Lucknow News: स्ट्रीट चिल्ड्रेन के चिन्हांकन एवं पुनर्वासन पर विचार मंथन, लगभग 256 बच्चों के पुनर्वास हेतु प्रयास जारी
मॉडल पॉलिसी में पुलिस विभाग से संबंचित भूमिकाओं का बिन्दुवार अध्ययन कर लिया गया है। साथ ही भिक्षावृत्ति रोकथाम हेतु एस.ओ.पी. भी बना लिया गया है, जिसमें लगभग मॉडल पॉलिसी के बिन्दु...
By INA News Lucknow.
लखनऊ: उच्चतम न्यायालय द्वारा पारित आदेश के अनुपालन में स्ट्रीट चिल्ड्रेन सड़क जैसी परिस्थितियों में रहने वाले बच्चों के चिन्हांकन एवं पुनर्वासन के सम्बन्ध में आदर्श नीति बनाये जाने के संबंध में सम्यक विचार विमर्श किए जाने हेतु गत माह बापू भवन में प्रमुख सचिव, महिला कल्याण तथा बाल विकास एवं पुष्टाहार, उ.प्र. शासन लीना जौहरी की अध्यक्षता में आयोजित उच्च स्तरीय बैठक के दौरान सभी विभागों से अपेक्षा की गयी कि संबंधित विभाग अपने अधीन कार्यों की समीक्षा कर यह देखें कि उनके अंतर्गत कौन-कौन सी योजनायें सड़कों पर जीवन यापन करने वाले बच्चों और देखरेख एवं संरक्षण योग्य बच्चों हेतु लाभप्रद हो सकते हैं। संबंधित प्रासंगिक पहलुओं और प्रभावी सुझायों को इस नीति में जोड़ने हेतु अवश्य साझा किया जाए।
प्रमुख सचिव के निर्देश के क्रम में, जिला प्रोबेशन अधिकारी, लखनऊ द्वारा सड़को पर जीवन-यापन करने वाले बच्चों हेतु मंडलायुक्त के मार्गदर्शन में शुरू की गयी पहल का संदर्भ साझा करते हुये बताया कि लगभग 256 बच्चे चिन्हित किये गये हैं और उनके पुनर्वास हेतु प्रयास किये जा रहे है। लखनऊ में चिन्हित हॉट स्पाट यथा-नगराम, फैजुलागंज, कपूरथला आदि पर चिन्हित किये गये बच्चों को विभिन्न विभागों की विभिन्न योजनाओं से जोड़कर लाभान्वित किया जाने का प्रयास किया जा रहा है।
गृह विभाग द्वारा अवगत कराया गया कि मॉडल पॉलिसी में पुलिस विभाग से संबंचित भूमिकाओं का बिन्दुवार अध्ययन कर लिया गया है। साथ ही भिक्षावृत्ति रोकथाम हेतु एस.ओ.पी. भी बना लिया गया है, जिसमें लगभग मॉडल पॉलिसी के बिन्दु समाहित हो जाते है। प्रमुख सचिव द्वारा एस.ओ.पी. महिला कल्याण विभाग से साझा किये जाने के निर्देश दिये गये है।
नगर विकास तथा नगरीय रोजगार एवं गरीबी उन्मूलन कार्यक्रम विभाग द्वारा अवगत कराया गया कि सूडा के माध्यम से रैन बसेरों की व्यवस्था में इस नीति में शामिल बच्चों को भी शामिल किया जाए, जिससे सड़कों पर जीवन यापन करने वाले बच्चों और देखरेख एवं संरक्षण की आवश्यकता वाले अन्य बच्चों को प्राथमिकता के आधार पर सरकारी योजनाओं से जोड़ा जा सके। प्रमुख सचिव द्वारा व्यवसायिक शिक्षा एवं कौशल विकास विभाग से यह अपेक्षा की गयी कि ऐसे बच्चे जो कम पढ़े है या पढ़ना-लिखना नहीं जानते है, ऐसे बच्चों को ब्रिज कोर्स आदि कराकर उनके स्किल डेवलेपमेंट का प्रशिक्षण प्रदान किये जाने के संबंध में कार्यवाही की जाए।
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सूचना विभाग द्वारा अवगत कराया गया कि बाल संरक्षण से संबंधित विभिन्न योजनाओं, कानूनों एवं सुविधाओं का प्रचार-प्रसार किया जाता है। प्रिंट, इलेक्ट्रानिक्स, सोशल मीडिया के माध्यम से विभाग द्वारा जिला बाल सरंक्षण इकाई, चाईल्ड लाईन, बाल कल्याण एवं संरक्षण समितियों के बारे में जागरूक किया जाता है। सूचना विभाग से सरकार की विभिन्न योजनाओं का प्रचार-प्रसार कर अधिक से अधिक ऐसे बच्चों को लाभान्वित किये जाने की अपेक्षा की गयी।
बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग द्वारा अवगत कराया गया कि .6 माह से .6 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों के विकास एवं गर्भवती महिलाओं व स्तनपान कराने वाली माताओं के स्वास्थ्य एवं पोषण संबंधी आवश्यकताओं की समग्र रूप से पूर्ति हेतु एकीकृत बाल विकास सेवायें (आईसीडीएस) प्रदेश में संचालित हैं। आंगनवाड़ी केन्द्रों के माध्यम से स्वास्थ्य पोषण एवं शालापूर्व शिक्षा सहित .6 प्रकार की सेवायें लाभार्थियों को प्रदान की जाती हैं, जिनमें अनुपूरक पुष्टाहार, शालापूर्व शिक्षा, टीकाकरण, पोषण एवं स्वास्थ्य शिक्षा, वृद्धि निगरानी व स्वास्थ्य जाँच व संदर्भ सेवाये शामिल हैं। आईसीडीएस की सेवायें सार्वभौमिक (यूनिवर्सल) हैं। विभाग द्वारा समय-समय पर आगनबाड़ी केन्द्रों पर लाभार्थियों के पंजीकरण व विभाग की योजनाओं से लाभान्वित किये जाने के संबंध में दिशा-निर्देश निर्गत किये गये हैं।
बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग द्वारा सड़क पर रहने वाले बच्चों के समग्र विकास और उनके उज्जवल भविष्य को सुनिश्चित करने के लिए उन्हें निकटतम आंगनवाड़ी केंद्र पर पंजीकृत किया जाएगा। इस पंजीकरण के बाद बच्चों को एकीकृत बाल विकास सेवा की सभी 6 आवश्यक सेवाएँ प्रदान की जाएंगी। इन सेवाओं के माध्यम से बच्चों के शारीरिक, मानसिक और संज्ञानात्मक विकास कोबढ़ावा दिया जाएगा, जिससे वे स्वस्थ और सशक्त जीवन की ओर बढ़ सकें।
इसके अतिरिक्त बच्चों की प्रारंभिक सीखने की क्षमताओं को विकसित किया जाने के उद्देश्य से किट अर्ली चाइल्डहुड केयर एंड एजुकेशन किट (ईसीसीइ) का उपयोग किया जाएगा, जिससे बच्चों को खेल-खेल में सीखने का अवसर मिलेगा और उनकी रुचि शिक्षा के प्रति बढ़ेगी। यह पहल न केवल उनके बौद्धिक विकास में सहायक होगी, बल्कि उनके भविष्य के शैक्षिक आधार को भी मजबूत बनाएगी।
पंचायती राज विभाग द्वारा ग्राम स्तर पर ग्राम पंचायतों की बैठक में बाल अधिकारों से संबंधित कानूनों के बारे में चर्चा कर आमजन को जागरूक किया जाए। विभाग द्वारा ग्राम पंचायत स्तर पर नारी अदालत में विभिन्न विभागों की योजनाओं की चर्चा की जाए एवं ऐसे बच्चों को विभिन्न योजनाओं से जोड़ने एवं लाभान्वित किये जाने हेतु ग्राम पंचायत स्तर पर भी प्रयास किया जाए।
प्रमुख सचिव द्वारा ग्राम्य विकास विभाग से अपेक्षा की गयी कि एन.आर.एल.एम. जैसी महत्वपूर्ण योजना के माध्यम से महिला एवं बच्चों के अधिकारों के बारे में जागरूक किया जाए जो ऐसी परिस्थितियों में देखे जाने वाले बच्चों के संबंध में ग्राम प्रधान निकट के पुलिस थाने में सूचना दे सकें। प्रमुख सचिव द्वारा अपेक्षा की गयी कि चर्चा में दिये गये सुझावों पर अपने विभाग से संबंधित बिन्दुओं पर उच्च स्तर पर विचार-विमर्श कर आवश्यक सुझाव तथा अन्य सूचनायें महिला कल्याण विभाग को उपलब्ध करा दिया जाए।
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