शेयर बाजार में हाहाकार: सेंसेक्स 600 से अधिक अंक टूटा, निफ्टी ने 23,200 का अहम स्तर खोया।
भारतीय इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्स, सेंसेक्स और निफ्टी में आज सुबह के सत्र में भारी गिरावट दर्ज की गई। बाजार खुलते ही बिकवाली का ऐसा दौर शुरू
- लाल निशान में डूबा दलाल स्ट्रीट: बैंकिंग और आईटी शेयरों में भारी बिकवाली से निवेशक पस्त, ये दिग्गज स्टॉक्स भी लुढ़के
- वैश्विक दबाव और घरेलू चिंताओं के बीच भारतीय बाजार धराशायी, बिकवाली के दबाव में बिखरा निवेशकों का भरोसा
भारतीय इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्स, सेंसेक्स और निफ्टी में आज सुबह के सत्र में भारी गिरावट दर्ज की गई। बाजार खुलते ही बिकवाली का ऐसा दौर शुरू हुआ कि सेंसेक्स देखते ही देखते 647 अंक नीचे फिसल गया। इस गिरावट के साथ ही निफ्टी 50 इंडेक्स ने भी अपनी मनोवैज्ञानिक बढ़त खो दी और 23,200 के स्तर से नीचे जा गिरा। बाजार के जानकारों का मानना है कि यह गिरावट अचानक नहीं आई है, बल्कि इसके पीछे कई अंतरराष्ट्रीय और स्थानीय कारक काम कर रहे हैं। निवेशकों ने आज शुरुआती मिनटों में ही रक्षात्मक रुख अपना लिया, जिससे बाजार के प्रमुख सूचकांकों पर दबाव साफ दिखाई दिया। बड़े कैपिटलाइजेशन वाले शेयरों में हुई इस बिकवाली ने छोटे और मझोले शेयरों को भी अपनी चपेट में ले लिया है।
बाजार में इस गिरावट की मुख्य वजह वैश्विक बाजारों से मिल रहे कमजोर संकेत बताए जा रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता और भू-राजनीतिक तनाव ने निवेशकों के मनोबल को प्रभावित किया है। जब विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPI) भारतीय बाजार से अपना पैसा निकालने लगते हैं, तो इसका सीधा असर घरेलू सूचकांकों पर पड़ता है। आज के सत्र में भी कुछ ऐसा ही देखने को मिला, जहाँ बड़े संस्थानों ने ऊंचे स्तरों पर मुनाफावसूली करना बेहतर समझा। निफ्टी के 23,200 से नीचे जाने का मतलब है कि तकनीकी तौर पर बाजार अब एक संवेदनशील जोन में प्रवेश कर चुका है, जहाँ से रिकवरी के लिए कड़े संघर्ष की आवश्यकता होगी।
सेक्टरवार प्रदर्शन पर नजर डालें तो बैंकिंग, वित्तीय सेवा और आईटी सेक्टर में सबसे ज्यादा मार पड़ी है। दिग्गज बैंक शेयरों में गिरावट के कारण बैंक निफ्टी काफी दबाव में नजर आया। इसके अलावा, आईटी क्षेत्र की बड़ी कंपनियों के शेयरों में भी 2 से 3 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई है। ऑटोमोबाइल और रियल्टी सेक्टर भी इस बिकवाली से अछूते नहीं रहे। बाजार में केवल मुट्ठी भर शेयर ही ऐसे थे जो हरे निशान में टिके रह सके, अन्यथा अधिकांश स्टॉक्स धड़ाम होकर अपने पिछले बंद स्तर से काफी नीचे कारोबार कर रहे थे। इस चौतरफा गिरावट ने उन निवेशकों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है जो बाजार में एक नई तेजी की उम्मीद लगाए बैठे थे। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, निफ्टी के लिए 23,100 से 23,150 का स्तर अब एक महत्वपूर्ण सपोर्ट के रूप में देखा जा रहा है। यदि बाजार इस स्तर को भी तोड़ देता है, तो गिरावट और गहरी हो सकती है। निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि वे जल्दबाजी में कोई भी बड़ा निवेश न करें और बाजार के स्थिर होने का इंतजार करें। इस समय 'वेट एंड वॉच' की रणनीति अपनाना ही समझदारी भरा कदम हो सकता है।
बड़ी कंपनियों के शेयरों, जिन्हें 'मार्केट मूवर्स' कहा जाता है, उनमें हुई भारी गिरावट ने बाजार की धारणा को पूरी तरह से नकारात्मक बना दिया है। रिलायंस इंडस्ट्रीज, एचडीएफसी बैंक और आईसीआईसीआई बैंक जैसे हैवीवेट शेयरों में कमजोरी ने सेंसेक्स के अंकों को तेजी से कम किया। इसके साथ ही, विदेशी संस्थागत निवेशकों की निरंतर बिकवाली ने बाजार के घावों पर नमक छिड़कने का काम किया है। जब बड़ी कंपनियां इस तरह से टूटती हैं, तो खुदरा निवेशकों के बीच डर का माहौल बन जाता है और वे पैनिक सेलिंग (घबराहट में बिक्री) करने लगते हैं। आज के सत्र में भी यही पैनिक सेलिंग बाजार को निचले स्तरों की ओर धकेलती दिखी।
भारतीय मुद्रा की स्थिति और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव ने भी बाजार की इस गिरावट में अपनी भूमिका निभाई है। यदि वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल के दाम बढ़ते हैं, तो भारत जैसे आयात प्रधान देश के लिए व्यापार घाटा बढ़ने का खतरा पैदा हो जाता है। इसका सीधा असर कॉर्पोरेट जगत के मुनाफे पर पड़ता है, जिससे निवेशक शेयर बाजार से दूरी बनाने लगते हैं। इसके अलावा, महंगाई दर के आंकड़ों को लेकर व्याप्त चिंताओं ने भी बाजार को संभलने का मौका नहीं दिया। निवेशकों को डर है कि यदि महंगाई काबू में नहीं आई, तो केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में कटौती की प्रक्रिया को और लंबा खींच सकता है, जो कि विकास दर के लिए शुभ संकेत नहीं है।
मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में भी आज बड़ी गिरावट देखी गई है। अक्सर देखा जाता है कि जब मुख्य सूचकांक गिरते हैं, तो छोटे शेयर और भी तेजी से नीचे आते हैं। आज भी छोटे निवेशकों के पोर्टफोलियो में भारी सेंध लगी है। कई स्टॉक्स अपने 52-सप्ताह के उच्चतम स्तर से 10-15 प्रतिशत तक नीचे आ चुके हैं। बाजार में मंदी का माहौल इतना गहरा है कि हर छोटी बढ़त पर बिकवाली हावी हो जा रही है। ट्रेडर्स को आज के दिन काफी नुकसान उठाना पड़ा है, विशेषकर उन लोगों को जो लॉन्ग पोजीशन लेकर बैठे थे। वॉल्यूम के लिहाज से भी आज बाजार में काफी सक्रियता देखी गई, लेकिन यह सक्रियता मुख्य रूप से बिकवाली की तरफ ही केंद्रित रही।
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