Lucknow : राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ब्रह्माकुमारीज के ध्यान योग कार्यक्रम का किया उद्घाटन

राष्ट्रपति ने बताया कि भारत की प्राचीन सभ्यता ने विश्व को 'वसुधैव कुटुम्बकम्' का संदेश दिया है। आज विश्व चुनौतियों से जूझ रहा है, तब यह विचार और प्रासंगिक है। केंद्र सर

Nov 28, 2025 - 22:41
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Lucknow : राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ब्रह्माकुमारीज के ध्यान योग कार्यक्रम का किया उद्घाटन
Lucknow : राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ब्रह्माकुमारीज के ध्यान योग कार्यक्रम का किया उद्घाटन

लखनऊ में ब्रह्माकुमारीज संस्थान द्वारा आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम 'विश्व एकता और विश्वास के लिए ध्यान (योग)' का उद्घाटन राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया। राष्ट्रपति ने ब्रह्माकुमारी बहनों को अमृत कलश और भाइयों को ध्वज सौंपकर अभियान की शुरुआत की। यह कार्यक्रम गुलजार उपवन राजयोग केंद्र में हुआ।राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि ब्रह्माकुमारीज संस्था विश्व शांति, मानवीय मूल्य, नारी शक्ति, आत्मिक जागृति, शिक्षा और ध्यान के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयास प्रेरक हैं। उन्होंने कहा कि शांति को भीतर जगाएं, विश्वास को विचारों में उतारें और एकता को कर्मों में दिखाएं। तभी एक बेहतर शांतिपूर्ण विश्व बनेगा।राष्ट्रपति ने बताया कि भारत की प्राचीन सभ्यता ने विश्व को 'वसुधैव कुटुम्बकम्' का संदेश दिया है। आज विश्व चुनौतियों से जूझ रहा है, तब यह विचार और प्रासंगिक है। केंद्र सरकार समाज को समावेशी, शांतिपूर्ण, स्वस्थ और मूल्य आधारित बनाने के लिए कई कदम उठा रही है। योग को वैश्विक स्तर पर बढ़ावा और अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का नेतृत्व ऐसे ही प्रयास हैं।राष्ट्रपति ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति में मूल्य आधारित शिक्षा और मानवाधिकार के समावेश का जिक्र किया। केंद्र सरकार ने पर्यावरण जागरूक जीवनशैली के लिए 'मिशन लाइफ' शुरू किया है। महिला सम्मान, आत्मनिर्भरता और सामाजिक समावेशन के लिए राष्ट्रीय कार्यक्रम चल रहे हैं। 2023 के जी-20 समिट की थीम 'वन अर्थ, वन फैमिली, वन फ्यूचर' इसी दिशा में थी।राष्ट्रपति ने कहा कि आधुनिक समय में विज्ञान और तकनीक से मानवता ने प्रगति की है। सूचना प्रौद्योगिकी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल बदलाव और अंतरिक्ष अनुसंधान ने जीवन को सुविधाजनक बनाया है। लेकिन समाज में तनाव, मानसिक असुरक्षा, अविश्वास और एकाकीपन भी बढ़ा है। इसलिए आगे बढ़ने के साथ भीतर झांकने की यात्रा शुरू करें। ब्रह्माकुमारीज संस्था ऐसी पहल के लिए सराहनीय है। विश्वास वहीं टिकता है जहां मन शांत, विचार स्वस्थ और भावनाएं शुद्ध हों। आत्मिक चेतना जागृत होने पर प्रेम, भाईचारा, करुणा और एकता जीवन का हिस्सा बन जाती है। सशक्त आत्मा ही विश्व एकता की नींव है।राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कहा कि राष्ट्रहित, मानवता और संवैधानिक मूल्यों के प्रति राष्ट्रपति का समर्पण सभी के लिए प्रेरणा है। उनकी उपस्थिति ने इस अवसर को ऐतिहासिक बना दिया। 1937 में स्थापित ब्रह्माकुमारीज संस्थान ने अज्ञान, दुख और नैतिक पतन के समय आध्यात्मिक उन्नति और श्रेष्ठ मूल्यों का बीड़ा उठाया। संस्था भारतीय संस्कृति, दर्शन, योग, चरित्र निर्माण, वैज्ञानिक चेतना, नशा मुक्ति, पर्यावरण संरक्षण, साक्षरता और नैतिक आध्यात्मिक मूल्यों के संवर्धन में अग्रणी है। यह मातृशक्ति के नेतृत्व में चलने वाली विश्व की सबसे बड़ी आध्यात्मिक संस्था है, जो सामाजिक परिवर्तन की मिसाल है। आज विश्व अशांति और अविश्वास से घिरा है, तब प्रेम, एकता और विश्वास की जरूरत है। प्रत्येक व्यक्ति 'विश्व-परिवार' की भावना विकसित करे तो स्व-परिवर्तन से विश्व-परिवर्तन संभव है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि विश्व एकता और विश्वास के लिए ध्यान (योग) जैसे अभियान का शुभारंभ गौरव का क्षण है। राष्ट्रपति का जीवन शिक्षक के रूप में प्रेरणादायी है। पार्षद से राष्ट्रपति भवन तक की यात्रा संघर्ष की कहानी है। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने भी शिक्षक के रूप में सेवा की।मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत की ऋषि परंपरा में 'मन ही मनुष्य का बंधन और मोक्ष का कारण' है। संत रविदास जी ने कहा 'मन चंगा तो कठौती में गंगा'। मन की बहिर्मुखी वृत्ति को अंतर्मुखी करें तो आत्मिक संतुष्टि और विश्व कल्याण का मार्ग खुलेगा। आतंकवाद, उपद्रव और अराजकता के पीछे मन की चंचलता है। भारत आतंकवाद को राक्षसी प्रवृत्ति मानता है और भौतिक व आध्यात्मिक रूप से लड़ रहा है। 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने योग को संयुक्त राष्ट्र से मान्यता दिलाकर 21 जून को विश्व योग दिवस बनाया। ब्रह्माकुमारीज विश्वविद्यालय राजयोग से सकारात्मक भाव फैला रहा है। लखनऊ प्रशिक्षण केंद्र लगभग तैयार है। यह उत्तर प्रदेश का उत्तम केंद्र बनेगा, जो एकदिवसीय, त्रिदिवसीय और साप्ताहिक प्रशिक्षण से समाज को जोड़ेगा।

इस मौके पर ब्रह्माकुमारीज संस्थान माउंट आबू की चेयरपर्सन व अतिरिक्त महासचिव राजयोगी डॉ. बी.के. मृत्युंजय, लखनऊ उपक्षेत्र निदेशक राजयोगिनी बी.के. राधा और राष्ट्रीय समन्वयक राजयोगी डॉ. बी.के. नाथमल सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे। यह कार्यक्रम 2025-26 का वार्षिक थीम है, जो राज्य स्तर पर चलेगा। राष्ट्रपति ने कार्यक्रम स्थल पर ध्यान भी किया।

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