Pilibhit : गाय ,गीता और गायत्री मंत्र भारतीय संस्कृति की पहचान है- जिलाधिकारी ज्ञानेंद्र सिंह
गाय, गीता और गायत्री मंत्र भारतीय संस्कृति की पहचान है। गायत्री परिजनों के द्वारा आज संपूर्ण विश्व में अच्छे आचरण, महिला सशक्तिकरण, बौद्धिक सामाजिक
- गायत्री एवं महामृत्युंजय मंत्र से गूंज उठा गोमती उद्गम तीर्थ स्थल
Report : कुँवर निर्भय सिंह, आईएनए, पीलीभीत- उत्तर प्रदेश
पीलीभीत : जिले के माधोटांडा स्थित गोमती उद्गम तीर्थ स्थल पर शांतिकुंज हरिद्वार के मार्गदर्शन में चार दिवसीय नौ कुंडीय शक्ति संवर्धन गायत्री महायज्ञ का आयोजन हो रहा है। यह पवित्र स्थान गोमती नदी का उद्गम स्थल है, जहां फुलहर झील या गोमत ताल से नदी निकलती है। भागवत पुराण में गोमती को पांच दिव्य नदियों में से एक माना गया है। इस तीर्थ पर रोज सैकड़ों महिलाएं और पुरुष पहुंच रहे हैं। वे यज्ञ में आहुतियां देकर भाग लेते हैं। युवा कार्यकर्ता शांतिकुंज के विद्वानों से संस्कारों की शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। आयोजन का मुख्य उद्देश्य अच्छे आचरण, महिला सशक्तिकरण, बौद्धिक-सामाजिक-आर्थिक मजबूती, नशा मुक्ति और स्वावलंबन को बढ़ावा देना है। गायत्री परिवार के परिजन विश्वभर में इन मूल्यों का प्रचार कर रहे हैं।
महायज्ञ के तीसरे दिन शाम को जिलाधिकारी ज्ञानेंद्र सिंह गायत्री परिवार के निमंत्रण पर पहुंचे। परिजनों ने उनका स्वागत-सत्कार किया। जिलाधिकारी ने वेद माता गायत्री, परम पूज्य गुरुदेव और पूज्य माता जी का तिलक वंदन किया। साथ ही कलश पूजन भी किया। उन्होंने यज्ञ स्थल पर पहुंचे सभी श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि गाय, गीता और गायत्री मंत्र भारतीय संस्कृति की पहचान हैं। शांतिकुंज हरिद्वार के तत्वावधान में गोमती उद्गम तीर्थ पर हो रहे इस महायज्ञ में शामिल होने का अवसर मिला।
इसके लिए गायत्री परिवार के प्रति आभार व्यक्त करता हूं। गायत्री परिवार विश्वभर में मानव व्यक्तित्व को निखारने का प्रयास कर रहा है। महिला सशक्तिकरण के लिए प्रचार हो रहा है। लोग बौद्धिक, सामाजिक और आर्थिक रूप से मजबूत बन रहे हैं। युवा पीढ़ी को नशा मुक्त कर सशक्त और शालीन बनाया जा रहा है। युवाओं में संस्कार जगाने के प्रयास सराहनीय हैं। गायत्री परिवार बधाई का हकदार है। ऐसे आयोजन व्यक्ति, समाज और राष्ट्र को मजबूत बनाते हैं।
इस अवसर पर गायत्री परिवार की ओर से जिलाधिकारी को अंगवस्त्र और शांतिकुंज गायत्री परिवार का साहित्य भेंट कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में अनंत राम पालिया, अशोक खंडेलवाल, महेश चंद्र शर्मा, पी एल गंगवार, मनोज कुमार गुप्ता, हरिशंकर वर्मा, राममूर्ति सिंह, निर्भय सिंह, पुरुषोत्तम, कौशल शर्मा, वीरेंद्र पांडे, कमलेश सिंह सहित कई परिजन मौजूद रहे।
महायज्ञ का माहौल भक्तिमय था। हजारों की संख्या में पीत वस्त्र धारण किए महिलाएं और पुरुष गायत्री एवं महामृत्युंजय मंत्रों का जाप कर रहे थे। जब वे यज्ञ में आहुतियां दे रहे थे, तो पूरा गोमती उद्गम स्थल इन मंत्रों से गूंज उठा। यह दृश्य दिव्य और भव्य था। श्रद्धालुओं की संख्या इतनी अधिक थी कि स्थान पवित्र ऊर्जा से भर गया। मंत्रों की ध्वनि चारों ओर फैल रही थी, जो सुनने वालों को शांति प्रदान कर रही थी। महिलाओं ने विशेष उत्साह दिखाया। वे कलशों को सिर पर रखे हुए मंत्र जाप कर रही थीं। पुरुषों ने भी सक्रिय भागीदारी निभाई। युवा कार्यकर्ता विद्वानों से जीवन मूल्यों पर चर्चा कर रहे थे।
नौ कुंडीय महायज्ञ का अर्थ है नौ यज्ञ कुंडों का निर्माण। प्रत्येक कुंड शक्ति संवर्धन का प्रतीक है। शांतिकुंज हरिद्वार गायत्री परिवार इस तरह के आयोजन विश्वभर में करता है। संस्था की स्थापना पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य ने की थी। वे युग निर्माण योजना के प्रणेता थे। शांतिकुंज हरिद्वार में गायत्री तपोभूमि है, जहां ध्यान, साधना और सामाजिक कार्य होते हैं। गायत्री मंत्र जाप से मानसिक शांति मिलती है। महामृत्युंजय मंत्र स्वास्थ्य और दीर्घायु के लिए जपा जाता है। इस महायज्ञ में दोनों मंत्रों का संयोजन किया गया है। आयोजन से क्षेत्रवासियों में उत्साह है। स्थानीय लोग इसे सांस्कृतिक पुनरुत्थान का माध्यम मानते हैं।
गोमती उद्गम स्थल धार्मिक पर्यटन का केंद्र है। यहां दुर्गा नाथ मंदिर भी है, जहां श्रद्धालु आस्था रखते हैं। नदी का जल पवित्र माना जाता है। अमावस्या पर हजारों लोग स्नान करने आते हैं। प्रशासन इस स्थान को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित कर रहा है। सफाई और सुविधाओं पर काम हो रहा है। जिलाधिकारी ज्ञानेंद्र सिंह ने इस आयोजन को संस्कृति संरक्षण का उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रमों से समाज में सकारात्मक बदलाव आते हैं। युवाओं को संस्कारों से जोड़ना आवश्यक है। नशा मुक्ति अभियान से परिवार मजबूत होते हैं। महिला सशक्तिकरण से राष्ट्र प्रगति करता है।
यह महायज्ञ चार दिनों तक चला। प्रतिदिन विभिन्न सत्र हुए। सुबह ध्यान साधना, दोपहर में प्रवचन और शाम को यज्ञ। विद्वानों ने गीता के उपदेशों पर व्याख्यान दिए। श्रद्धालुओं ने भाग लेकर आशीर्वाद लिया। आयोजन समापन के बाद भी इसका प्रभाव रहेगा। गायत्री परिवार ने सभी को धन्यवाद दिया। इस तरह के कार्यक्रम समाज को एकजुट करते हैं। पीलीभीत जैसे जिले में धार्मिक आयोजन सांस्कृतिक धरोहर को जीवित रखते हैं। गोमती उद्गम स्थल पर यह महायज्ञ विशेष महत्व का रहा।
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