वाराणसी न्यूज़: पहली बारिश में ही सिल्ट के साथ नालो में बह गया दो करोड़ का टेंडर।

Jun 26, 2024 - 17:10
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वाराणसी न्यूज़: पहली बारिश में ही सिल्ट के साथ नालो में बह गया दो करोड़ का टेंडर।
  • रातभर झमाझम बारिश ने स्मार्ट सिटी की खोली पोल, एक दर्जन स्थानों पर हुवा जलजमाव
  • नालो की सफाई के लिए तोड़े गए स्लैब बारिश में राहगीरों के लिए साबित होंगे जानलेवा

वाराणसी। हर वर्ष जून के महीने में मानसून आ ही जाता है। इस वर्ष गर्मी से परेशान काशी के लोगो को मंगलवार की रात झमाझम हुई बारिश ने राहत दी। वही दूसरी तरफ शहर के कई क्षेत्रों में जलजमाव हो गया। जिसने नगर निगम के नाला सफाई और जलकल के सीवर सफाई साथ ही स्मार्ट सिटी की पोल खोल दी। इन सब बातों की जानकारी होने के बाद भी नगर निगम के अधिकारियो ने चुनाव का हवाला देकर शहर के 437 नालो की सफाई के लिये जून महीने में दो करोड़ का टेंडर कराया।

नालो की सफाई को गति देने के लिए महापौर और नगर आयुक्त अक्सर निरीक्षण कर रहे थे। फिर भी कुछ ही नालो की आधी अधूरी सफाई तक ही नगर निगम की टीम रह गई। जिसके कारण मंगलवार को नगर निगम का दो करोड़ रुपया नालो से निकाली गई सिल्ट के साथ वापस नालो में बह गया। इसी के साथ बनारस को स्मार्ट सिटी बनाने का दावा बरसात ने खारिज कर दिया।

कारण यह है कि मानसून ने मंगलवार की रात भर झमाझम बारिश के साथ दस्तक दे दिया। जबकि नगर निगम अब तक नालो की सफाई नही करा सका। नाला सफाई के लिए नगर निगम में सालाना दो करोड़ रुपये का बजट है। सदन और कार्यकारिणी ने जनवरी में ही संविदा पर कर्मचारियो को रखकर मशीन से नालो की सफाई कराने का निर्णय लिया था। इसके बावजूद अधिकारियो ने मसले को गंभीरता से नही लिया। चुनाव का हवाला देकर पांच जून के बाद टेंडर प्रक्रिया शुरू की गई।

जिसके बाद निगम 30 जून तक सभी नालो की सफाई करा लेने का दावा कर रहा था। जबकि सच यह है कि अभी तक मात्र चालीस प्रतिशत ही नालो की आधी अधूरी सफाई हो सकी है। जहां सफाई हुई भी है तो सिल्ट सड़क पर ही पड़ा रहा। जो कुछ तो धूल बनकर उड़ रहा था और बाकी मंगलवार की रात हुई बारिश से वापस नालो में समा गया। जिससे यह कहा जा सकता है कि पैसे तो लगे ही लेकिन नाले जस का तस रह गए। पहली ही बारिश में शहर के कई इलाकों में जलजमाव देखने को मिला। जिसने जलकल के सीवर सफाई के दावे की भी पोल खोल दी।

शहर में छोटे बड़े कुल 437 नाले है

नगर निगम के रिकॉर्ड में शहर में छोटे बड़े कुल 437 नाले हैं। इसमे सामान्य विभाग के 97 बड़े नाले और स्वास्थ्य विभाग के अधीन 301 नाले हैं। इसके अलावा नवशहरी क्षेत्रों के 39 मध्यम और छोटे नाले भी शामिल हैं। जबकि कई नाले नगर निगम के रिकॉर्ड से गायब हो चुके हैं। जिसके कारण उनकी सफाई के लिए टेंडर नही हुवा। 

जी 20 सम्मेलन के दौरान स्लैब और टाइल्स लगाकर ढक दिए गए थे नाले

वाराणसी में जी 20 सम्मेलन के दौरान स्मार्ट सिटी का दिखावा करने के लिए लाखों रुपये खर्च कर नालो को स्लैब और उसपर टाइल्स लगाकर ढक दिया गया। जिसके कारण नालो की सफाई के लिए कोई जगह नही थी। जिसका नतीजा यह हुवा की निगम अब उसी स्लैब और टाइल्स को नालो की सफाई के लिए लाखों रुपये खर्च कर तोड़वा रहा है।

मलदहिया, महमूरगंज, सिगरा, फातमान रोड, मडुवाडीह आदि क्षेत्रों में नालो से सिल्ट निकालकर सड़क पर ही छोड़ दिया गया था। वही नालो का स्लैब तोड़कर उसी तरह छोड़ दिया गया है। अब बारिश के बाद इन मार्गो पर जलजमाव हुवा तो राहगीरों के लिए नाले जानलेवा साबित होंगे।

85 जलभराव के इलाकों से निकासी के लिए निगम ने बनवाये 28 पंप

नगर निगम को अपनी स्थिति का अंदाजा पहले से ही था। क्योंकि ये हर साल का खेल है। बारिश से पहले नालो की सफाई नही हो पाती है। इसीलिए नगर निगम ने शहर के जलभराव वाले 85 स्थान चिन्हित कर लिया है। इन स्थानों से पानी निकालने के लिए नगर निगम के पास मात्र 28 पंप है।

वही एक राहत टीम भी बनाई गई है। अब यदि एकसाथ इन इलाको में जलभराव हुवा तो अन्य 57 इलाकों से पानी निकालने में कई दिन लग जाएंगे। नगर निगम ने लो लैंड और जलभराव वाले 85 स्थान चिन्हित किया है। इन क्षेत्रों में जलभराव होना तय है। अब सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है Paul बारिश से शहर के क्या हालात होंगे।

धरे रह गए चालीस लाख के दो फासी मशीन

बड़े नालो की सफाई के लिए नगर निगम ने बीस बीस लाख के दो फासी मशीन की खरीद की। यह दीगर बात है कि इनका उपयोग कितना हुवा। फिलहाल नगर निगम कार्यालय के पीछे एक कोने में मशीन पड़ी हुई है। नगर निगम में यह चलन पुराना है की नई गाड़िया खरीदकर उनको फिर कंडम घोषित कर दिया जाता है। इसके बाद फिर नई गाड़िया खरीदी जाती हैं।

नगर निगम के परिवहन विभाग में करोड़ो का घोटाला हुवा इस बात को तत्कालीन नगर आयुक्त गौरांग राठी ने पत्रकार वार्ता बुलाकर स्वीकार किया था। सम्बंधित अधिशासी अभियंता के खिलाफ कार्रवाई के लिए शासन को भी लिखा गया था। ये बात अलग है कि उस अभियन्ता के खिलाफ अभी तक कोई कार्रवाई नही हुई है।

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