Prayagraj : शिल्प मेले में लोक संगीत और नृत्यों की रंगारंग शाम, दर्शक झूम उठे

मंच पर मथुरा की कलाकारों ने चरकुला नृत्य पेश किया, जिसमें महिलाएं सिर पर कई मटके रखकर नाचती हैं। राजस्थान की गंगा देवी और उनकी टीम ने तेराताली व भ

Dec 4, 2025 - 23:41
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Prayagraj : शिल्प मेले में लोक संगीत और नृत्यों की रंगारंग शाम, दर्शक झूम उठे
भवाई नृत्य पेश करती राजस्थान की कलाकार गंगा देवी।

उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र के राष्ट्रीय शिल्प मेले के तीसरे दिन सांस्कृतिक संध्या लोक धुनों, भक्ति और नृत्य की छटा बिखेरती रही। इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमसेरी ने दीप जलाकर कार्यक्रम शुरू किया। केंद्र निदेशक सुदेश शर्मा ने उन्हें स्मृति चिन्ह और अंगवस्त्र भेंट किया।

शाम की शुरुआत आशुतोष श्रीवास्तव ने भजनों से की। “सियाराम मैं सब जग जानी”, “सांसों का आना-जाना” और “मां तू कृष्णा कान्हा” जैसे भजन सुनकर दर्शक तालियां बजाते रहे। इसके बाद रिद्धि पाण्डेय ने “मोहि लेलखिन सजनी”, “कौने रंग मोतिया” और “रिमझिम बरसे पनिया” जैसे लोकगीत गाकर सबका मन मोह लिया।

मंच पर मथुरा की कलाकारों ने चरकुला नृत्य पेश किया, जिसमें महिलाएं सिर पर कई मटके रखकर नाचती हैं। राजस्थान की गंगा देवी और उनकी टीम ने तेराताली व भवई नृत्य से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। मध्यप्रदेश से आई सुमन परास्ते ने कर्मा और रीना शैली के जोशीले नृत्य दिखाए। बिरहा गायक मुंशीलाल सोनकर की प्रस्तुति ने सबको भावुक कर दिया।

मेले में अलग-अलग राज्यों के स्टॉल पर हस्तशिल्प और पारंपरिक व्यंजनों की खरीदारी के लिए भारी भीड़ रही। लोक संगीत, नृत्य और शिल्प के इस अनोखे मेल ने हर आने वाले को खुश कर दिया।

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