधा डालना, हमला करना, दंगा करना और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने जैसे आरोप शामिल हैं। हिंसा अफवाहों से जुड़ी बताई गई है जिसमें सोशल मीडिया पर मस्जिद के विध्वंस की गलत जानकारी फैलाई गई थी जिससे लोग इकट्ठा हुए थे।
दिल्ली की तीस हजारी अदालत में 13 जनवरी को तुर्कमान गेट हिंसा मामले में पांच आरोपियों की जमानत याचिका पर सुनवाई हुई। अदालत ने इन आरोपियों की जमानत पर फैसला सुरक्षित रख लिया है और इसे अगले दिन यानी 14 जनवरी को सुनाया जाएगा। बचाव पक्ष के वकीलों ने अदालत में दलील दी कि आरोपियों के खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं है और वे घटनास्थल पर मौजूद नहीं थे। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि आरोपियों को हिरासत में कस्टोडियल वायलेंस का सामना करना पड़ा है। अदालत ने इन आरोपों पर जेल अधीक्षक से मेडिकल रिकॉर्ड और सीसीटीवी फुटेज मांगे हैं।
सुनवाई के दौरान दो नए आरोपियों को भी अदालत में पेश किया गया जिन्हें पुलिस ने हाल ही में गिरफ्तार किया था। अदालत ने इन दोनों आरोपियों को 8 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है जो 21 जनवरी तक चलेगी। पुलिस ने अदालत को बताया कि जांच अभी जारी है और कई अन्य लोग अभी भी पहचान के दायरे में हैं। अभियोजन पक्ष ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि हिंसा में शामिल सैकड़ों लोगों की भीड़ थी और आरोपियों की रिहाई से अन्य लोगों को चेतावनी देने या सबूतों से छेड़छाड़ करने का खतरा है।
पुलिस ने अदालत में सीसीटीवी फुटेज और मोबाइल फोन से प्राप्त डिजिटल सबूत पेश किए जिसमें आरोपियों की मौजूदगी दिखाई गई है। अभियोजन ने दावा किया कि आरोपियों के फोन में धमकी भरे संदेश और अफवाह फैलाने वाले वीडियो मिले हैं। बचाव पक्ष ने इन सबूतों पर सवाल उठाते हुए कहा कि गिरफ्तारियां एफआईआर दर्ज होने से पहले की गईं और आरोप गलत तरीके से लगाए गए हैं। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद जमानत पर फैसला सुरक्षित रखा।
तुर्कमान गेट हिंसा के बाद दिल्ली पुलिस ने इलाके में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। जुम्मे की नमाज के दौरान विशेष इंतजाम किए गए थे और ड्रोन तथा सीसीटीवी से निगरानी की जा रही है। अब तक कुल 18 से अधिक लोग गिरफ्तार हो चुके हैं जिसमें एक नाबालिग भी शामिल है। पुलिस ने सीसीटीवी और बॉडी कैमरा फुटेज के आधार पर 50 से अधिक लोगों की पहचान की है और जांच जारी है।
अदालत में सुनवाई के दौरान पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ हत्या की कोशिश जैसी गंभीर धाराएं लगाने की बात कही है। बचाव पक्ष ने दावा किया कि आरोपियों के पास कोई आपराधिक इतिहास नहीं है और वे स्थानीय निवासी हैं। अदालत ने पुलिस को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है और मेडिकल जांच के आदेश दिए हैं। यह मामला अतिक्रमण हटाने के अभियान से जुड़ा है जो दिल्ली हाईकोर्ट के निर्देश पर चलाया गया था।
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