Tamilnadu News: विधानसभा में हुआ राष्ट्रगान का अपमान, सत्र छोड़ चले गये राज्यपाल, राजनैतिक पार्टियों में हंगामा जोरों पर।
तमिलनाडु विधानसभा का साल 2025 का पहला सत्र सोमवार से शुरू हुआ। सत्र की शुरुआत राज्यपाल के अभिभाषण से होने की उम्मीद थी, लेकिन....
By INA News Tamilnadu: तमिलनाडु विधानसभा का साल 2025 का पहला सत्र सोमवार से शुरू हुआ। सत्र की शुरुआत राज्यपाल के अभिभाषण से होने की उम्मीद थी, लेकिन राज्यपाल आरएन रवि ने सदन में राष्ट्रगान न बजने का आरोप लगाते हुए अभिभाषण पढ़े बिना ही सदन छोड़ दिया। डीएमके और तमिलगा वेत्री कजगम (टीवीके) समेत कई पार्टियों ने राज्यपाल के परंपरा का पालन न करने की कड़ी निंदा की है। तमिलनाडु की सत्तारूढ़ पार्टी डीएमके ने घोषणा की है कि राज्यपाल की विधानसभा में की गई कार्रवाई की निंदा करने के लिए मंगलवार 7 जनवरी को राज्य के सभी जिला मुख्यालयों में विरोध प्रदर्शन किया जाएगा।
टीवीके पार्टी के नेता विजय ने जोर देकर कहा है कि राज्यपाल कोई भी हो, उन्हें विधानसभा की परंपरा का पालन करना चाहिए। बीते दो साल से विधानसभा सत्र में राज्यपाल के संबोधन के दौरान खासा विवाद देखने को मिला है। पिछली बार राज्यपाल ने संबोधन के दौरान सरकार के बयान की कुछ लाइनें पढ़ने से इनकार कर दिया था। जिस पर खूब विवाद हुआ था। राज्यपाल ने उन्होंने डीएमके सरकार द्वारा संविधान और राष्ट्रगान का 'अनादर' करने का आरोप लगाते हुए विधानसभा से अपना संबोधन दिए बिना ही चले गए। इसके कारण डीएमके ने राज्यव्यापी विरोध प्रदर्शन की घोषणा की है। मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने रवि के कार्यों को 'बचकानी' कहकर आलोचना की और उन पर लोगों, चुनी हुई सरकार और विधानसभा का अपमान करने का आरोप लगाया। वहीं, चेन्नई स्थित राजभवन ने बेबाकी से टिप्पणी की है कि तमिलनाडु विधानसभा में सोमवार की घटना देश के आपातकाल की याद दिलाती है।
इस संबंध में राजभवन के आधिकारिक एक्स अकाउंट पर एक पोस्ट में लिखा है, 'आज तमिलनाडु विधानसभा की कार्यवाही पर पूरी तरह से सेंसरशिप देश को आपातकाल के दिनों की याद दिलाती है। लोगों को, खास तौर पर तमिलनाडु के भाई-बहनों को सदन की वास्तविक कार्यवाही और उनके प्रतिनिधियों के आचरण से वंचित रखा गया और इसके बजाय उन्हें राज्य सरकार के झूठे संस्करण ही दिखाए गए।" पोस्ट में आगे कहा गया, "राष्ट्रगान के संबंध में संविधान में निहित मौलिक कर्तव्य की अवहेलना करके न केवल संविधान का अपमान किया गया, बल्कि प्रेस की स्वतंत्रता के संविधान प्रदत्त मौलिक अधिकार का भी बेशर्मी से गला घोंटा गया। यह लोकतंत्र के लिए शुभ संकेत नहीं है।" मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया है कि राज्यपाल आरएन रवि ने तमिलनाडु के राज्य गीत के बाद राष्ट्रगान वादन की मांग की, लेकिन उनकी मांग नहीं मानी गई।
इस बात से राज्यपाल इस कदर नाराज हो गए कि विधानसभा सत्र को संबोधित किए बिना ही सदन से चले गए। तमिलनाडु राजभवन ने पूरे विवाद पर बयान जारी किया है। सोशल मीडिया पर साझा बयान में राजभवन ने कहा कि 'भारत के संविधान और राष्ट्रगान का एक बार फिर तमिलनाडु विधानसभा में अपमान हुआ है। संविधान में पहला मौलिक कर्तव्य राष्ट्रगान का सम्मान बताया गया है। सभी राज्य विधानसभाओं में सत्र की शुरुआत और समापन पर राष्ट्रगान का गायन होता है। आज सदन में राज्यपाल के आने पर सिर्फ तमिल थाई वजथु का ही गायन हुआ। राज्यपाल ने सदन को सम्मानपूर्वक संवैधानिक कर्तव्य की याद दिलाई और राष्ट्रगान के वादन की मांग की, लेकिन उनकी अपील को मुख्यमंत्री एमके स्टालिन और सदन के स्पीकर ने खारिज कर दिया। यह गंभीर चिंता की बात है। ऐसे में राष्ट्रगान और भारत के संविधान के अपमान का हिस्सा न बनते हुए राज्यपाल ने कड़ी नाराजगी जाहिर करते हुए सदन छोड़ दिया।'
उधर डीएमके की उप महासचिव कणिमोझी ने भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर डीएमके प्रशासन के लिए समस्याएं पैदा करने और तमिलों का अपमान करने के लिए आरएन रवि को तमिलनाडु का राज्यपाल नियुक्त करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि राज्यपाल की भूमिका में राजनीति शामिल नहीं होनी चाहिए और सुझाव दिया कि अगर विधानसभा को संबोधित करने में उनकी रुचि नहीं है तो उन्हें छुट्टी ले लेनी चाहिए। तमिलनाडु के जिला मुख्यालयों में विरोध प्रदर्शन इस साल के पहले विधानसभा सत्र की शुरुआत में राज्य सरकार का अभिभाषण न पढ़ने के रवि के फैसले की निंदा करने के लिए आयोजित किया गया था। सोमवार को रवि पारंपरिक अभिभाषण दिए बिना ही विधानसभा से चले गए। राजभवन ने बाद में बताया कि वह "गहरी पीड़ा" में चले गए, क्योंकि विधानसभा में भारत के संविधान और राष्ट्रगान का "अपमान" किया गया था।
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