बाराबंकी। ऑल इंडिया पसमांदा मुस्लिम महाज़ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष वसीम राईन ने समाजवादी पार्टी और सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव पर करारा हमला बोला है। शहर के सट्टी बाजार स्थित कार्यालय पर पसमांदा मुसलमानों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि सपा का बहुचर्चित PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूला पूरी तरह फर्जी और धोखा साबित हो रहा है। शास्त्रों में इसे ही फरेब और मक्कारी कहा गया है।वसीम राईन ने कहा कि अखिलेश यादव को संवैधानिक रूप से सिर्फ हिंदू समाज में ही पिछड़ा, दलित और स्वर्ण दिखाई देते हैं, लेकिन मुस्लिम और अन्य अल्पसंख्यक समाज में ये वर्ग नजर नहीं आते।
उन्होंने तंज कसा कि भाजपा को धर्म की राजनीति करने का आरोप लगाते हो, मगर खुद अखिलेश यादव भाजपा से ज्यादा हिंदू-मुस्लिम आधारित राजनीति कर रहे हैं। नाम समाजवाद का रखा है, लेकिन काम धर्म आधारित हो रहा है।उन्होंने चेतावनी दी कि जैसे हिंदू समाज में अगड़ा-पिछड़ा-दलित हैं, ठीक वैसे ही मुस्लिम समाज में भी ये वर्ग मौजूद हैं। धर्म के नाम पर यह घिनौनी राजनीति करने से आपका PDA बिल्कुल फर्जी साबित हो गया है। शुरू से ही समाजवादी पार्टी की नीति और नीयत पसमांदा मुस्लिम विरोधी रही है। हमें यह समझने में तीन दशक लग गए।राईन ने याद दिलाया कि पहले मजबूरी थी, यूपी के 16% मुस्लिम वोटरों के पास सपा के अलावा कोई विकल्प नहीं था क्योंकि बसपा और कांग्रेस उससे भी बड़ी पसमांदा-विरोधी पार्टियां थीं। लेकिन अब पसमांदा मुसलमान जाग चुके हैं। भविष्य में सपा भी बसपा, रालोद, निषाद पार्टी, राजभर और अपना दल की तरह सिर्फ एक खास जाति की पार्टी बनकर रह जाएगी।
उन्होंने इतिहास का हवाला देते हुए कहा कि पसमांदा मुसलमानों ने जिस भी पार्टी का साथ छोड़ा, वह पार्टी फिर कभी अकेले सत्ता में नहीं लौट पाई। बंगाल, बिहार, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और असम में कांग्रेस दशकों से सत्ता से बाहर है। बसपा (उप्र), राजद (बिहार) और आप (दिल्ली) का भी अकेले सत्ता में लौटना अब असंभव है। इसलिए चेतावनी दी कि अभी भी वक्त है, जो पार्टी पसमांदा मुसलमानों को संगठन और सरकार में वाजिब हिस्सेदारी देगी, पसमांदा उसी को वोट और समर्थन देगा। नहीं तो उत्तर प्रदेश में आरजेडी से भी बुरा हाल सपा का होने वाला है।
इस कार्यक्रम में महमूद चौधरी, अशफाक राईन, शफीक राईन, गुलजार कुरैशी, रिजवान राईन, रऊफ राईन, अनीस राईन, अब्दुल्ला, सलमान राईन, अव्वल राईन, वकील अंसारी, जावेद राईन, मुसीर अहमद, मुक्तार मंसूरी, सारुक, इमरान बंदा, इमरान अंसारी, कलीम लाला, मोमिन राईन, तुन्नी सहित बड़ी संख्या में पसमांदा कार्यकर्ता उपस्थित रहे।