Trending: ट्रंप ने टैरिफ बम फोड़ा- 14 देशों पर नए व्यापारिक कर, म्यांमार और लाओस पर 40% शुल्क।
TrumpTariffs: डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर 14 देशों के नेताओं को भेजे गए पत्रों के स्क्रीनशॉट साझा किए....
म्यांमार और लाओस: 40%
कंबोडिया और थाईलैंड: 36%
बांग्लादेश और सर्बिया: 35%
इंडोनेशिया: 32%
दक्षिण अफ्रीका और बोस्निया और हर्जेगोविना: 30%
जापान, दक्षिण कोरिया, मलेशिया, कजाकिस्तान, और ट्यूनीशिया: 25%
ट्रंप ने इन पत्रों में कहा कि ये टैरिफ अमेरिका के व्यापार घाटे को कम करने के लिए लगाए जा रहे हैं, क्योंकि ये देश अमेरिका को ज्यादा सामान बेचते हैं, जबकि अमेरिकी सामान उनके बाजारों में कम बिकता है। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि अगर ये देश जवाबी टैरिफ लगाएंगे, तो अमेरिका अपने टैरिफ को और बढ़ा देगा। साथ ही, ट्रंप ने कहा कि अगर ये देश अमेरिका में अपने कारखाने स्थापित करें, तो उन्हें टैरिफ से छूट दी जा सकती है।
- टैरिफ का उद्देश्य और पृष्ठभूमि
ट्रंप की यह नीति उनकी "अमेरिका फर्स्ट" नीति का हिस्सा है, जिसके तहत वे अमेरिकी अर्थव्यवस्था को मजबूत करना चाहते हैं। उनका मानना है कि कई देश अमेरिका के साथ व्यापार में अनुचित लाभ उठा रहे हैं। 2024 में अमेरिका का कुल व्यापार घाटा 918.4 बिलियन डॉलर था, जिसमें जापान (68.5 बिलियन डॉलर), दक्षिण कोरिया (66 बिलियन डॉलर), और वियतनाम (123.5 बिलियन डॉलर) जैसे देशों का बड़ा योगदान था। म्यांमार के साथ व्यापार घाटा 579.3 मिलियन डॉलर और लाओस के साथ और भी कम था, फिर भी इन देशों पर सबसे ज्यादा टैरिफ लगाया गया।
ट्रंप ने अप्रैल 2025 में "लिबरेशन डे" के रूप में एक बड़े टैरिफ प्लान की घोषणा की थी, जिसमें म्यांमार पर 44% और लाओस पर 48% टैरिफ की बात कही गई थी। हालांकि, जुलाई की घोषणा में इन दरों को 40% तक कम किया गया। ट्रंप ने एक कार्यकारी आदेश (एग्जीक्यूटिव ऑर्डर) के जरिए इन टैरिफ्स को 1 अगस्त तक के लिए स्थगित कर दिया, ताकि इन देशों को अमेरिका के साथ व्यापारिक समझौते करने का समय मिल सके।
ये टैरिफ विभिन्न देशों के निर्यात पर गहरा असर डाल सकते हैं। जापान और दक्षिण कोरिया से अमेरिका को कार, मशीनरी, और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे उत्पाद आते हैं। मलेशिया अमेरिका को इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, कजाकिस्तान कच्चा तेल और धातु मिश्रण, और दक्षिण अफ्रीका कीमती धातुएं निर्यात करता है। म्यांमार से गद्दे और बिस्तर सामग्री, जबकि लाओस से ऑप्टिकल फाइबर, चश्मे, और कपड़े जैसे उत्पाद अमेरिका जाते हैं।
म्यांमार और लाओस जैसे गरीब देशों पर 40% टैरिफ का असर विशेष रूप से गंभीर हो सकता है। म्यांमार हाल ही में एक विनाशकारी भूकंप से उबर रहा है, जिसमें 3,000 से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी, और वहां 2021 के सैन्य तख्तापलट के बाद गृहयुद्ध की स्थिति है। लाओस, जहां प्रति व्यक्ति औसत आय 6 डॉलर प्रतिदिन से कम है, पहले से ही गरीबी की मार झेल रहा है। इन देशों पर इतना ऊंचा टैरिफ उनकी अर्थव्यवस्था को और कमजोर कर सकता है।
इन टैरिफ्स की घोषणा के बाद कई देशों ने चिंता जताई और जवाबी कार्रवाई की बात कही। जापान के प्रधानमंत्री शिगेरु इशिबा ने कहा कि वे अमेरिका के साथ बातचीत करेंगे, लेकिन जवाबी टैरिफ लगाने से बचेंगे। दक्षिण कोरिया, जो इस समय राजनीतिक संकट से जूझ रहा है, ने भी इन टैरिफ्स को अपने लिए नुकसानदायक बताया।
वियतनाम, जिसे पहले 46% टैरिफ का सामना करना पड़ा था, ने अमेरिका के साथ एक समझौता किया, जिसमें उसके निर्यात पर 20% टैरिफ और ट्रांसशिपिंग (किसी तीसरे देश के जरिए माल भेजकर टैरिफ से बचने) पर 40% टैरिफ लगाया गया। इसके बदले वियतनाम ने अमेरिकी सामानों पर टैरिफ हटा दिया।
चीन, जिस पर पहले से 54% टैरिफ लागू है, ने इन टैरिफ्स को "एकतरफा धमकी" बताया और जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी। यूरोपीय संघ (EU) ने कहा कि उसे अभी तक कोई पत्र नहीं मिला है, लेकिन वह 1 अगस्त तक अमेरिका के साथ समझौता करने की कोशिश करेगा।
सोशल मीडिया पर भी इस खबर ने तहलका मचा दिया। X पर @news24tvchannel ने लिखा, "ट्रंप ने जापान-कोरिया समेत 14 देशों पर फोड़ा टैरिफ बम, जानिए किस देश पर कितना टैरिफ लगाया।" @ZeeBusiness ने बताया कि ट्रंप ने भारत के साथ जल्द व्यापारिक समझौते की उम्मीद जताई है।
हालांकि भारत अभी तक इस टैरिफ सूची में शामिल नहीं है, ट्रंप ने कहा कि वे भारत के साथ एक व्यापारिक समझौते के "बेहद करीब" हैं। X पर @Republic_Bharat ने लिखा, "ट्रंप ने इन 14 देशों पर फोड़ा टैरिफ बम, डेडलाइन बढ़ाई; भारत से ट्रेड डील पर बोले- सौदा करने के बेहद करीब।" यह संकेत देता है कि भारत पर टैरिफ का खतरा अभी टला हुआ है, लेकिन भविष्य में इसकी संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता।
भारत और अमेरिका के बीच 2024 में व्यापार घाटा 36.8 बिलियन डॉलर था, जो जापान और दक्षिण कोरिया की तुलना में कम है। फिर भी, भारत को सतर्क रहना होगा, क्योंकि ट्रंप ने पहले भारत को "उच्च टैरिफ वाला देश" कहा था। भारत के निर्यात, जैसे फार्मास्यूटिकल्स, कपड़ा, और आईटी उपकरण, पर टैरिफ का असर पड़ सकता है।
इन टैरिफ्स का वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गहरा असर पड़ सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह टैरिफ वैश्विक व्यापार युद्ध को बढ़ावा दे सकता है। येल विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्री अर्नी टेडेस्की ने न्यूज़वीक को बताया कि ये टैरिफ अमेरिका में कीमतों को एक साल की सामान्य मुद्रास्फीति से ज्यादा बढ़ा सकते हैं और 2025 में आर्थिक विकास को आधा कर सकते हैं।
जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देशों की ऑटो कंपनियों, जैसे टोयोटा, निसान, और होंडा, के शेयरों में 3-7% की गिरावट आई। अमेरिका में स्टील और एल्यूमीनियम पर पहले से 50% टैरिफ लागू है, और अब ये नए टैरिफ आयात को और महंगा करेंगे।
म्यांमार और लाओस जैसे गरीब देशों पर इन टैरिफ्स का असर सबसे ज्यादा होगा। म्यांमार, जो भूकंप और गृहयुद्ध से जूझ रहा है, और लाओस, जहां गरीबी दर 18.3% है, पहले से ही आर्थिक संकट में हैं। इन देशों के कपड़ा, गद्दे, और ऑप्टिकल फाइबर जैसे उद्योग प्रभावित होंगे।
ट्रंप ने इन टैरिफ्स को लागू करने के लिए इंटरनेशनल इमरजेंसी इकनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) का इस्तेमाल किया, लेकिन मई 2025 में एक फेडरल कोर्ट ने इसे असंवैधानिक करार दिया। हालांकि, अपील के दौरान टैरिफ लागू रहेंगे। यह कानूनी विवाद ट्रंप की व्यापार नीति को और जटिल बना सकता है।
डोनाल्ड ट्रंप का 14 देशों पर नए टैरिफ का ऐलान उनकी "अमेरिका फर्स्ट" नीति का हिस्सा है, जिसका मकसद अमेरिकी व्यापार घाटे को कम करना और स्थानीय उद्योगों को बढ़ावा देना है। म्यांमार और लाओस पर 40% टैरिफ सबसे ज्यादा है, जो इन गरीब देशों की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचा सकता है। जापान, दक्षिण कोरिया, और अन्य देशों ने बातचीत की बात कही है, जबकि चीन ने जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी है। भारत अभी इस सूची से बाहर है, लेकिन भविष्य में सतर्क रहना होगा। ये टैरिफ वैश्विक व्यापार युद्ध को बढ़ा सकते हैं और कीमतों में वृद्धि कर सकते हैं। 1 अगस्त 2025 से लागू होने वाले इन टैरिफ्स का असर न केवल इन 14 देशों, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ेगा। यह देखना बाकी है कि ये देश इस चुनौती का सामना कैसे करते हैं और क्या वे अमेरिका के साथ नए व्यापारिक समझौते कर पाते हैं।
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