Hardoi News: विवाद में पैरवी करने गए किसान नेता की हूटर लगी स्कार्पियो का हुआ चालान, प्रशासन मुर्दाबाद के नारे लगाए।
हरदोई के संडीला थाना क्षेत्र के ग्राम सभा सूंडा में दो पक्षों के बीच हुए विवाद ने उस समय नया मोड़ ले लिया, जब एक पक्ष की पैरवी करने पहुंचे...
संवाददाता: मुकेश सिंह, संडीला
हरदोई के संडीला थाना क्षेत्र के ग्राम सभा सूंडा में दो पक्षों के बीच हुए विवाद ने उस समय नया मोड़ ले लिया, जब एक पक्ष की पैरवी करने पहुंचे किसान यूनियन के एक नेता की हूटर लगी स्कॉर्पियो यातायात नियमों के उल्लंघन में पकड़ी गई।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्राम सभा सूंडा में दो पक्षों के बीच हुए विवाद को सुलझाने के लिए सूंडा की ग्राम प्रधान अनीता अर्कवंशी और किसान यूनियन के नेता अपनी स्कॉर्पियो (यूपी 32 एलडब्ल्यू 9146) के साथ संडीला थाने पहुंचे। उनकी गाड़ी पर अवैध रूप से हूटर लगा हुआ था, जो यातायात नियमों का स्पष्ट उल्लंघन था। संडीला थाने के कोतवाल विजय कुमार ने गाड़ी पर लगे हूटर को देखकर नेता को इसे हटाने का निर्देश दिया।
हालांकि, कोतवाल के निर्देश का पालन करने के बजाय, किसान यूनियन के नेता विवाद पर उतर आए और थाने के बाहर धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया। इस दौरान उन्होंने और उनके समर्थकों ने "हरदोई प्रशासन मुर्दाबाद" के नारे लगाए, जिससे माहौल तनावपूर्ण हो गया।
जैसे ही इस घटना की जानकारी क्षेत्राधिकारी (सीओ) संडीला संतोष कुमार को मिली, वे तुरंत मौके पर पहुंचे और कोतवाल से पूरे मामले की जानकारी ली। यातायात नियमों के उल्लंघन को गंभीरता से लेते हुए, सीओ ने तत्काल कार्रवाई का आदेश दिया। स्कॉर्पियो पर लगे अवैध हूटर को हटवाया गया और गाड़ी का चालान कर वैधानिक कार्रवाई की गई।
घटना के दौरान किसान यूनियन के एक अन्य नेता सत्य प्रकाश ने भी हरदोई प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। इस अभद्र व्यवहार को स्थानीय लोगों ने अशोभनीय और निंदनीय बताया। कई लोगों का मानना है कि यह घटना न केवल यातायात नियमों के उल्लंघन का मामला है, बल्कि प्रशासन के प्रति असम्मान को भी दर्शाती है।
हरदोई प्रशासन ने इस मामले को गंभीरता से लिया है और सूत्रों के अनुसार, किसान नेताओं के खिलाफ विधिक कार्रवाई की तैयारी की जा रही है। क्षेत्राधिकारी संतोष कुमार के इस सख्त एक्शन ने संडीला क्षेत्र में कानून के प्रति भय और सम्मान को और मजबूत किया है।
यह घटना न केवल यातायात नियमों के पालन की महत्ता को रेखांकित करती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि कानून सभी के लिए बराबर है। चाहे वह ग्राम प्रधान हो या किसान यूनियन का नेता, नियमों का उल्लंघन करने पर कार्रवाई तय है। संडीला में हुई इस घटना ने स्थानीय प्रशासन की सजगता और निष्पक्षता को सामने लाया है, जिससे क्षेत्र में कानून-व्यवस्था के प्रति विश्वास बढ़ा है।
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