अजब गजब: नन्हे गजराज का दिल छू लेने वाला आभार- कीचड़ के गड्ढे से रेस्क्यू के बाद JCB को सूंड से छूकर कहा धन्यवाद। 

छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में  एक ऐसी दिल छू लेने वाली घटना घटी, जिसने मानव और प्रकृति के बीच के गहरे रिश्ते को एक बार फिर उजागर ...

Jun 6, 2025 - 13:34
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अजब गजब: नन्हे गजराज का दिल छू लेने वाला आभार- कीचड़ के गड्ढे से रेस्क्यू के बाद JCB को सूंड से छूकर कहा धन्यवाद। 

छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में  एक ऐसी दिल छू लेने वाली घटना घटी, जिसने मानव और प्रकृति के बीच के गहरे रिश्ते को एक बार फिर उजागर कर दिया। रायगढ़ के घरघोड़ा वन क्षेत्र में एक नन्हा हाथी का बच्चा कीचड़ भरे गड्ढे में फंस गया था। स्थानीय ग्रामीणों और वन विभाग की तत्परता से कई घंटों के रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद उसे सुरक्षित निकाल लिया गया। लेकिन इस कहानी का सबसे भावुक पल तब आया, जब नन्हा गजराज ने अपनी सूंड से JCB मशीन को छूकर मानो धन्यवाद कहा। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसने लाखों लोगों के दिलों को छू लिया। 

घटना रायगढ़ जिले के लैलूंगा-घरघोड़ा वन क्षेत्र में हुई, जहां 4 जून 2025 को एक हाथियों का झुंड पानी पीने और नहाने के लिए जंगल में विचरण कर रहा था। इस दौरान एक नन्हा हाथी, जो अपने झुंड के साथ था, फिसलकर कीचड़ भरे गहरे गड्ढे में गिर गया। गड्ढे की गहराई और कीचड़ के कारण वह बार-बार बाहर निकलने की कोशिश करने के बावजूद असफल रहा। उसकी चिंघाड़ सुनकर झुंड के अन्य हाथी तो आगे बढ़ गए, लेकिन स्थानीय ग्रामीणों ने उसकी मदद के लिए तुरंत कदम उठाया। ग्रामीणों ने वन विभाग को सूचित किया, और वन विभाग की एक टीम तत्काल JCB मशीन और अन्य उपकरणों के साथ घटनास्थल पर पहुंची।

रेस्क्यू ऑपरेशन सुबह शुरू हुआ और लगभग सात घंटे तक चला। वन विभाग की टीम ने सावधानीपूर्वक गड्ढे के किनारों को समतल किया और JCB की मदद से एक रास्ता बनाया ताकि नन्हा हाथी खुद चलकर बाहर आ सके। इस दौरान भीड़ को नियंत्रित करना और शावक को तनाव से बचाना भी एक चुनौती थी। अंततः, कड़ी मेहनत और सामूहिक प्रयासों के बाद, शावक को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। वन विभाग के अनुसार, शावक की स्थिति स्थिर थी, और उसे जल्द ही उसके झुंड के साथ मिला दिया गया।

लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई। जैसे ही नन्हा हाथी गड्ढे से बाहर निकला, उसने एक ऐसा कदम उठाया जिसने सभी का दिल जीत लिया। वह JCB मशीन के पास गया और अपनी छोटी सूंड से मशीन को धीरे-धीरे छुआ, मानो वह चालक और पूरी रेस्क्यू टीम को अपने अनोखे अंदाज में धन्यवाद दे रहा हो। इस पल को कैमरे में कैद कर लिया गया, और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। @TheLallantop ने अपने एक्स पोस्ट में लिखा, "जब हाथी गहरे कुएं से बाहर निकल पाया तो JCB ड्राइवर को 'धन्यवाद' कहा, सूंड़ उठाकर।"

  • सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया

इस वीडियो ने सोशल मीडिया पर तहलका मचा दिया। लाखों लोगों ने इसे शेयर करते हुए नन्हे हाथी की मासूमियत और आभार व्यक्त करने के तरीके की तारीफ की। @JyotiDevSpeaks ने लिखा, "छत्तीसगढ़ में हाथी का बच्चा कुएं में गिरा और घंटों चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद जब निकला तो जेसीबी को छूकर शुक्रिया जैसा कुछ कहा... इंसानों से ज्यादा इंसानियत तो जानवरों में है!" एक अन्य यूजर, @Sudhasahu12, ने टिप्पणी की, "आज इंटरनेट पर सबसे प्यारा पल।" @KedarKashyapBJP ने इसे "इंसान और प्रकृति के बीच भरोसे, करुणा" की मिसाल बताया। यह वीडियो न केवल भारत में, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया, जिसने जानवरों की संवेदनशीलता और बुद्धिमत्ता को रेखांकित किया।

  • हाथियों की संवेदनशीलता और बुद्धिमत्ता

हाथी पृथ्वी पर सबसे बुद्धिमान और संवेदनशील प्राणियों में से एक हैं। वैज्ञानिक अध्ययनों के अनुसार, हाथी जटिल भावनाएं प्रदर्शित करते हैं, जैसे शोक, खुशी, और आभार। वे अपने झुंड के मृत सदस्यों के प्रति सम्मान व्यक्त करने के लिए जाने जाते हैं और अपने रक्षकों के प्रति कृतज्ञता दिखाने में सक्षम हैं। इस घटना में नन्हे हाथी का JCB को सूंड से छूना इस बात का प्रमाण है कि वे मानव की मदद को पहचानते हैं और अपने तरीके से आभार व्यक्त कर सकते हैं।

हाथियों की सूंड एक अत्यंत संवेदनशील और बहुमुखी अंग है। यह न केवल भोजन और पानी लेने के लिए उपयोगी है, बल्कि संचार और भावनात्मक अभिव्यक्ति का भी साधन है। इस मामले में, शावक ने अपनी सूंड का उपयोग करके JCB को छूकर एक भावनात्मक संदेश दिया, जो मानव और वन्यजीवों के बीच एक अनोखे रिश्ते को दर्शाता है।

हाथी के शावक को कीचड़ भरे गड्ढे से निकालना आसान नहीं था। वन विभाग की टीम को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। सबसे पहले, गड्ढे की गहराई और कीचड़ ने शावक को बाहर निकालना मुश्किल बना दिया था। दूसरा, रेस्क्यू के दौरान शावक को तनाव से बचाना जरूरी था, क्योंकि तनावग्रस्त हाथी हिंसक हो सकता है। तीसरा, आसपास की भीड़ को नियंत्रित करना और झुंड के अन्य हाथियों को शावक से दूर रखना भी एक चुनौती थी, क्योंकि वे अपने बच्चे की रक्षा के लिए आक्रामक हो सकते थे।

वन विभाग ने JCB मशीन और फावड़ियों का उपयोग करके गड्ढे के किनारों को समतल किया और एक ढलान बनाया, जिससे शावक खुद चलकर बाहर आ सका। इस ऑपरेशन में ग्रामीणों की भूमिका भी महत्वपूर्ण थी, जिन्होंने न केवल वन विभाग को तुरंत सूचित किया, बल्कि रेस्क्यू के दौरान भीड़ को नियंत्रित करने में मदद की। यह सामूहिक प्रयास मानव और प्रकृति के बीच सहयोग का एक शानदार उदाहरण है।

यह घटना न केवल एक रेस्क्यू ऑपरेशन की सफलता की कहानी है, बल्कि यह मानव और वन्यजीवों के बीच सह-अस्तित्व के महत्व को भी रेखांकित करती है। छत्तीसगढ़ जैसे क्षेत्र, जहां जंगल और मानव बस्तियां एक-दूसरे के करीब हैं, वहां मानव-वन्यजीव संघर्ष एक गंभीर समस्या है। हाथियों के झुंड अक्सर गांवों में प्रवेश कर जाते हैं, जिससे फसलों को नुकसान और कभी-कभी मानव जीवन को खतरा होता है। लेकिन इस घटना ने दिखाया कि ग्रामीण और वन विभाग मिलकर न केवल वन्यजीवों की रक्षा कर सकते हैं, बल्कि उनके साथ एक सकारात्मक रिश्ता भी बना सकते हैं।

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यह घटना पर्यावरण संरक्षण और वन्यजीवों के प्रति जागरूकता बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण है। वन विभाग ने इस रेस्क्यू के बाद स्थानीय लोगों को जंगलों में गड्ढों और कुओं को ढकने की सलाह दी है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं रोकी जा सकें। साथ ही, यह वीडियो लोगों को यह सोचने के लिए प्रेरित करता है कि हमें अपने पर्यावरण और वन्यजीवों के प्रति अधिक संवेदनशील और जिम्मेदार होना चाहिए।

यह कोई पहली बार नहीं है जब रायगढ़ में इस तरह की घटना हुई हो। कुछ दिन पहले, चारमार जंगल में भी एक हाथी का शावक कुएं में गिर गया था। उस समय भी ग्रामीणों और वन विभाग ने मिलकर उसे सुरक्षित निकाला था, और शावक ने उसी तरह JCB को सूंड से छूकर आभार व्यक्त किया था। ये घटनाएं दर्शाती हैं कि रायगढ़ के ग्रामीण और वन विभाग वन्यजीवों की रक्षा के लिए तत्पर हैं। हालांकि, बार-बार होने वाली ऐसी घटनाएं जंगलों में खुले गड्ढों और कुओं की समस्या को भी उजागर करती हैं, जिन्हें तत्काल संबोधित करने की जरूरत है।

रायगढ़ के घरघोड़ा वन क्षेत्र में नन्हे हाथी के रेस्क्यू और उसके JCB को धन्यवाद कहने की घटना ने न केवल लोगों के दिलों को छुआ, बल्कि यह भी दिखाया कि जानवरों में भी संवेदनशीलता और कृतज्ञता की भावना होती है। यह घटना मानव और प्रकृति के बीच सहयोग और करुणा की एक खूबसूरत मिसाल है।

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