Trending: दिल्ली नौसेना भवन से पाकिस्तानी जासूस गिरफ्तार, अपर डिवीजन क्लर्क विशाल यादव ने ISI को दी गोपनीय जानकारी, ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भी लीक किए दस्तावेज। 

देश की राजधानी दिल्ली में स्थित नौसेना भवन (नौसेना मुख्यालय) से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने राष्ट्रीय सुरक्षा और खुफिया...

Jun 26, 2025 - 13:18
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Trending: दिल्ली नौसेना भवन से पाकिस्तानी जासूस गिरफ्तार, अपर डिवीजन क्लर्क विशाल यादव ने ISI को दी गोपनीय जानकारी, ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भी लीक किए दस्तावेज। 

देश की राजधानी दिल्ली में स्थित नौसेना भवन (नौसेना मुख्यालय) से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने राष्ट्रीय सुरक्षा और खुफिया तंत्र को हिलाकर रख दिया। राजस्थान पुलिस की खुफिया विंग (CID Intelligence) ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए नौसेना भवन में अपर डिवीजन क्लर्क (UDC) के पद पर कार्यरत विशाल यादव को पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (ISI) के लिए जासूसी करने के आरोप में गिरफ्तार किया है। यह गिरफ्तारी 25 जून 2025 को शासकीय गुप्त बात अधिनियम, 1923 (Official Secrets Act) के तहत की गई। विशाल यादव, जो हरियाणा के रेवाड़ी जिले के पुनसिका गांव का निवासी है, पर आरोप है कि उसने नौसेना और अन्य रक्षा इकाइयों से संबंधित संवेदनशील जानकारी एक पाकिस्तानी महिला हैंडलर को दी, विशेष रूप से हाल ही में संपन्न ऑपरेशन सिंदूर के दौरान।

  • जासूसी का खुलासा

राजस्थान पुलिस की CID इंटेलिजेंस यूनिट ने कई महीनों तक पाकिस्तानी खुफिया एजेंसियों की जासूसी गतिविधियों पर नजर रखी थी। इस दौरान उनकी निगरानी में विशाल यादव संदेह के दायरे में आया। NDTV और अन्य समाचार स्रोतों के अनुसार, विशाल यादव नौसेना भवन के निदेशालय ऑफ डॉकयार्ड में एक अपर डिवीजन क्लर्क के रूप में कार्यरत था। वह सोशल मीडिया के माध्यम से एक महिला हैंडलर, जिसने खुद को "प्रिया शर्मा" के नाम से पेश किया, के संपर्क में था। जांच में खुलासा हुआ कि यह महिला वास्तव में ISI की एजेंट थी, जो विशाल को पैसे के लालच में संवेदनशील जानकारी निकालने के लिए उकसाती थी।

पुलिस ने विशाल के मोबाइल फोन की फोरेंसिक जांच की, जिसमें कई चैट्स और दस्तावेजों का आदान-प्रदान सामने आया। इनमें से कुछ जानकारियां ऑपरेशन सिंदूर के दौरान साझा की गई थीं, जो 7 से 10 मई 2025 तक चला एक सैन्य अभियान था। यह अभियान जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल 2025 को हुए आतंकी हमले के जवाब में शुरू किया गया था, जिसमें 26 नागरिकों की जान गई थी। विशाल पर आरोप है कि उसने नौसेना की गतिविधियों और रक्षा इकाइयों से संबंधित गोपनीय जानकारी पाकिस्तानी हैंडलर को दी, जिसके बदले उसे क्रिप्टोकरेंसी और बैंक खातों के माध्यम से भुगतान प्राप्त हुआ।

  • ऑपरेशन सिंदूर

ऑपरेशन सिंदूर भारत की ओर से पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में आतंकी शिविरों पर की गई एक सैन्य कार्रवाई थी। यह अभियान पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में शुरू किया गया था, जिसमें पाकिस्तान समर्थित आतंकवादियों ने 26 नागरिकों को निशाना बनाया था। इस ऑपरेशन के दौरान भारतीय सेना ने रणनीतिक हमले किए, और यह भारत की आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति का हिस्सा था। विशाल यादव द्वारा इस ऑपरेशन से संबंधित जानकारी लीक करना राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक गंभीर खतरा माना जा रहा है।

  • विशाल यादव

विशाल यादव, जो हरियाणा के रेवाड़ी का निवासी है, नौसेना भवन में एक सामान्य क्लर्क के रूप में काम करता था। प्रारंभिक जांच में पता चला कि वह ऑनलाइन गेमिंग का आदी था और इस आदत के कारण उसे भारी वित्तीय नुकसान हुआ था। इस आर्थिक तंगी को पूरा करने के लिए उसने ISI की हैंडलर के साथ सौदा शुरू किया। पुलिस के अनुसार, विशाल को क्रिप्टोकरेंसी ट्रेडिंग खातों और सीधे बैंक खातों में भुगतान प्राप्त हो रहा था। यह मामला उन खतरों को उजागर करता है, जो ऑनलाइन गेमिंग और वित्तीय लालच के कारण राष्ट्रीय सुरक्षा को प्रभावित कर सकते हैं।

विशाल यादव को राजस्थान CID इंटेलिजेंस ने 25 जून 2025 को जयपुर में गिरफ्तार किया। वरिष्ठ पुलिस अधिकारी विश्नुकांत गुप्ता ने बताया कि उनकी यूनिट लंबे समय से ISI की जासूसी गतिविधियों पर नजर रख रही थी। गिरफ्तारी के बाद, विशाल को जयपुर के सेंट्रल इंटेरोगेशन सेंटर में ले जाया गया, जहां विभिन्न खुफिया एजेंसियां उससे पूछताछ कर रही हैं। जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि इस जासूसी नेटवर्क में और कौन-कौन शामिल हैं और कितनी संवेदनशील जानकारी लीक हुई है।

पुलिस ने विशाल के मोबाइल फोन से प्राप्त डेटा की जांच की, जिसमें कई संवेदनशील दस्तावेज और चैट्स शामिल हैं। यह भी पता चला कि वह "प्रिया शर्मा" नामक हैंडलर के साथ नियमित संपर्क में था, जो उसे रणनीतिक महत्व की जानकारी निकालने के लिए प्रेरित करती थी।

  • जासूसी के अन्य मामले

यह गिरफ्तारी हाल के महीनों में पाकिस्तानी जासूसी नेटवर्क के खिलाफ की गई कई कार्रवाइयों में से एक है। पहलगाम हमले और ऑपरेशन सिंदूर के बाद, भारतीय खुफिया एजेंसियों ने जासूसी गतिविधियों पर अपनी निगरानी तेज कर दी है। हाल ही में, राजस्थान के जैसलमेर में एक सरकारी कर्मचारी शकूर खान को जासूसी के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। इसके अलावा, हरियाणा की यूट्यूबर ज्योति मल्होत्रा को भी दिल्ली में पाकिस्तान हाई कमीशन के एक अधिकारी के साथ संपर्क में होने के आरोप में हिरासत में लिया गया था।

इन घटनाओं ने सोशल मीडिया के दुरुपयोग और हनी-ट्रैपिंग के खतरों को उजागर किया है। X पर इस मामले को लेकर कई पोस्ट्स वायरल हुईं, जिनमें यूजर्स ने राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर चिंता जताई और सख्त कार्रवाई की मांग की। एक यूजर ने लिखा, "पाकिस्तानी जासूसों को पकड़ने में राजस्थान पुलिस की यह कार्रवाई काबिल-ए-तारीफ है, लेकिन हमें और सतर्क रहने की जरूरत है।"

यह मामला केवल एक जासूसी की घटना नहीं है, बल्कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा, खुफिया तंत्र की सतर्कता, और सोशल मीडिया के दुरुपयोग जैसे गंभीर मुद्दों को सामने लाता है। विशाल यादव जैसे व्यक्ति, जो रक्षा प्रतिष्ठानों में महत्वपूर्ण पदों पर कार्यरत हैं, का इस तरह के अपराध में शामिल होना चिंता का विषय है। यह घटना उन कमजोरियों को उजागर करती है, जहां व्यक्तिगत कमजोरियां, जैसे ऑनलाइन गेमिंग की लत, राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बन सकती हैं।

इसके अलावा, यह मामला भारत-पाकिस्तान संबंधों के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान लीक हुई जानकारी ने दोनों देशों के बीच तनाव को और बढ़ा दिया है। X पर कुछ यूजर्स ने इस घटना को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं दीं, जिसमें कुछ ने इसे "देश के साथ गद्दारी" करार दिया।

विशाल यादव के खिलाफ शासकीय गुप्त बात अधिनियम, 1923 के तहत मामला दर्ज किया गया है, जिसमें सात साल तक की सजा और जुर्माने का प्रावधान है। हालांकि, इस मामले की जटिलता को देखते हुए, जांच में कई खुफिया एजेंसियां शामिल हैं। यह भी जांच का विषय है कि क्या विशाल अकेले काम कर रहा था या वह किसी बड़े नेटवर्क का हिस्सा था।

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