दीपावली पर योगी सरकार का बड़ा तोहफा: उत्तर प्रदेश के 28 लाख कर्मचारियों और पेंशनरों का महंगाई भत्ता 55% से बढ़ाकर 58% किया। 

उत्तर प्रदेश सरकार ने दीपावली के त्योहारी मौसम में अपने कर्मचारियों और पेंशनरों को एक सुखद उपहार दिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अगुवाई वाली सरकार ने राज्य के सरकारी

Oct 17, 2025 - 12:12
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दीपावली पर योगी सरकार का बड़ा तोहफा: उत्तर प्रदेश के 28 लाख कर्मचारियों और पेंशनरों का महंगाई भत्ता 55% से बढ़ाकर 58% किया। 
दीपावली पर योगी सरकार का बड़ा तोहफा: उत्तर प्रदेश के 28 लाख कर्मचारियों और पेंशनरों का महंगाई भत्ता 55% से बढ़ाकर 58% किया। 

उत्तर प्रदेश सरकार ने दीपावली के त्योहारी मौसम में अपने कर्मचारियों और पेंशनरों को एक सुखद उपहार दिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अगुवाई वाली सरकार ने राज्य के सरकारी कर्मचारियों, पेंशनरों और पारिवारिक पेंशनरों के महंगाई भत्ते और महंगाई राहत में तीन प्रतिशत की वृद्धि की घोषणा की है। अब यह भत्ता 55 प्रतिशत से बढ़ाकर 58 प्रतिशत हो गया है। यह फैसला एक जुलाई 2025 से प्रभावी होगा। इस निर्णय से राज्य के लगभग 28 लाख लाभार्थियों को फायदा होगा। इनमें 16.35 लाख नियमित कर्मचारी, 11.52 लाख पेंशनभोगी और पारिवारिक पेंशनर शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह कदम महंगाई से राहत देने और कर्मचारियों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने के लिए उठाया गया है। सरकार अपने कर्मियों के हितों के प्रति पूर्ण प्रतिबद्ध है। यह घोषणा केंद्र सरकार के हालिया फैसले के अनुरूप है, जहां केंद्रीय कर्मचारियों का महंगाई भत्ता भी तीन प्रतिशत बढ़ाया गया था।

महंगाई भत्ता एक ऐसा अतिरिक्त लाभ है जो कर्मचारियों और पेंशनरों को महंगाई की मार से बचाने के लिए दिया जाता है। यह मूल वेतन का एक निश्चित प्रतिशत होता है। जब उपभोक्ता मूल्य सूचकांक बढ़ता है, तो महंगाई भत्ता भी समायोजित किया जाता है। उत्तर प्रदेश में यह भत्ता हर छह माह में संशोधित होता है। पिछली वृद्धि जनवरी 2025 में हुई थी, जब इसे 50 प्रतिशत से बढ़ाकर 55 प्रतिशत किया गया था। अब जुलाई 2025 से 58 प्रतिशत पर ले जाकर सरकार ने कर्मचारियों को राहत दी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कैबिनेट बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि बढ़ा हुआ भत्ता त्योहारी सीजन से पहले सभी के खातों में जमा कराया जाए। इससे कर्मचारियों की क्रय शक्ति बढ़ेगी और वे दीपावली का बेहतर तरीके से स्वागत कर सकेंगे।

इस वृद्धि से राज्य सरकार पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ेगा। दिसंबर 2025 से हर महीने लगभग 245 करोड़ रुपये का अतिरिक्त व्यय होगा। मार्च 2026 तक कुल 1960 करोड़ रुपये का खर्च आएगा। लेकिन सरकार ने इसे प्राथमिकता दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि कर्मचारी और पेंशनभोगी राज्य के विकास के सिपाही हैं। उनकी समृद्धि ही सरकार की समृद्धि है। यह फैसला न केवल वित्तीय राहत देगा, बल्कि कर्मचारियों का मनोबल भी बढ़ाएगा। विशेष रूप से, सहायता प्राप्त शिक्षण संस्थानों, प्राविधिक शिक्षा संस्थानों, शहरी स्थानीय निकायों के नियमित और पूर्णकालिक कर्मचारियों को भी इसका लाभ मिलेगा। कार्यभारित कर्मचारी, यूजीसी वेतनमान वाले कार्मिक और बोर्ड-कॉर्पोरेशन के कर्मचारी भी शामिल हैं। पेंशनरों के लिए यह महंगाई राहत के रूप में जुड़ेगी।

उत्तर प्रदेश में सरकारी कर्मचारियों की संख्या बड़ी है। राज्य में विभिन्न विभागों में लाखों लोग सेवा दे रहे हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य, पुलिस, सिंचाई और अन्य क्षेत्रों में ये कर्मचारी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। पेंशनर वे हैं जो सेवानिवृत्त हो चुके हैं, लेकिन उनका योगदान याद किया जाता है। पारिवारिक पेंशनर विधवाओं या आश्रितों को मिलती है। इस वृद्धि से न्यूनतम वेतन वाले कर्मचारी को प्रति माह 540 रुपये अतिरिक्त मिलेंगे। यदि मूल वेतन 18,000 रुपये है, तो तीन प्रतिशत वृद्धि से 540 रुपये जुड़ेंगे। उच्च वेतन वालों को इससे अधिक। उदाहरण के लिए, 50,000 रुपये मूल वेतन वाले को 1,500 रुपये अतिरिक्त। पेंशनरों को भी यही लाभ मिलेगा। यह राशि सालाना 6,480 रुपये से 18,000 रुपये तक की बचत करेगी। त्योहारों के समय यह अतिरिक्त आय परिवारों के लिए वरदान साबित होगी।

योगी सरकार ने पिछले वर्षों में भी कर्मचारियों के हित में कई कदम उठाए हैं। 2024 में महंगाई भत्ता पांच प्रतिशत बढ़ाया गया था। इसके अलावा, फिक्स्ड मेडिकल अलाउंस बढ़ाया गया। पेंशनरों के लिए डेटा बेस तैयार किया गया। कोरोना काल में वेतन समय पर देने का वादा निभाया। अब दीपावली पर यह तोहफा कर्मचारियों में उत्साह भर रहा है। कर्मचारी संगठनों ने स्वागत किया। उत्तर प्रदेश कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष ने कहा कि यह फैसला सराहनीय है। लेकिन उन्होंने मांग की कि वेतनमान आयोग की सिफारिशें जल्द लागू हों। पेंशनर एसोसिएशन ने भी आभार जताया। कहा कि बुजुर्गों को महंगाई से लड़ने में मदद मिलेगी। सरकार ने निर्देश दिए हैं कि वेतन बिल संशोधित कर अक्टूबर-नवंबर की पेंशन में ही भुगतान हो। इससे विलंब न हो।

यह घोषणा केंद्र सरकार के फैसले से प्रेरित है। केंद्र ने सितंबर 2025 में केंद्रीय कर्मचारियों का महंगाई भत्ता 53 प्रतिशत से बढ़ाकर 56 प्रतिशत किया। उत्तर प्रदेश ने इसे अपनाया। इससे राज्य और केंद्र के बीच समन्वय दिखता है। महंगाई भत्ता उपभोक्ता मूल्य सूचांक पर आधारित होता है। जुलाई से सितंबर 2025 के आंकड़ों से वृद्धि तय हुई। खुदरा मूल्य सूचकांक में वृद्धि ने इसे जरूरी बनाया। विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने में मदद करेगा। कर्मचारियों की खरीदारी क्षमता बनी रहेगी। अर्थव्यवस्था में मांग बढ़ेगी। त्योहारों पर बाजार चहलेगा। उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में यह प्रभावी होगा।

कर्मचारियों के लिए यह लाभ केवल वित्तीय नहीं। यह मानसिक संतुष्टि भी देता है। महंगाई बढ़ने से सब्जी, दूध, अनाज के दाम ऊंचे हो गए। ईंधन और परिवहन का खर्च भी बढ़ा। तीन प्रतिशत वृद्धि छोटी लगे, लेकिन लाखों परिवारों के लिए महत्वपूर्ण है। एक कर्मचारी ने कहा कि इससे बच्चों की पढ़ाई और घर का खर्च संभव हो पाएगा। पेंशनरों के लिए यह जीवन की आखिरी कमाई को मजबूत करता है। सरकार ने डिजिटल प्लेटफॉर्म से भुगतान सुनिश्चित किया। आधार लिंकिंग से पारदर्शिता आई। अब पेंशन सीधे खाते में।

योगी सरकार का यह फैसला सामाजिक न्याय का प्रतीक है। पिछले सात वर्षों में कई कल्याणकारी योजनाएं चलीं। किसानों को पीएम किसान सम्मान निधि, महिलाओं को मिशन शक्ति। कर्मचारियों के लिए आवास योजना और स्वास्थ्य बीमा। अब महंगाई भत्ता वृद्धि से सभी वर्ग लाभान्वित। विपक्ष ने भी सराहना की। समाजवादी पार्टी के नेता ने कहा कि देर आए दुरुस्त आए। लेकिन सरकार ने इसे अपनी उपलब्धि बताया। कहा कि आर्थिक प्रबंधन से संभव हुआ। राजस्व बढ़ा, व्यय नियंत्रित। जीएसटी और आयकर से आय आई।

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