संविधान की आड़ में महिलाओं का शोषण: चंद्रशेखर आजाद जैसे नेताओं की काली करतूतें और रोहिणी घावरी का संघर्ष
ऐसे ही एक मामले ने हाल ही में सुर्खियां बटोरी हैं, जहां स्विट्जरलैंड में पीएचडी कर रही डॉ. रोहिणी घावरी वाल्मीकि ने भीम आर्मी प्रमुख और नगीना से लोकसभा सांसद चंद्रशेखर
भारतीय राजनीति में महिलाओं का सम्मान एक ऐसा नारा है जो हर चुनावी मंच पर गूंजता है। 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' से लेकर 'महिलाओं का सम्मान' तक, ये स्लोगन राजनीतिक दलों की ब्रांडिंग का हिस्सा बन चुके हैं। लेकिन हकीकत में, संविधान की आड़ में ऊंचे ओहदों पर बैठे नेता महिलाओं को पैर की जूती की तरह इस्तेमाल करते हैं। वे दिन में सम्मान की बातें करते हैं और रात में शोषण की साजिशें रचते हैं। यह दोहरा चरित्र न केवल महिलाओं के सम्मान को ठेस पहुंचाता है, बल्कि समाज के नैतिक ताने-बाने को भी कमजोर करता है।
ऐसे ही एक मामले ने हाल ही में सुर्खियां बटोरी हैं, जहां स्विट्जरलैंड में पीएचडी कर रही डॉ. रोहिणी घावरी वाल्मीकि ने भीम आर्मी प्रमुख और नगीना से लोकसभा सांसद चंद्रशेखर आजाद पर गंभीर आरोप लगाए हैं। रोहिणी, जो वाल्मीकि समुदाय से आती हैं और देश का नाम रोशन करने वाली एक सफल महिला हैं, ने चंद्रशेखर पर यौन शोषण, धोखा, भावनात्मक ब्लैकमेल और कई अन्य लड़कियों के जीवन बर्बाद करने के आरोप लगाए हैं। यह मामला केवल व्यक्तिगत विवाद नहीं, बल्कि दलित समाज में महिलाओं के शोषण और राजनीतिक नेताओं के दोहरे चरित्र का प्रतीक है।
रोहिणी घावरी: संघर्ष से सफलता तक की यात्रा
डॉ. रोहिणी घावरी वाल्मीकि का जन्म 28 अगस्त 1992 को मध्य प्रदेश के इंदौर में एक सफाई कर्मचारी के परिवार में हुआ। उनके पिता न्यूटन घावरी बीमा अस्पताल में सफाई कर्मी थे, जबकि मां एक गृहिणी। वाल्मीकि समुदाय से ताल्लुक रखने वाली रोहिणी ने बचपन से ही आर्थिक तंगी और सामाजिक भेदभाव का सामना किया। लेकिन उनकी लगन और मेहनत ने उन्हें ऊंचाइयों तक पहुंचाया।
रोहिणी ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा इंदौर के सरकारी स्कूलों से पूरी की। वे हमेशा से ही पढ़ाई में अव्वल रहीं। 2014 में उन्होंने नेशनल ओवरसीज स्कॉलरशिप प्राप्त की, जो दलित छात्रों के लिए आरक्षित है। इस स्कॉलरशिप की कीमत लगभग 1 करोड़ रुपये थी, जिसके बल पर वे स्विट्जरलैंड चली गईं। वहां उन्होंने बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन में पीएचडी पूरी की, जो 2024 में समाप्त हुई। उनकी थीसिस लीडरशिप और बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन पर केंद्रित थी, जिसमें उन्होंने सामाजिक न्याय और महिला सशक्तिकरण पर जोर दिया।
रोहिणी की प्रमुख उपलब्धियां
| उपलब्धि | विवरण | स्रोत |
|---|---|---|
| पीएचडी डिग्री | स्विट्जरलैंड से बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन में, 2024 | LinkedIn प्रोफाइल |
| जनपावर फाउंडेशन | संस्थापक और सीईओ; शिक्षा और समानता पर फोकस | OpIndia |
| यूएन प्रतिनिधि | 2023 में 52वें सेशन में दलित अधिकारों पर भाषण; एएनआई और न्यूज18 कवरेज | |
| वाल्मीकि कम्युनिटी लीडरशिप अवॉर्ड | 2024 में इंदौर में सम्मानित | Opinion Class |
| मार्केटिंग लीडर | 6+ वर्षों का अनुभव; ब्रांड ग्रोथ में योगदान |
रोहिणी ने जनपावर फाउंडेशन की स्थापना की, जो युवाओं को शिक्षा और कौशल प्रदान करने पर काम करती है। वे संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) में भारत के दलित अधिकारों पर बोल चुकी हैं। 2023 के 52वें सेशन में उनका भाषण एक्स पर ट्रेंड हुआ और मीडिया में छाया रहा। उन्होंने भारत के संवैधानिक प्रावधानों की सराहना करते हुए वंश-आधारित भेदभाव पर ध्यान दिलाया। उनकी वकालत आज तक, दैनिक भास्कर और द प्रिंट जैसे मीडिया में प्रमुखता से आई।
रोहिणी की सफलता दलित महिलाओं के लिए प्रेरणा है। वे कहती हैं, "मैंने विदेश में अकेले संघर्ष किया, लेकिन कभी हार नहीं मानी।" उनकी नेट वर्थ सार्वजनिक नहीं है, लेकिन उनकी शिक्षा और एनजीओ कार्य से स्पष्ट है कि वे आर्थिक रूप से स्वावलंबी हैं। एक वायरल वीडियो में उन्होंने बताया कि वे स्विट्जरलैंड से महंगे जूते चंद्रशेखर को भेजती थीं, जो उनके शोषण का हिस्सा बने। रोहिणी का जीवन साबित करता है कि बेटियां न केवल बचाई जा सकती हैं, बल्कि वे देश का नाम भी रोशन कर सकती हैं – बशर्ते समाज उन्हें समर्थन दे।
रोहिणी घावरी के आरोप: धोखे, शोषण और ब्लैकमेल की सनसनीखेज कहानी
जून 2025 में रोहिणी ने एक्स पर एक पोस्ट से विवाद की आग लगाई। उन्होंने चंद्रशेखर आजाद पर आरोप लगाया कि उन्होंने शादी का झांसा देकर उनका शोषण किया। रोहिणी ने कहा, "मैंने उसे प्यार किया, लेकिन उसने धोखा दिया।" उनके अनुसार, चंद्रशेखर ने अपनी शादी छिपाई और कई वर्षों तक भावनात्मक रूप से उन्हें फंसाए रखा।
रोहिणी के प्रमुख आरोप निम्न हैं:
- यौन शोषण और धोखाधड़ी: रोहिणी ने बताया कि चंद्रशेखर ने होटल में उन्हें बुलाया और शादी का वादा कर शारीरिक संबंध बनाए। फ्री प्रेस जर्नल के अनुसार, "उन्होंने कहा कि चंद्रशेखर ने हमेशा उन्हें धोखे में रखा।" ओपइंडिया में रोहिणी ने खुलासा किया कि चंद्रशेखर ने कई लड़कियों के जीवन बर्बाद किए, पैसों का शोषण किया।
- भावनात्मक ब्लैकमेल: रोहिणी ने वीडियो जारी किए जहां चंद्रशेखर रोते हुए माफी मांगते दिखे। उन्होंने कहा, "झूठे आंसू दिखाकर कई लड़कियों को फंसाया।" दैनिक भास्कर में उल्लेख है कि रोहिणी ने एक अन्य महिला से बात की जो भी कथित रूप से शोषित हुई।
- राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल: रोहिणी के पिता ने ओपइंडिया को बताया, "चंद्रशेखर ने कहा था कि रोहिणी को मायावती से बड़ा दलित नेता बनाएंगे।" लेकिन चुनाव जीतने के बाद उन्हें ठुकरा दिया।
- आत्महत्या की धमकी: सितंबर 2025 में रोहिणी ने एक्स पर पोस्ट किया, "चंद्रशेखर ने मेरी जिंदगी बर्बाद कर दी। आज जहर लूंगा।" उन्होंने पीएम मोदी को टैग किया और कहा, "मेरा शव भारत न लाना।" द डेली गार्जियन ने इसे कवर किया।
- मायावती और कांशीराम पर आपत्तिजनक टिप्पणियां: अक्टूबर 2025 में रोहिणी ने एक ऑडियो जारी किया जहां चंद्रशेखर कथित रूप से कहते हैं कि मायावती ने कांशीराम को रेप के आरोप लगाने की धमकी दी। द न्यूज ड्रिल के अनुसार, रोहिणी ने 1 करोड़ का इनाम घोषित किया ऑडियो की सत्यता साबित करने पर।
रोहिणी के प्रमुख आरोपों की टाइमलाइन
| तिथि | आरोप | स्रोत |
|---|---|---|
| जून 2025 | यौन उत्पीड़न और शादी का झांसा | OpIndia , Jansatta |
| जुलाई 2025 | FIR की मांग; UN में भूख हड़ताल की चेतावनी | OneIndia |
| अगस्त 2025 | कई लड़कियों का शोषण; पिता का बयान | OpIndia |
| सितंबर 2025 | आत्महत्या की धमकी | Bhaskar English |
| अक्टूबर 2025 | मायावती पर आपत्तिजनक ऑडियो | OpIndia Hindi |
राजनीति में महिलाओं का शोषण: संविधान की आड़ में काली करतूतें
भारतीय संविधान अनुच्छेद 14, 15 और 21 के तहत महिलाओं को समानता और सम्मान का अधिकार देता है। लेकिन ऊंचे पदों पर बैठे नेता इसे ढाल बनाकर शोषण करते हैं। चंद्रशेखर आजाद का मामला इसका जीता-जागता उदाहरण है। वे खुद को दलित मसीहा कहते हैं, लेकिन रोहिणी जैसे मामलों में महिलाओं को मोहरा बनाते हैं।
राजनीति में महिलाओं का शोषण कोई नई बात नहीं। 2023 के एक अध्ययन के अनुसार, 70% महिला सांसदों ने कार्यस्थल उत्पीड़न का सामना किया। चंद्रशेखर ने 'मायावती से बड़ा नेता' का वादा कर रोहिणी को फंसाया। चुनाव जीतने के बाद उन्हें 'नागिन' कहा। यह पैटर्न है: नेता महिलाओं को इस्तेमाल करते हैं, फिर त्याग देते हैं।
राजनीतिक शोषण के उदाहरण
| नेता/मामला | शोषण का रूप | प्रभाव |
|---|---|---|
| चंद्रशेखर आजाद | शादी का झांसा, यौन शोषण | रोहिणी का जीवन बर्बाद; अन्य लड़कियां प्रभावित |
| सामान्य ट्रेंड | कार्यस्थल उत्पीड़न | 70% महिलाएं प्रभावित (NCW रिपोर्ट) |
| अन्य केस | पावर के दुरुपयोग | #MeTooIndia में 100+ मामले |
ये नेता 'महिलाओं का सम्मान' का स्लोगन देते हैं, लेकिन पीछे काली करतूतें छिपाते हैं। रोहिणी ने कहा, "वह पैर की जूती समझते हैं।" समाज में पुरुषों के कृत्यों को बहिष्कृत क्यों नहीं किया जाता? रोहिणी के मामले में दलित पुरुषों ने विरोध नहीं किया, जो दोगलापन दर्शाता है।
समाज का दोगला चरित्र: पुरुषों की अय्याशी vs महिलाओं की गलती
भारतीय समाज में एक बड़ा विरोधाभास है। रेप हो तो लड़की की गलती, पति से शिकायत तो औरत का दोष। रोहिणी का मामला इसका प्रतिबिंब है। चंद्रशेखर की पत्नी ने शादी से पहले प्रेग्नेंट होने पर FIR की धमकी दी, लेकिन समाज चुप। रोहिणी ने कहा, "उसकी बीवी का चरित्र या चंद्रशेखर का?"
एक्स पोस्ट्स से स्पष्ट है कि रोहिणी को ट्रोल किया गया लेकिन चंद्रशेखर को Y+ सिक्योरिटी मिली। यह दोगलापन महिलाओं को असुरक्षित बनाता है। रोहिणी ने कहा, "समाज सिर्फ स्त्री के चरित्र पर सवाल उठाता है।"
दोगलेपन के उदाहरण
| स्थिति | समाज की प्रतिक्रिया | उदाहरण |
|---|---|---|
| पुरुष का कृत्य | बहिष्कार नहीं | चंद्रशेखर का शोषण |
| महिला की शिकायत | दोषी ठहराना | रोहिणी को BJP एजेंट कहना |
| सामान्य | रेप में लड़की दोषी | NCRB डेटा: 90% केस अनसुलझे |
यह चरित्र समाज को खोखला कर रहा है। बेटियां सुरक्षित कैसे रहें जब नेता ही शोषक हों?
बेटी बचाओ का नारा: खोखला प्रचार या वास्तविक प्रतिबद्धता?
'बेटी बचाओ' का नारा 2015 में शुरू हुआ, लेकिन 2025 में भी महिलाएं असुरक्षित हैं। रोहिणी ने कहा, "कहां गया यह नारा? नेता बोलते हैं लेकिन करते कुछ नहीं।" चंद्रशेखर जैसे जनप्रतिनिधि समाज को कैसे बचाएंगे जब वे खुद आरोपी हैं?
राजनीतिक दलों को जवाबदेह बनाना होगा। BJP ने 'महिलाओं का सम्मान' कहा, लेकिन रोहिणी ने आरोप लगाया कि वे चंद्रशेखर को बचा रहे हैं। सिस्टम में सुधार जरूरी: तेज FIR, सख्त सजा। रोहिणी का संघर्ष सभी बेटियों के लिए है।
रोहिणी घावरी का मामला भारतीय राजनीति के काले अध्याय को उजागर करता है। संविधान की आड़ में शोषण रुकना चाहिए। समाज को दोगलापन छोड़कर महिलाओं का साथ देना होगा। रोहिणी की तरह हर बेटी सुरक्षित हो, यही सच्चा सम्मान होगा। न्याय मिले, तभी 'बेटी बचाओ' जीवंत होगा।
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