भावनगर में सियासी हाई-ड्रामा: भाजपा पार्षद सेजलबेन गोहिल ने तीन घंटे में बदला पाला, कांग्रेस को दे गई बड़ा झटका।

गुजरात के भावनगर नगर निगम में वार्ड संख्या 3 से भाजपा की पूर्व पार्षद सेजलबेन गोहिल ने 6 अप्रैल, 2026 को दोपहर के समय एकाएक भाजपा

Apr 10, 2026 - 11:59
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भावनगर में सियासी हाई-ड्रामा: भाजपा पार्षद सेजलबेन गोहिल ने तीन घंटे में बदला पाला, कांग्रेस को दे गई बड़ा झटका।
भावनगर में सियासी हाई-ड्रामा: भाजपा पार्षद सेजलबेन गोहिल ने तीन घंटे में बदला पाला, कांग्रेस को दे गई बड़ा झटका।
  • इस्तीफा, दलबदल और फिर घर वापसी: भावनगर की पार्षद सेजलबेन की 'सुपरफास्ट' राजनीति ने गुजरात के दिग्गजों को चौंकाया।
  • असुरक्षा के आरोप से सार्वजनिक माफी तक: सेजलबेन गोहिल ने कांग्रेस में शामिल होकर फिर भाजपा में की वापसी, आरोपों को बताया 'गुमराह करने वाली साजिश'।

गुजरात के भावनगर नगर निगम में वार्ड संख्या 3 से भाजपा की पूर्व पार्षद सेजलबेन गोहिल ने 6 अप्रैल, 2026 को दोपहर के समय एकाएक भाजपा की सदस्यता से इस्तीफा देकर कांग्रेस का हाथ थाम लिया था। उन्होंने कांग्रेस के शहर अध्यक्ष और अन्य वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए भाजपा पर गंभीर आरोप लगाए थे। सेजलबेन ने उस समय दावा किया था कि वह सत्ताधारी पार्टी में खुद को असुरक्षित महसूस कर रही हैं और दलित व पिछड़ा वर्ग के प्रतिनिधियों की वहां अनदेखी की जा रही है। उनके कांग्रेस में शामिल होने की खबर जैसे ही फैली, विपक्षी खेमे में जश्न का माहौल बन गया और इसे आगामी चुनावों से पहले भाजपा के लिए एक बड़े झटके के तौर पर देखा जाने लगा।

कांग्रेस कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम के दौरान सेजलबेन ने यह भी कहा था कि उनके वार्ड में शराब माफियाओं और जुआ चलाने वालों का आतंक है, जिनके खिलाफ आवाज उठाने पर उनके पति पर हमला भी हुआ था, लेकिन भाजपा संगठन ने उनकी कोई मदद नहीं की। उन्होंने भावुक होते हुए कहा था कि जब एक निर्वाचित पार्षद ही सुरक्षित नहीं है, तो आम जनता का क्या होगा। कांग्रेस नेताओं ने उनका भव्य स्वागत किया और इसे 'सत्य की जीत' बताते हुए दावा किया कि आने वाले दिनों में भाजपा के और भी कई पार्षद उनके संपर्क में हैं। हालांकि, कांग्रेस की यह खुशी ज्यादा देर तक टिक नहीं सकी और शाम होते-होते पूरी कहानी ने यू-टर्न ले लिया।

शाम के करीब 5 बजे सेजलबेन गोहिल अचानक भाजपा के शहर कार्यालय पहुंच गईं और वहां मौजूद पार्टी नेताओं के साथ प्रेस के सामने उपस्थित हुईं। उन्होंने घोषणा की कि वह अपनी पुरानी पार्टी भाजपा में वापस लौट आई हैं। उनके इस बयान ने वहां मौजूद पत्रकारों को भी चकित कर दिया। सेजलबेन ने अपनी सफाई में कहा कि उन्हें कांग्रेस के कुछ नेताओं द्वारा गुमराह किया गया था और उन्होंने दबाव व गलत जानकारी के प्रभाव में आकर कांग्रेस का दामन थामा था। उन्होंने भाजपा नेतृत्व से अपनी इस गलती के लिए सार्वजनिक रूप से माफी मांगी और संकल्प लिया कि वह जीवन भर भाजपा की विचारधारा के साथ ही रहेंगी। गुजरात में स्थानीय निकाय चुनाव (नगर निगम, नगरपालिका और पंचायत) अप्रैल 2026 के अंत में होने वाले हैं। भाजपा ने इस बार 'नो रिपीट' पॉलिसी और सक्रियता के नए मापदंड तय किए हैं, जिससे कई मौजूदा पार्षदों के टिकट कटने की आशंका है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सेजलबेन की यह उथल-पुथल भी टिकट की अनिश्चितता और फिर संगठन द्वारा दी गई गारंटी से जुड़ी हो सकती है।

इस नाटकीय वापसी के बाद कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। कांग्रेस के स्थानीय नेतृत्व ने भाजपा पर 'प्रेशर पॉलिटिक्स' यानी दबाव की राजनीति का आरोप लगाया है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि सेजलबेन खुद चलकर उनके पास आई थीं और उन्होंने स्वेच्छा से भाजपा की कार्यशैली पर सवाल उठाए थे। कांग्रेस के अनुसार, भाजपा ने डरा-धमकाकर या किसी प्रलोभन के माध्यम से उन्हें कुछ ही घंटों में अपना बयान बदलने के लिए मजबूर किया है। कांग्रेस ने तंज कसते हुए कहा कि जिस पार्षद को दोपहर तक भाजपा में अपनी जान का खतरा लग रहा था, उसे तीन घंटे में अचानक सब कुछ सुरक्षित कैसे लगने लगा।

दूसरी ओर, भाजपा ने सेजलबेन की वापसी को 'भटके हुए सदस्य की घर वापसी' बताया है। भाजपा नेताओं का तर्क है कि विपक्षी दल उनकी पार्टी के सदस्यों को बरगलाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन अंततः सत्य की ही जीत होती है। भाजपा ने स्पष्ट किया कि सेजलबेन एक निष्ठावान कार्यकर्ता रही हैं और क्षणिक गुस्से या गलतफहमी के कारण उन्होंने कांग्रेस का रुख किया था, लेकिन जब उन्हें अपनी गलती का अहसास हुआ, तो उन्होंने बिना किसी देरी के पार्टी में वापस आने का फैसला किया। भाजपा ने यह भी दावा किया कि उनके किसी भी कार्यकर्ता पर कोई दबाव नहीं डाला गया है और वे सभी आगामी चुनावों में जीत सुनिश्चित करने के लिए एकजुट हैं।

भावनगर का यह घटनाक्रम गुजरात की स्थानीय राजनीति की एक ऐसी तस्वीर पेश करता है जहां वफादारियां बहुत तेजी से बदल रही हैं। सेजलबेन गोहिल का मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि उन्होंने जिन मुद्दों (असुरक्षा और शराब माफिया) को लेकर पार्टी छोड़ी थी, वापसी के बाद उन्होंने उन मुद्दों पर चुप्पी साध ली। स्थानीय लोगों और राजनीतिक जानकारों के बीच यह चर्चा का विषय है कि क्या यह केवल टिकट पाने की एक रणनीति थी या वाकई में पर्दे के पीछे कोई बड़ा समझौता हुआ है। गुजरात में इस तरह के दलबदल पहले भी देखे गए हैं, लेकिन इतने कम समय में दो बार पाला बदलना एक दुर्लभ उदाहरण बन गया है।

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