बेटियों के भटकने का असली कारण तालीम नहीं, तर्बियत की कमी - क़ारी इसहाक़ गोरा

जमीयत दावातुल मुस्लिमीन के संरक्षक प्रसिद्ध देवबंदी उलेमा मौलाना क़ारी इसहाक़ गोरा ने मुस्लिम समाज की बेटियों में बढ़ते उस रुझान

Dec 12, 2025 - 14:55
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बेटियों के भटकने का असली कारण तालीम नहीं, तर्बियत की कमी - क़ारी इसहाक़ गोरा
बेटियों के भटकने का असली कारण तालीम नहीं, तर्बियत की कमी - क़ारी इसहाक़ गोरा

देवबंद: जमीयत दावातुल मुस्लिमीन के संरक्षक प्रसिद्ध देवबंदी उलेमा मौलाना क़ारी इसहाक़ गोरा ने मुस्लिम समाज की बेटियों में बढ़ते उस रुझान पर गहरी फ़िक्र का इज़हार करते हुए बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि कुछ लड़कियाँ घर-परिवार और मज़हब से दूर होकर दूसरे मज़हब की तरफ़ रुख कर रही हैं। गुरुवार को जारी किए गए अपने एक महत्वपूर्ण वीडियो संदेश में उन्होंने इस मसले को “उम्मत के लिए गंभीर चेतावनी” क़रार दिया।
मौलाना गोरा ने कहा कि “आज देखा और सुना जा रहा है कि ख़ास तौर पर हमारे घरों की कुछ बेटियाँ मुर्तद हो रही हैं, यानी इस्लाम छोड़कर दूसरे मज़हबों की तरफ़ जा रही हैं। समाज में इसके बारे में तरह-तरह की राय पाई जाती है। 

कोई कहता है कि यह लड़कियों को ज़्यादा तालीम देने का नतीजा है, कोई कहता है कि उन्हें ज़्यादा आज़ादी देने की वजह से ऐसा हो रहा है। लेकिन हक़ीक़त यह नहीं है।” उन्होंने साफ़ कहा कि इस मसले की असल वजह हमारी अपनी कोताही है “हमारे घरों से इस्लामी तालीमात का निकल जाना और सही तर्बियत से ग़फ़लत ही इसकी बुनियादी वजह है।” मौलाना गोरा ने अफ़सोस का इज़हार करते हुए कहा कि आज हम बच्चों को दुनिया की उच्च शिक्षा दिलाने में तो बड़ी लगन दिखाते हैं, मगर उनकी तर्बियत, उनके अख़लाक़, उनकी सोच और उनके ईमानी माहौल की तरफ़ ध्यान ही नहीं देते।

उन्होंने बड़े दर्द के साथ यह भी कहा: “आज अगर भाई अपनी बहन को समझाता है, तो अक्सर ग़ुस्से में समझाता है। याद रखिए अगर कोई व्यक्ति सिर्फ़ ग़ुस्से से समझा सकता है, तो इसका मतलब यह है कि उसमें मोहब्बत से समझाने की सलाहियत और हिकमत मौजूद नहीं है।” मौलाना गोरा ने कहा कि बेटियों को रोकना हल नहीं है,
बल्कि उनके साथ दोस्ताना रिश्ता, भरोसा, और सही तर्बियत ही उन्हें गलत रास्तों से बचा सकते हैं।
उन्होंने कहा: “बेटियों को तालीम देना ख़तरा नहीं, तर्बियत को छोड़ देना असली ख़तरा है।” मौलाना क़ारी इसहाक़ गोरा ने मुस्लिम परिवारों से अपील की कि आज की सबसे बड़ी ज़रूरत यही है कि हम अपने घरों के माहौल को दुरुस्त करें—
घर में दीन की रोशनी हो,
प्यार का लहजा हो,
बात सुनने और समझने का माहौल हो,
और बेटियाँ अपने ही घर में इत्मीनान, भरोसा और इज़्ज़त महसूस करें।
उन्होंने कहा कि जब घरों में तर्बियत मजबूत होगी तो कोई भी बाहरी ताक़त बेटियों को बहका नहीं सकेगी।

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