Lucknow : वासवी तोमर की संदिग्ध मौत पर परिवार की न्याय की मांग, रैगिंग के खिलाफ प्रदर्शन
वासवी के पिता रामकृष्ण तोमर और मां बीनू सिंह ने बताया कि 29 जुलाई की रात 8 बजे वासवी ने फोन पर बताया था कि उनकी रूममेट, एक प्रथम वर्ष की नर्सिंग छात्रा, की
लखनऊ के मड़ियांव निवासी 18 वर्षीय वासवी तोमर, जो उत्तराखंड के भीमताल स्थित ग्राफिक एरा हिल विश्वविद्यालय में बीसीए द्वितीय वर्ष की छात्रा थीं, की 30 जुलाई 2025 को संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। परिवार का दावा है कि यह आत्महत्या नहीं, बल्कि रैगिंग से जुड़ा मामला है। इस घटना के खिलाफ लखनऊ में 3 अगस्त 2025 को शाम 5 बजे आईटी चौराहे से परिवर्तन चौक तक पैदल मार्च और मोमबत्ती जलाकर प्रदर्शन किया गया।
वासवी के पिता रामकृष्ण तोमर और मां बीनू सिंह ने बताया कि 29 जुलाई की रात 8 बजे वासवी ने फोन पर बताया था कि उनकी रूममेट, एक प्रथम वर्ष की नर्सिंग छात्रा, की सीनियर छात्राओं द्वारा रैगिंग की जा रही थी। वासवी ने इसका विरोध किया और एक वीडियो बनाकर परिवार को भेजा, जिसमें सीनियर छात्राओं के साथ उनकी बहस दिख रही थी। उन्होंने वार्डन से भी शिकायत की थी। अगले दिन, 30 जुलाई को दोपहर 2:30 बजे कक्षा से लौटने के बाद वासवी अपने हॉस्टल के कमरे में शाम 5:30 बजे पंखे से लटकी मिलीं। विश्वविद्यालय प्रशासन ने परिवार को उनकी तबीयत बिगड़ने की सूचना दी, लेकिन रात 2 बजे नैनीताल पहुंचने पर परिवार को उनकी मृत्यु की जानकारी मिली।
परिवार ने गंभीर आरोप लगाए हैं। उनके अनुसार, वासवी के गले पर सी-आकार का निशान था, जो आत्महत्या के बजाय हत्या की ओर इशारा करता है। हॉस्टल की गैलरी का सीसीटीवी कैमरा हटा लिया गया, कमरा सील नहीं किया गया, और रूममेट सहित रैगिंग करने वाली छात्रा को गायब कर दिया गया। परिवार को सूचना देने में देरी की गई, और पुलिस ने भी स्पष्ट जवाब नहीं दिए। पोस्टमॉर्टम 1 अगस्त को हुआ, जिसके बाद शव लखनऊ लाया गया और अंतिम संस्कार किया गया। परिवार ने कहा कि वासवी मानसिक रूप से मजबूत थीं और रक्षाबंधन के लिए घर आने की योजना बना रही थीं।
लखनऊ में आयोजित पैदल मार्च और मोमबत्ती प्रदर्शन में सामाजिक कार्यकर्ता अजरा मोबिन, संदीप पांडे, और कई स्थानीय लोग शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने रैगिंग पर पूर्ण रोक और वासवी की मौत की निष्पक्ष जांच की मांग की। परिवार ने मुख्यमंत्री और शिक्षा विभाग से दोषियों को सजा दिलाने की गुहार लगाई है। पुलिस ने अभी तक प्राथमिकी दर्ज नहीं की है, लेकिन जांच शुरू कर दी है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने रैगिंग के आरोपों से इनकार किया है, लेकिन परिवार और प्रदर्शनकारी इस मामले में पारदर्शी जांच की मांग कर रहे हैं।
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