हापुड़ के पिलखुवा में भीषण अग्निकांड का तांडव, 70 से ज्यादा झुग्गियां और कई बड़े गोदाम जलकर हुए राख।
उत्तर प्रदेश के हापुड़ जिले में पिलखुवा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले अर्जुन नगर में सोमवार की सुबह एक ऐसी त्रासदी लेकर आई, जिसने
- सिलेंडरों के धमाकों से दहला अर्जुन नगर इलाका, करोड़ों के नुकसान के बीच दर्जनों परिवार हुए बेघर
- पिलखुवा में आग ने उजाड़े सैकड़ों आशियाने, ट्रांसपोर्ट ऑफिस और फैक्ट्रियों तक पहुँची लपटें, राहत कार्य जारी
उत्तर प्रदेश के हापुड़ जिले में पिलखुवा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले अर्जुन नगर में सोमवार की सुबह एक ऐसी त्रासदी लेकर आई, जिसने सैकड़ों लोगों के जीवन भर की जमा-पूंजी को चंद घंटों में स्वाहा कर दिया। सुबह करीब 8:30 बजे लगी इस भीषण आग ने न केवल झुग्गी-झोपड़ियों को राख के ढेर में तब्दील किया, बल्कि पास स्थित औद्योगिक इकाइयों और ट्रांसपोर्ट गोदामों को भी अपनी चपेट में ले लिया। आग की भयावहता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि आसमान में काले धुएं का गुबार कई किलोमीटर दूर से दिखाई दे रहा था और स्थानीय लोग अपनी जान बचाने के लिए बदहवास होकर सुरक्षित स्थानों की ओर भाग रहे थे। हापुड़ जिले के पिलखुवा स्थित अर्जुन नगर इलाके में सोमवार की सुबह आम दिनों की तरह ही शुरू हुई थी, लेकिन अचानक एक झुग्गी से उठी चिंगारी ने देखते ही देखते विकराल रूप धारण कर लिया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, आग इतनी तेजी से फैली कि लोगों को अपने घरों से सामान निकालने तक का मौका नहीं मिला। इस क्षेत्र में घनी आबादी और झुग्गियों के बीच रखे ज्वलनशील पदार्थों ने आग में घी का काम किया। तेज हवाओं के कारण लपटें एक झोपड़ी से दूसरी झोपड़ी तक पहुँचती गईं और कुछ ही समय में पूरा इलाका आग के दरिया में बदल गया। स्थानीय निवासियों ने आग बुझाने का प्रारंभिक प्रयास किया, लेकिन संसाधनों की कमी और आग की भीषणता के आगे उनके प्रयास नाकाफी साबित हुए।
इस हादसे में सबसे अधिक तबाही झुग्गी-झोपड़ी वाले क्षेत्र में हुई, जहाँ करीब 70 से अधिक घर पूरी तरह जलकर खाक हो गए। इन झुग्गियों में रहने वाले अधिकांश लोग दिहाड़ी मजदूर और छोटे कामगार हैं, जिनके पास रहने के लिए केवल यही एकमात्र सहारा था। आग की चपेट में आने से लोगों के खाने-पीने का राशन, कपड़े, बिस्तर और मेहनत से बचाकर रखे गए पैसे व जरूरी दस्तावेज जलकर नष्ट हो गए। अग्निकांड के दौरान झुग्गियों में रखे छोटे और बड़े रसोई गैस सिलेंडरों के फटने से स्थिति और भी भयावह हो गई। सिलेंडरों के धमाकों की आवाज से पूरे क्षेत्र में दहशत फैल गई और लोग अपने बच्चों व बुजुर्गों को लेकर सुरक्षित स्थानों की ओर दौड़ पड़े। झुग्गियों को चपेट में लेने के बाद आग ने पास में स्थित व्यावसायिक और औद्योगिक इकाइयों का रुख किया। बताया जा रहा है कि आग की लपटें इतनी ऊंची थीं कि उन्होंने पास स्थित ट्रांसपोर्ट गोदामों, एक जींस बनाने वाली फैक्ट्री और अन्य औद्योगिक इकाइयों को भी अपनी जद में ले लिया। गायत्री लॉजिस्टिक्स ट्रांसपोर्ट और यूनाइटेड ट्रांसपोर्ट जैसे संस्थानों के कार्यालयों और गोदामों में रखा कीमती सामान आग की भेंट चढ़ गया। फैक्ट्री मालिकों के अनुसार, गोदामों में भारी मात्रा में तैयार माल और कच्चा माल रखा हुआ था, जो पूरी तरह जल गया है। इस व्यावसायिक नुकसान के कारण करोड़ों रुपये की संपत्ति का नुकसान होने का अनुमान है, जिससे कई व्यापारियों की कमर टूट गई है। प्रारंभिक आकलन के अनुसार, इस अग्निकांड में 1 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति का नुकसान हुआ है। गोदाम मालिक अशोक कुमार ने बताया कि उनके दो भंडारण केंद्रों में रखी करीब 1,050 गांठें माल पूरी तरह जल गया है। इसके अलावा, दर्जनों परिवारों के पास अब सिर छुपाने के लिए छत भी नहीं बची है, जिससे मानवीय संकट की स्थिति उत्पन्न हो गई है।
हादसे की सूचना मिलते ही दमकल विभाग की टीमें हरकत में आईं और हापुड़, मोदीनगर व आसपास के अन्य केंद्रों से करीब आठ दमकल गाड़ियां मौके पर पहुँचीं। दमकलकर्मियों को आग बुझाने में भारी मशक्कत करनी पड़ी क्योंकि गलियां संकरी थीं और धुएं के कारण दृश्यता शून्य के बराबर थी। दमकल विभाग के साथ-साथ पुलिस बल और स्थानीय नागरिकों ने भी राहत और बचाव कार्य में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। आग की तीव्रता को देखते हुए प्रशासन ने भारी मशीनों और बुलडोजर का भी सहारा लिया ताकि जलते हुए मलबे को हटाया जा सके और आग को आगे बढ़ने से रोका जा सके। करीब चार से पांच घंटे की कड़ी मेहनत के बाद आग पर पूरी तरह काबू पाया जा सका, जिसके बाद कूलिंग ऑपरेशन शुरू किया गया। राहत की बात यह रही कि इस भीषण हादसे में किसी भी व्यक्ति की जान नहीं गई। समय रहते लोगों को झुग्गियों से बाहर निकाल लिया गया था, जिससे एक बड़ा मानवीय हादसा टल गया। हालांकि, जो लोग बेघर हुए हैं, उनकी स्थिति बेहद दयनीय है। कई परिवारों ने बताया कि उनके पास अब पहनने के लिए केवल वही कपड़े बचे हैं जो उन्होंने पहन रखे थे। जिला प्रशासन की टीमें अब प्रभावित परिवारों के पुनर्वास और उन्हें तत्काल राहत सामग्री उपलब्ध कराने में जुट गई हैं। राजस्व विभाग के अधिकारी मौके पर पहुँचकर नुकसान का जायजा ले रहे हैं ताकि प्रभावितों को नियमानुसार मुआवजा प्रदान किया जा सके।
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