Lucknow : सिद्धार्थनगर स्थित बौद्धस्थली कपिलवस्तु के पर्यटन विकास हेतु 06 करोड़ रुपये की परियोजनाएं स्वीकृत- जयवीर सिंह

उप्र0 के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि कपिलवस्तु भगवान बुद्ध का बाल्यकालीन निवास स्थल रहा है, जिससे यह स्थान बौद्ध धर्मावलंबियों के

Jul 20, 2025 - 20:24
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Lucknow : सिद्धार्थनगर स्थित बौद्धस्थली कपिलवस्तु के पर्यटन विकास हेतु 06 करोड़ रुपये की परियोजनाएं स्वीकृत- जयवीर सिंह
उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह

लखनऊ : उत्तर प्रदेश में बौद्ध पर्यटन निरंतर नई ऊंचाइयों को छू रहा है। वर्ष 2024 में राज्य में कुल 61,47,826 बौद्ध पर्यटक पहुंचे, जिनमें से 79,418 ने कपिलवस्तु का भ्रमण किया। पर्यटकों की बढ़ती संख्या को देखते हुए राज्य सरकार सिद्धार्थनगर स्थित कपिलवस्तु में पर्यटन सुविधाओं के विकास के लिए छह करोड़ रुपए की परियोजनाएं स्वीकृत की है। जिसके अंतर्गत आधारभूत सुविधाओं का विकास किया जाएगा। 

यह जानकारी उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने दी। उन्होंने बताया कि वर्ष 2024 में कपिलवस्तु में कुल 79,418 बौद्ध पर्यटक पहुंचे थे। इनमें 62,790 घरेलू जबकि 16,628 विदेशी पर्यटक थे। वर्ष 2022 में कपिलवस्तु आने वाले पर्यटकों की कुल संख्या 26,805 थी, जिनमें 26,707 घरेलू और महज 98 विदेशी पर्यटक थे। मगर, उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग द्वारा किए गए प्रयासों का प्रतिफल रहा कि दो साल के भीतर कपिलवस्तु आने वाले विदेशी पर्यटकों की संख्या में अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज की गई। इसी क्रम में विभाग कपिलवस्तु में 06 करोड़ रुपए की लागत से पर्यटन सुविधाओं का विकास करने जा रही है। 

उप्र0 के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि कपिलवस्तु भगवान बुद्ध का बाल्यकालीन निवास स्थल रहा है, जिससे यह स्थान बौद्ध धर्मावलंबियों के लिए अत्यंत पावन माना जाता है। आंकड़े दर्शाते हैं कि कपिलवस्तु बौद्ध धर्मावलंबियों के लिए महत्वपूर्ण केंद्र है। सरकार द्वारा विकसित किए जा रहे बौद्ध सर्किट, पर्यटक सुविधाएं और प्रचार-प्रसार ने इस सफलता में अहम भूमिका निभाई है। राज्य सरकार का विजन है कि विकास योजनाओं के माध्यम से कपिलवस्तु को वैश्विक धार्मिक पर्यटन मानचित्र पर मजबूती से स्थापित किया जाए।

श्री सिंह ने बताया कि कपिलवस्तु, बुद्ध के जीवन से जुड़े महत्वपूर्ण स्थलों में से एक है, जहां उन्होंने अपने जीवन के 29 वर्ष बिताए थे। यह स्थान प्राचीन शाक्य गणराज्य की राजधानी थी और राजकुमार सिद्धार्थ (जो बाद में गौतम बुद्ध बने) का घर था। वर्तमान में यह बौद्ध धर्म मानने वालों के लिए तीर्थ स्थल है। यहां भगवान बुद्ध के अवशेषों वाले स्तूप सहित अन्य पुरातात्विक स्थल हैं, जो दुनियाभर के बौद्ध अनुयायियों को आकर्षित करता है। कपिलवस्तु नगर मुख्यालय से 20 किलोमीटर दूर स्थित है। पर्यटकों के लिए यहां कपिलवस्तु म्यूजियम, शांति स्तूप, थाई मोनेस्ट्री, तिलौराकोट की प्राचीन साइट आदि हैं। 

पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि कपिलवस्तु न केवल बौद्ध धर्म के अनुयायियों के लिए एक पावन स्थल है, बल्कि यह भारत की गौरवशाली सांस्कृतिक धरोहर का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है। भगवान बुद्ध का बाल्यकालीन निवास होने के कारण इस स्थान की ऐतिहासिक और धार्मिक महत्ता विशिष्ट है। राज्य सरकार द्वारा कपिलवस्तु में छह करोड़ रुपए की लागत से पर्यटन सुविधाओं के विकास की स्वीकृत परियोजनाएं इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हैं। इनमें आधारभूत संरचनाओं का विस्तार, पर्यटकों के लिए आवश्यक सुविधाओं का निर्माण और स्थलों के संरक्षण आदि पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

प्रमुख सचिव पर्यटन, संस्कृति एवं धर्मार्थ कार्य मुकेश कुमार मेश्राम ने बताया कि उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग फैम ट्रिप, विदेशी धरती पर लगने वाले व्यापार मेलों का हिस्सा बन प्रदेश सरकार की पर्यटन नीति को आगे बढ़ा रही है। विभाग थाईलैंड, वियतनाम, मलेशिया, श्रीलंका, भूटान, जापान, लाओ पीडीआर, कंबोडिया, सिंगापुर और इंडोनेशिया जैसे बौद्ध बहुल देशों के टूर ऑपरेटरों, भिक्षुओं और मीडिया प्रतिनिधियों के लिए विशेष फैम ट्रिप (फैमिलियराइजेशन ट्रिप) का आयोजन करती रही है। विदेशी आगंतुकों के लिए विभिन्न भाषाओं में प्रशिक्षित गाइड्स की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है।

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