Madhya Pradesh News: बैतूल के इतिहास में सबसे बड़ी पुलिस की सबसे बड़ी कार्यवाही,1 करोड़ की अफीम जब्त, 8 आरोपी गिरफ्तार।
जिले में अफीम की अवैध खेती (illegal farming) और कारोबार का पर्दाफाश (exposed) करने के बाद अब धीरे धीरे इस मामले की परतें भी खुलने लगी हैं। पहले ही इस ....
रिपोर्ट- शशांक सोनकपुरिया, बैतूल मध्यप्रदेश
मध्यप्रदेश के बैतूल में पुलिस अधीक्षक निश्चल झारिया की अगुवाई में जिले में अफीम की अवैध खेती और कारोबार का पर्दाफाश करने के बाद अब धीरे धीरे इस मामले की परतें भी खुलने लगी हैं। पहले ही इस तथ्य का खुलासा कर दिया था कि अफीम की खेती एक दो नहीं बल्कि पिछले कुछ सालों से निरंतर की जा रही थी। यहीं नहीं बल्कि इस काले कारोबार में सुनियोजित तरीके से भोले भाले आदिवासी किसानों की भावनाओ के साथ माफियाओं द्वारा खिलवाड़ भी किया गया है।
जिसकी पुष्टि एसपी ने की है। नया खुलासा गुरुवार को एसपी ने किया यह है ।इधर सूत्रो ने बताया कि माफियाओं ने फसल के अनुकूल मौसम में ही अफीम की फसल की बोवनी कर दी थी। और डोडे से अफीम निकालकर जिले के राजस्थानी और अन्य ढाबों में सप्लाई भी कर दी थी। जिसके बाद पुलिस ने चिरापाटला के एक और शाहपुर के दो ढाबा संचालकों को पूछताछ के लिए उठा लिया है।
कर रही हैं। कोशिश की जा रही है कि जल्द से पुलिस सरगना तक पहुंच जाए। पुलिस को आर्थिक लेनदेन के भी साक्ष्य मिले हैं और कई बैंक खाते भी सीज किये गए हैं । जिसकी जांच के बाद पूरे मामले का खुलासा हो जाएगा।
- मात्र 120 दिन की होती है अफीम की फसल, निकलने लगी थी अफीम
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक नशीले पदार्थ की पैदावार करने वाले माफियाओं ने अफीम की खेती के जरिये कमाई भी शुरू कर दी थी। आमतौर पर अफीम की खेती की बोवनी का समय अक्टूबर माह का होता है। फसल कि बोवनी के बाद 120 दिन में पौधों में लगे डोडे से अफीम निकलनी भी शुरू हो जाती है।इस तरह जनवरी 2025 में ही पौधा पूरी तरह तैयार होकर डोडे का रूप धारण कर चुका था। सूत्र बताते हैं कि, माफियाओं ने डोडे से अफीम निकालनी भी शुरू कर दी थी। शाम के समय डोडे में रेजर से चीरा मारकर इसमें पन्नी बांध दी जाती थी। सुबह पन्नी में जमा दूध एकत्रित कर लिया जाता था यही दूध अफीम कहलाता है। सूत्र बताते हैं कि, जो खेती सबसे पहले पुलिस ने पकड़ी थी, उस खेती के जरिये माफिया बड़े पैमाने पर अफीम निकाल चुके थे।
- बड़े पैमाने पर ढाबों में हो रही थी अफीम की सप्लाई
सूत्र बताते हैं कि, माफियाओं द्वारा डोडे से निकाली गई अफीम जिले के कई ढाबों पर सप्लाई की जा रही थी। सारणी के आसपास सहित, भोपाल, इंदौर, नागपुर, अमरावती जाने वाले मार्गों पर संचालित राजस्थानी और अन्य ढाबों पर इसकी सप्लाई की जा रही थी। यही अफीम ढाबों के संचालक ट्रक चालकों को बेच कर मोटा मुनाफा कमा रहे थे। पुलिस पूछताछ में यह तथ्य सामने आने के बाद कई ढाबों के संचालक अब पुलिस की रडार पर हैं।
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