Lucknow: शिक्षा व्यवस्था की अनिवार्य कड़ी हैं शिक्षामित्र, स्थानीय क्षेत्र में होगी तैनाती- संदीप सिंह

उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षा मित्र संघ एवं परिषदीय अनुदेशक संघ द्वारा लखनऊ स्थित विश्वेश्वरैया ऑडिटोरियम में मंगलवार को आयोजित सम्मेलन

Jan 7, 2026 - 11:12
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Lucknow: शिक्षा व्यवस्था की अनिवार्य कड़ी हैं शिक्षामित्र, स्थानीय क्षेत्र में होगी तैनाती- संदीप सिंह
शिक्षा व्यवस्था की अनिवार्य कड़ी हैं शिक्षामित्र, स्थानीय क्षेत्र में होगी तैनाती- संदीप सिंह
  • लखनऊ के विश्वेश्वरैया ऑडिटोरियम में मंगलवार को आयोजित हुआ सम्मेलन
  • उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षामित्र संघ एवं परिषदीय अनुदेशक संघ ने संयुक्त रूप से किया अयोजन
  • समाज को दिशा देना, कुरीतियों के विरुद्ध चेतना जगाना और राष्ट्र के लिए जज्बा पैदा करना भी शिक्षक की भूमिका का अभिन्न हिस्सा: मंत्री

लखनऊ: उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षा मित्र संघ एवं परिषदीय अनुदेशक संघ द्वारा लखनऊ स्थित विश्वेश्वरैया ऑडिटोरियम में मंगलवार को आयोजित सम्मेलन में बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने कहा कि माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार की सोच बिल्कुल साफ है। शिक्षामित्र कोई समस्या नहीं हैं, बल्कि समाधान हैं। वे शिक्षा व्यवस्था की अनिवार्य कड़ी हैं।

उन्होंने कहा कि सरकार का निर्णय और दिशा दोनों स्पष्ट हैं। शिक्षामित्रों की तैनाती यथासंभव उनके स्थानीय क्षेत्र में होगी, जिससे विद्यालय, समाज और शिक्षा के बीच स्वाभाविक और स्थायी जुड़ाव बने। इस दौरान उन्होंने दो टूक कहा कि योगी सरकार का एजेंडा कायाकल्प के माध्यम से केवल इमारतें खड़ी करना नहीं है, बल्कि शिक्षा की नींव को मजबूत करना है। संसाधन बढ़े हैं, विद्यालयों की संरचना सुधरी है और डिजिटल सुविधाएं गांव-गांव तक पहुंची हैं। उन्होंने कहा कि सरकार का फोकस आंकड़ों पर नहीं, बल्कि बच्चों की वास्तविक सीख, समझ और उपलब्धि पर है।

सम्मेलन को संबोधित करते हुए बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने कहा कि शिक्षक का दायित्व केवल पाठ्यपुस्तकों तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज को दिशा देना, कुरीतियों के विरुद्ध चेतना जगाना और राष्ट्र के लिए जज्बा पैदा करना भी शिक्षक की भूमिका का अभिन्न हिस्सा है। उन्होंने कहा कि शिक्षामित्र नई पीढ़ी का भविष्य गढ़ रहे हैं और उनकी आवाज संगठन के माध्यम से ही प्रभावी ढंग से सरकार तक पहुंचती है। एकजुटता पर बल देते हुए मंत्री ने कहा कि अलग-अलग संगठनों का होना गलत नहीं है, लेकिन उद्देश्य एक होना चाहिए और वह उद्देश्य सकारात्मक होना चाहिए। सरकार सभी के लिए काम करती है और जो नियम बनाए जाते हैं, वे समान रूप से लागू होते हैं।

उन्होंने चेताया कि कुछ लोग शिक्षामित्रों की राजनीति कर उनके भविष्य को भ्रमित करने का प्रयास करते हैं और उन्हें सरकार व समाज के विरुद्ध खड़ा करने की कोशिश करते हैं, जिसका लाभ शिक्षामित्रों को पक्के तौर पर नहीं मिलता। उन्होंने कहा कि यदि शिक्षामित्र संगठित रहते और सीधे संवाद करते, तो अनेक समस्याएं अब तक समाप्त हो चुकी होतीं।

मंत्री ने कहा कि वर्ष 2017 में योगी सरकार के गठन के बाद से उत्तर प्रदेश में शिक्षा के क्षेत्र में ऐतिहासिक परिवर्तन हुए हैं। शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ी है और नई शिक्षा नीति 2020 के तहत आगे भी सकारात्मक बदलाव होंगे। डिजिटल युग में शिक्षा को तकनीकी संसाधनों से जोड़ा गया है और उत्तर प्रदेश देश में शिक्षा के क्षेत्र में अग्रणी बनने की दिशा में तेजी से बढ़ रहा है। 

उन्होंने पूर्ववर्ती सरकारों पर निशाना साधते हुए इशारे ही इशारे में कहा कि जिस प्रदेश की पहचान कभी अपराध, माफिया और भ्रष्टाचार से होती थी, आज वही उत्तर प्रदेश, योगी सरकार के नेतृत्व में ‘उत्तम प्रदेश’ के रूप में जाना जा रहा है।

मंत्री ने कहा कि वर्ष 2047 में विकसित भारत और विकसित उत्तर प्रदेश का सपना इन्हीं शिक्षकों और शिक्षामित्रों के कंधों पर साकार होगा। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा शिक्षकों, शिक्षामित्रों, अनुदेशकों और रसोइयों के लिए कैशलेस चिकित्सा सुविधा की घोषणा का उल्लेख करते हुए कहा कि यह सरकार की संवेदनशीलता का प्रमाण है। 

इस दौरान उन्होंने कहा कि सरकार पूरा प्रयास कर रही है, लेकिन शिक्षा के संकल्प को पूरा करने के लिए शिक्षामित्रों की सक्रिय सहभागिता के बिना यह सपना साकार होने में कठिनाई होगी। उन्होंने दोहराया कि सरकार मानदेय, सम्मान, सुरक्षा और स्थायित्व के मुद्दों पर संवेदनशीलता और दृढ़ संकल्प के साथ काम कर रही है। जब कक्षा की आवाज नीति तक पहुंचती है, तभी व्यवस्था टिकाऊ बनती है। उन्होंने कहा कि विकसित भारत @2047 की नींव आज की कक्षाओं में रखी जा रही है। हम केवल बच्चों को पढ़ा नहीं रहे, बल्कि देश का भविष्य गढ़ रहे हैं।

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