Agriculture News: फार्मिंग से अर्निंग तक के संकटमोचक प्रयास।
जैविक खेती, कृषि की क्रान्ति में आया केवल एक शब्द नहीं, बल्कि यह एक बहुत बड़ा विषय है़। परम्पराओं को कायम रखने वाली ....
लेखक परिचय
अरविन्द सुथार पमाना ♦वरिष्ठ कृषि एवं पर्यावरण पत्रकार, अनार एवं बागवानी विशेषज्ञ, कृषि सलाहकार, मोटिवेटर एवं किसानों के मार्गदर्शक।
जैविक खेती, कृषि की क्रान्ति में आया केवल एक शब्द नहीं, बल्कि यह एक बहुत बड़ा विषय है़। परम्पराओं को कायम रखने वाली यह जैविक खेती हर उपभेक्ता तक पहुंचे तो बात ही कुछ और होगी। यह एक ऐसा विषय है जो प्रकृति को समर्पित है। आजकल किसान समूह की समस्या है उपभोक्ता का नहीं मिलना। जिससे उन्हें जैविक कृषि के उत्पाद सस्ती दर पर ही बेचने पड़ते हैं। ऐसे में किसान व सरकार को सांझा रूप से उपभोक्ता तक उत्पाद पहुंचाने में सुगमता लाने हेतु कुछ क्रियाकलाप किए जाने आवश्यक हैं।
गांवों में हो जैविक हाट की व्यवस्था- चार पांच गांवों में जैविक खेती करने वाले कृषक समूह एकत्रित होकर किसी एक स्थान पर जैविक हाट का आयोजन करें या साप्ताहिक जैविक कृषि बाजार लगावें, जिससे अधिक उपयोक्ताओं तक जैविक खेती के उत्पाद पहुंच सकें।
सरकार द्वारा जैविक मॉल या जैविक मार्केट का आयोजन हो- शहरों व छोटे कस्बों में जैविक बाजार खोलने के लिए सरकार को पहल करनी चाहिए ताकि शहर में रहने वाले लोगों को शुद्ध व रसायन रहित अनाज, सब्जी या अन्य उत्पाद निरंतर मिलते रहें। इसके लिए जिला कृषि विभाग को अपने जिले में आने वाले छोटे शहरों का चयन करके जैविक बाजार का आयोजन करना होगा, जिसमें किसानों को निशुल्क स्टॉल लगाने की व्यवस्था हो, साथ ही उन्हीं किसानों को अपनी स्टॉल लगाने का अधिकार हो जिनके पास कृषि विभाग द्वारा प्रदत्त जैविक खेती करने का प्रमाण पत्र हो। ऐसे बाजारों में कपड़ों से लेकर दैनिक दिनचर्या में काम आने वाली प्रत्येक सामग्री की स्टॉल्स होनी चाहिए ताकि उपभोक्ता को एक ही मंच पर सारी आवश्यक वस्तुएं खरीदने के लिए मिल सकें।
महिलाओं को मिले प्राथमिकता- जैविक बाजार में ग्रामीण व शहरी महिलाओं को अपने कृषिगत उत्पाद बेचने के लिए प्राथमिकता मिले। ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं के सशक्तिकरण हेतु यह सुनिश्चित करें कि महिलाएं फल, सब्जी, प्रसंस्करण सामग्री, जैम, जेली, फल रस, ज्यूस, काढा, हरी सब्जियों के सूप आदि बनाकर बेच सकें। ऐसा करने से उपभोक्ताओं को नियत समय पर आवश्यकता सामग्री मिलती रहेगी व ग्रामीण महिलाओं को एक मंच मिल जाएगा। इस हेतु महिला सशक्तिकरण के लिए प्रयासरत संस्थाएं भी कार्य कर सकती हैं।
खादी एवं ग्रामोद्योग के तहत लगने वाले मेलों को जैविक खेती से जोड़ना होगा- खादी एवं ग्रामोद्योग द्वारा आयोजित होने वाले मेलों में जैविक खेती के उत्पादों को प्राथमिकता से उतारना होगा। बड़े शहरों में जैविक खाद्य उत्पाद मेलों का आयोजन नियत समय पर लगातार होना चाहिए। इन मेलों में अनाज, तिलहन, दलहन सहित इनके बाइप्रोडेक्ट बिक्री की व्यवस्था की जानी चाहिए।
बनें किसान उत्पादक कम्पनी- जिसे हम एफपीओ के नाम से जानते हैं। सरकार ने इसका क्रियान्वयन क्रान्ति स्तर पर करने का लक्ष्य रखा है। विभागों से जुड़े सभी कर्मचारी यदि पूर्ण समर्पण के साथ ऐसे कार्यों का धरातलीय क्रियान्वयन करें तो यह निश्चित है कि किसान व उपभोक्ता दोनों को सहुलियत मिल सकती है। एफपीओ को परम्परागत कृषि विकास योजना से जोड़ना चाहिए। हर क्लस्टर की एक कम्पनी बननी चाहिए।
आसान हो लाइसेन्स की प्रक्रिया- फूड सेक्युरिटी लाइसेन्स व जैविक प्रमाणीकरण की प्रक्रिया किसानों के कहे अनुसार अभी भी कठिन है। अपने उत्पाद को मार्केट में उतारने के लिए किसान को समय पर सही जानकारी नहीं मिल पा रही है। और इनकी प्रक्रियाएं उतनी ही जटिल हैं। यहां तक कि ब्लॉक एवं जिला स्तर पर कार्यरत कार्मिकों को इसकी जानकारी ही नहीं है। ऐसे में वह अपने जैविक उत्पाद को उपभोक्ताओं तक नहीं पहुँचा पा रहे हैं। जैविक प्रमाणीकरण परम्परागत कृषि विकास योजना के अन्तर्गत हो, उसी को मान्य समझा जाए। किसान को किसी निजी कम्पनी से अपनी जैविक खेती को प्रमाणित करने की आवश्यकता नहीं पड़े।
गांवों में हो कृषिगत उद्योगों का विकास- जैविक कृषि से प्राप्त होने वाले उत्पादों का निर्माण गांवों में ही होना चाहिए। ताकि कृषि नहीं करने वाले युवाओं को भी रोजगार से जोड़ा जाए। इसमें प्रसंस्करण इकाइयों को प्रोत्साहन मिलना चाहिए, जिससे गांवों में कुटिर उद्योगों का विकास होगा। और इसी से गांवों को हाइटेक बना सकेंगे। गांव की कृषि और गांव के ही उत्पाद दुनिया को खूब लुभाएंगे।
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फार्मिंग के साथ साथ अर्निंग के प्रशिक्षण हो- हर जिले में कार्यरत कृषि विभाग व कृषि विज्ञान केन्द्रों को प्राथमिकता के साथ ऑफ केम्पस प्रशिक्षणों का आयोजन करना चाहिए, इसमें कृषि उपज से छोटे छोटे उत्पादों के निर्माण की ट्रेनिंग की व्यवस्था हो। और इसमें भी क्लस्टर प्रणाली हो। जैविक खेती करने वाले हर क्लस्टर को अलग तरह का प्रशिक्षण दिया जाना होगा।
कृषकों को मिले ऑनलाइन बिक्री की ट्रेनिंग- आज का बहुत ही अग्रिम युग है। ऐसे में किसानों को अपने जैविक खेती के उत्पादों को ऑनलाइन बेचने के लिए कुछ तौर तरीकों की जानकारी व प्रशिक्षण दिया जाए, तो बहुत ही तीव्रता के साथ कृषि उत्पाद उपभोक्ता तक पहुंच सकेंगे।
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