Sambhal: नवरात्रि की पूर्णाहुति पर कन्या पूजन: आस्था, परंपरा और श्रद्धा का अद्भुत संगम। 

सम्भल जनपद में नवरात्रि के पावन अवसर पर श्रद्धा और भक्ति का माहौल चरम पर दिखाई दे रहा है। नौ दिनों तक व्रत और देवी उपासना के बाद

Mar 27, 2026 - 10:46
Mar 27, 2026 - 10:48
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Sambhal: नवरात्रि की पूर्णाहुति पर कन्या पूजन: आस्था, परंपरा और श्रद्धा का अद्भुत संगम। 
नवरात्रि की पूर्णाहुति पर कन्या पूजन: आस्था, परंपरा और श्रद्धा का अद्भुत संगम। 

उवैस दानिश, सम्भल 

सम्भल जनपद में नवरात्रि के पावन अवसर पर श्रद्धा और भक्ति का माहौल चरम पर दिखाई दे रहा है। नौ दिनों तक व्रत और देवी उपासना के बाद रामनवमी के दिन कन्या पूजन के साथ इन पर्वों का समापन किया जाता है। स्थानीय निवासी सीमा आर्य बताती हैं कि नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है और कन्याओं को उसी देवी स्वरूप मानकर घर बुलाया जाता है।

कन्या पूजन के दौरान नौ कन्याओं को विधि-विधान से भोजन कराया जाता है और उनके साथ एक लांगुर (भैरव स्वरूप) को भी बैठाकर प्रसाद दिया जाता है। मान्यता है कि इस पूजन से देवी प्रसन्न होती हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं। यह परंपरा न केवल धार्मिक आस्था को दर्शाती है, बल्कि समाज में बेटियों के सम्मान का संदेश भी देती है। नवरात्रि वर्ष में चार बार आती है, जिनमें दो गुप्त नवरात्रि और दो प्रमुख नवरात्रि मानी जाती हैं। हालांकि आम जनमानस में मुख्य रूप से चैत्र और शारदीय नवरात्रि का विशेष महत्व है। इन दिनों लोग व्रत रखते हैं, घरों और मंदिरों में ज्योत जलाते हैं, भजन-कीर्तन करते हैं और देवी की आराधना में लीन रहते हैं। सम्भल के मंदिरों में भी भव्य सजावट की गई है, जहां रोजाना आरती और महाआरती का आयोजन हो रहा है। कुल मिलाकर नवरात्रि का यह पर्व आस्था, संस्कृति और परंपराओं का अनूठा संगम बनकर लोगों के जीवन में आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार कर रहा है।

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