हरदोई की मिठनी- 1961 में डकैतों ने उठाई थी 15 साल की दुल्हन, 80 की उम्र में लौटी मायके हरदोई

उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले में यह घटना उस समय की है जब क्षेत्र में डकैतों का आतंक था। हरदोई जिला मुख्यालय से लगभग 15 किलोमीटर दूर टोलवा आट थाना क्षेत्र के अंतर्गत बलदेव के घर के बा

Feb 15, 2026 - 10:37
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हरदोई की मिठनी- 1961 में डकैतों ने उठाई थी 15 साल की दुल्हन, 80 की उम्र में लौटी मायके हरदोई
हरदोई की मिठनी- 1961 में डकैतों ने उठाई थी 15 साल की दुल्हन, 80 की उम्र में लौटी मायके हरदोई

  • 65 साल बाद अपहरण की शिकार बेटी मिठनी का भावुक मिलन, हरदोई में पूरा गांव हुआ आंसुओं में
  • डकैती के दौरान अगवा हुई मिठनी 65 वर्ष बाद घर पहुंची, परिवार की खुशी का ठिकाना नहीं

उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले में 65 वर्ष पुरानी एक घटना ने फिर से सुर्खियां बटोरी हैं, जहां एक 15 वर्षीय लड़की का अपहरण डकैतों द्वारा किया गया था और अब वह 80 वर्ष की आयु में अपने परिवार से मिली हैं। यह घटना 1961-62 की है, जब डकैतों ने उसके घर पर हमला किया और उसे जंगलों में ले जाकर अलग-अलग जगहों पर रखा। वर्षों बाद उसकी पहचान और वापसी संभव हुई।

उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले में यह घटना उस समय की है जब क्षेत्र में डकैतों का आतंक था। हरदोई जिला मुख्यालय से लगभग 15 किलोमीटर दूर टोलवा आट थाना क्षेत्र के अंतर्गत बलदेव के घर के बाहर पुरवा में रहते थे। यह इलाका रैदास बिरादरी का था और गांव के बाहर केवल तीन-चार मकान थे, जिसे स्थानीय लोग पुरवा कहते थे। बलदेव के परिवार में उनकी पत्नी, बेटा शिवलाल और बेटी मिठनी शामिल थे। मिठनी की उम्र उस समय मात्र 15 वर्ष थी और उसका गौना (विदाई) अगले महीने होने वाला था, यानी वह हाल ही में विवाहित हुई थी या शादी की प्रक्रिया में थी। वर्ष 1961-62 में एक रात सौ से अधिक डकैतों का गिरोह बलदेव के घर पर हमला करने पहुंचा। डकैतों का मकसद धन-दौलत की लूट नहीं था, क्योंकि बलदेव के पास इतनी संपत्ति नहीं थी कि इतनी बड़ी संख्या में डकैत आएं। वे घर की इज्जत लूटने आए थे। डकैतों ने पहले पूरे पुरवे पर जमकर गोलियां चलाईं, जिससे इलाका दहल गया। इसके बाद उन्होंने बलदेव और उनके बेटे शिवलाल को धारदार हथियारों से हमला करके बुरी तरह घायल कर दिया। दोनों गंभीर रूप से घायल हो गए।

डकैतों ने बलदेव की 15 वर्षीय बेटी मिठनी को बंदूक की नोक पर अगवा कर लिया। अपहरण के बाद डकैत उसे जंगलों में लेकर घूमते रहे। वे विभिन्न स्थानों पर छिपते हुए घूमते थे ताकि किसी को पता न चले। कुछ समय बाद डकैतों ने मिठनी को एक व्यक्ति के हवाले कर दिया। इसके बाद मिठनी अपने परिवार से पूरी तरह अलग हो गई। परिवार ने उसे मृत मान लिया क्योंकि कोई सुराग नहीं मिला और इतने वर्षों तक कोई जानकारी नहीं आई। घटना के बाद के वर्षों में मिठनी की जिंदगी अलग दिशा में चली गई। वह जहां पहुंची, वहां उसने जीवन व्यतीत किया। परिवार की ओर से लगातार खोजबीन की गई लेकिन सफलता नहीं मिली। समय बीतता गया, पीढ़ियां बदल गईं। मिठनी अब 80 वर्ष की हो चुकी थीं।

हाल ही में, 65 वर्ष बाद मिठनी अपने मूल घर पहुंचीं। वह अपनी बेटी के साथ अपनों से मिलने आईं। मिलन के समय पूरा गांव भावुक हो गया। मिठनी ने अपनों को देखकर भावुकता जाहिर की। परिवार के सदस्यों ने उन्हें पहचाना और लंबे इंतजार के बाद मिलन हुआ। गांव में यह खबर फैलते ही लोग इकट्ठा हो गए और इस लंबे बिछड़ने के बाद के मिलन को देखकर कई लोगों की आंखें नम हो गईं। यह घटना उस दौर की याद दिलाती है जब उत्तर प्रदेश के कई इलाकों में डकैतों के गिरोह सक्रिय थे और वे अपहरण, लूट और हिंसा जैसी घटनाओं को अंजाम देते थे। मिठनी की कहानी ऐसी ही एक घटना का उदाहरण है जहां एक अबोध बालिका को डकैतों ने उठा लिया और वह दशकों तक परिवार से दूर रही। अब 80 वर्ष की मिठनी के घर लौटने से परिवार में खुशी की लहर है। लंबे समय बाद मिलन ने सभी को भावुक कर दिया है।

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