'देख रहा है विनोद...' पंचायत के बनराकस दुर्गेश कुमार का बिहार चुनाव पर तंज: जिन उम्मीदवारों को वोट दिया, वे सब हार गए। 

अमेजन प्राइम वीडियो की लोकप्रिय वेब सीरीज पंचायत ने दर्शकों के दिलों में एक खास जगह बना ली है। इस सीरीज में बनराकस नामक किरदार ने अपनी शरारती अदा और डायलॉग्स से

Oct 17, 2025 - 12:17
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'देख रहा है विनोद...' पंचायत के बनराकस दुर्गेश कुमार का बिहार चुनाव पर तंज: जिन उम्मीदवारों को वोट दिया, वे सब हार गए। 

अमेजन प्राइम वीडियो की लोकप्रिय वेब सीरीज पंचायत ने दर्शकों के दिलों में एक खास जगह बना ली है। इस सीरीज में बनराकस नामक किरदार ने अपनी शरारती अदा और डायलॉग्स से खूब नाम कमाया। बनराकस का असली नाम भूषण है, जिसे दुर्गेश कुमार निभाते हैं। दुर्गेश बिहार के दरभंगा जिले के रहने वाले हैं। वे नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा के पूर्व छात्र हैं। हाल ही में बिहार विधानसभा चुनाव के बीच दुर्गेश ने एक मजेदार बयान दिया। उन्होंने कहा कि जिन उम्मीदवारों को उन्होंने वोट दिया, वे कभी चुनाव नहीं जीत पाए। यह बात उन्होंने एक साक्षात्कार में कही। दुर्गेश ने हंसते हुए बताया कि उनका वोट एक तरह का अभिशाप बन गया है। सीरीज के फेमस डायलॉग देख रहा है विनोद की तर्ज पर उन्होंने तंज कसा। यह बयान सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। लोग इसे शेयर कर रहे हैं। दुर्गेश की यह टिप्पणी बिहार की राजनीति पर हल्का सा व्यंग्य करती है। लेकिन इसके पीछे उनकी निजी कहानी भी है।

दुर्गेश कुमार का जन्म 1981 में बिहार के दरभंगा में एक साधारण परिवार में हुआ। उनके पिता सरकारी स्कूल में शिक्षक थे। बचपन से ही दुर्गेश को अभिनय का शौक था। लेकिन परिवार ने इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने को कहा। 2001 में वे दिल्ली आए। यहां उन्होंने आईआईटी की तैयारी की। लेकिन सफलता नहीं मिली। फिर उन्होंने थिएटर जॉइन कर लिया। दिल्ली के मंडी हाउस में वे नाटकों में काम करने लगे। 2011 में नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा से ग्रेजुएशन किया। यहां से उन्हें कई बड़े कलाकारों से प्रेरणा मिली। नसीरुद्दीन शाह और इरफान खान जैसे सितारों की कहानियां सुनीं। ग्रेजुएशन के बाद दुर्गेश मुंबई चले गए। यहां संघर्ष की शुरुआत हुई। छोटे-मोटे रोल मिलते। लेकिन स्थिरता न आई। उन्होंने बताया कि नौ साल तक वे वेब सीरीज और फिल्मों में साइड रोल करते रहे। कभी ड्राइवर का किरदार, कभी चपरासी। लेकिन पहचान न बनी।

2014 में इम्तियाज अली की फिल्म हाईवे में उन्हें छोटा रोल मिला। वे आडू नामक किरदार निभाते दिखे। यह भूमिका छोटी थी, लेकिन आलोचना में सराही गई। फिर 2020 में पंचायत सीरीज में बनराकस का रोल आया। पहला सीजन में यह किरदार सिर्फ एक दिन का था। दुर्गेश ने सिर्फ ढाई घंटे शूटिंग की। लेकिन लेखक चंदन कुमार को उनका काम पसंद आया। दूसरे सीजन में बनराकस को ज्यादा स्क्रीन टाइम मिला। यहां उनका डायलॉग देख रहा है विनोद वायरल हो गया। विनोद पंचायत का एक और किरदार है, जिसे अशोक पाठक निभाते हैं। यह डायलॉग मीम बन गया। सोशल मीडिया पर लोग इसे हर मजाक में इस्तेमाल करने लगे। दुर्गेश रातोंरात स्टार बन गए। उन्होंने कहा कि उन्हें खुद हैरानी हुई। लोग बनराकस को इतना प्यार देंगे, यह सोचा न था। लेकिन यह सफलता आसान न थी।

दुर्गेश ने कई मुश्किलों का सामना किया। मुंबई में किराया, खाना और ट्रेन का खर्च चलाना कठिन था। कभी-कभी भूखे सोना पड़ा। डिप्रेशन भी आया। लेकिन थिएटर ने सहारा दिया। वे दिल्ली लौटकर नाटक करते। फिर मुंबई वापस। पंचायत के बाद उन्हें और काम मिले। 2023 में लापता लेडीज फिल्म में डबे जी का रोल किया। यह किरदार छोटा था, लेकिन पंचायत की वजह से लोग पहचान गए। 2024 में दिल बेचारा में भी दिखे। अब पंचायत का चौथा सीजन जून 2025 में रिलीज हुआ। इसमें बनराकस की शरारतें और बढ़ गईं। सीरीज फुलेरा गांव की पंचायत चुनाव पर आधारित है। बनराकस प्रधानी के खिलाफ चुनाव लड़ता है। लेकिन अंत में हार जाता है। यह कहानी बिहार की राजनीति से मिलती-जुलती लगती। दुर्गेश ने कहा कि सीरीज की सफलता से उनका संघर्ष खत्म न हुआ। अभी भी बड़े प्रोजेक्ट्स के लिए कॉल्स कम आते। लेकिन वे खुश हैं।

अब बिहार चुनाव पर उनका बयान चर्चा में है। 16 अक्टूबर 2025 को आज तक को दिए साक्षात्कार में दुर्गेश ने बताया कि वे दरभंगा के रहने वाले हैं। हर चुनाव में वोट डालते हैं। लेकिन जिन उम्मीदवारों को सपोर्ट किया, वे हार गए। उन्होंने हंसकर कहा कि मेरा वोट एक अभिशाप है। देख रहा है विनोद, इस बार भी हारेंगे। यह डायलॉग फैंस को हंसाने लगा। दुर्गेश ने बिहार की राजनीति पर टिप्पणी की। कहा कि राज्य विकास के मोर्चे पर पीछे है। जातिवाद और भ्रष्टाचार हावी हैं। युवा पलायन कर रहे। लेकिन वे आशावादी हैं। बिहार के लोग मेहनती हैं। सही नेतृत्व मिले, तो बदलाव आएगा। दुर्गेश ने बिहार चुनाव 2025 का जिक्र किया। यह चुनाव दो चरणों में हो रहा। पहला चरण 6 नवंबर को। दूसरा 11 नवंबर को। मतगणना 14 नवंबर। एनडीए और महागठबंधन के बीच कांटे की टक्कर।

दुर्गेश का यह बयान बिहार के युवाओं को जोड़ता है। वे कहते हैं कि वोट सोच-समझकर डालें। जाति से ऊपर उठें। विकास चुनें। पंचायत सीरीज भी यही संदेश देती। फुलेरा गांव में पंचायत चुनाव दिखाते हुए यह बताती कि लोकतंत्र में हर आवाज मायने रखती। बनराकस का किरदार व्यंग्यात्मक है। वह सत्ता के पीछे भागता, लेकिन हारता। दुर्गेश ने कहा कि बनराकस हर बिहारी में कहीं न कहीं है। छोटी-मोटी साजिशें। लेकिन अंत में अच्छाई जीतती। सीरीज के डायरेक्टर दीपक कुमार मिश्रा ने दुर्गेश की तारीफ की। कहा कि उनका अभिनय प्राकृतिक है। विनोद का किरदार अशोक पाठक बिहार के सिवान के हैं। दोनों की जोड़ी हिट। मीम्स में वे साथ दिखते।

दुर्गेश की जिंदगी प्रेरणा देती। इंजीनियरिंग छोड़ थिएटर। फिर मुंबई का संघर्ष। पंचायत ने पहचान दी। लेकिन वे जमीन से जुड़े। दरभंगा लौटते रहते। परिवार से मिलते। पिता की याद आती। जो हमेशा सपोर्ट करते। दुर्गेश ने कहा कि बिहार का कल्चर अमीर। मैथिली भाषा में नाटक किए। अब वे बिहारी कलाकारों को प्रोत्साहित करते। युवाओं से कहते कि सपने पूरे करो। असफलता आएगी, लेकिन हार मत मानो। उनका बयान चुनावी माहौल में ताजगी लाया। लोग हंस रहे। लेकिन सोच भी रहे। बिहार बदलने का समय है। दुर्गेश जैसे कलाकार आवाज उठा रहे। पंचायत का असर राजनीति तक पहुंचा। बनराकस का अभिशाप मजाक, लेकिन संदेश गहरा। वोट की ताकत समझें।

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