Sambhal : 'एक बच्चा फौज के लिए, एक दीन के लिए' - बयान से छिड़ी नई बहस, जिम्मेदारी बनाम जनसंख्या का सवाल
मुफ्ती नूरी ने कहा कि बच्चों की पैदाइश पर कोई रोक नहीं होनी चाहिए और हर परिवार को ज्यादा से ज्यादा बच्चे पैदा करने चाहिए। उन्होंने अपने बयान में कहा कि एक बच्चा देश की सेवा के लिए फौज में जाना चाहिए, जबकि दूसरा बच्चा दीन और धार्मिक कार्यों के लिए समर्पित होना चाहिए। उनके मुताबिक, इससे समाज और देश दोनों को मजबूती मिलेगी। हालांकि, इस बयान के बाद जनसंख्या नियंत्रण को लेकर नई बहस छिड़ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि जहां एक
Report : उवैस दानिश, सम्भल
कथावाचक धीरेंद्र शास्त्री के “चार बच्चे पैदा करने” वाले बयान के बीच अब “एक बच्चा फौज के लिए और एक दीन के लिए” वाला बयान सुर्खियों में आ गया है। यह बयान मुफ्ती आलम रज़ा नूरी (मुफ्ती ए सिरसी) की ओर से सामने आया, जिसने पूरे मुद्दे को और ज्यादा गरमा दिया है।
मुफ्ती नूरी ने कहा कि बच्चों की पैदाइश पर कोई रोक नहीं होनी चाहिए और हर परिवार को ज्यादा से ज्यादा बच्चे पैदा करने चाहिए। उन्होंने अपने बयान में कहा कि एक बच्चा देश की सेवा के लिए फौज में जाना चाहिए, जबकि दूसरा बच्चा दीन और धार्मिक कार्यों के लिए समर्पित होना चाहिए। उनके मुताबिक, इससे समाज और देश दोनों को मजबूती मिलेगी। हालांकि, इस बयान के बाद जनसंख्या नियंत्रण को लेकर नई बहस छिड़ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि जहां एक ओर देश में संसाधनों का दबाव बढ़ रहा है, वहीं दूसरी ओर इस तरह के बयान जनसंख्या संतुलन की नीतियों को चुनौती देते हैं। मुफ्ती नूरी ने जनसंख्या नियंत्रण की अवधारणा पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह इंसान के बस में नहीं, बल्कि ईश्वर के हाथ में है। उनके इस बयान ने सामाजिक, धार्मिक और राजनीतिक गलियारों में तीखी प्रतिक्रियाओं को जन्म दिया है। अब सवाल यह है कि क्या ऐसे बयान समाज को दिशा देंगे या फिर देश में जनसंख्या और संसाधनों के संतुलन को लेकर चिंता और बढ़ेगी।
Also Click : Lucknow : महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण के लिए सरकार प्रतिबद्ध, बरेली में बोले केशव प्रसाद मौर्य
What's Your Reaction?









