Himachal News: हिरासत में हुई थी शख्स की मौत, पूर्व आईजी समेत 8 को मिली सजा।

हिमाचल प्रदेश की अदालत ने एक शख्स की मौत के मामले में आठ लोगों को दोषी माना है जिसमें एक पूर्व आईजी और 8 पुलिसकर्मी शामिल है...

Jan 19, 2025 - 19:05
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Himachal News: हिरासत में हुई थी शख्स की मौत, पूर्व आईजी समेत 8 को मिली सजा।

Himachal News: हिमाचल प्रदेश की अदालत ने एक शख्स की मौत के मामले में आठ लोगों को दोषी माना है जिसमें एक पूर्व आईजी और 8 पुलिसकर्मी शामिल है। एक अधिकारी और शिमला के पूर्व एसपी को बरी कर दिया गया।

  • 8 साल पहले शख्स की हुई थी मौत

शिमला: 2017 में कोटखाई क्षेत्र में 16 साल की नाबालिग से गैंगरेप के आरोपी की पुलिस हिरासत में हुई मौत के मामले में चंडीगढ़ की सीबीआई कोर्ट ने फैसला सुनाया है। अदालत ने तत्कालीन आईजी जाहुर हैदर जैदी सहित 8 पुलिसकर्मियों को दोषी ठहराया है, जबकि एक अन्य अधिकारी और शिमला के पूर्व एसपी नेगी को बरी कर दिया गया है।

दोषी ठहराए गए पुलिसकर्मियों में पूर्व आईजी जाहुर जैदी, मनोज जोशी, राजिंदर सिंह, दीप चंद शर्मा, मोहन लाल, सूरत सिंह, रफी मोहम्मद और रंजीत स्टेटा शामिल हैं। यह घटना 4 जुलाई 2017 को शुरू हुई थी, जब 16 वर्षीय लड़की कोटखाई क्षेत्र से गायब हो गई थी। 6 जुलाई को उसकी लाश हलैला जंगल में मिली थी, और पोस्टमार्टम में गैंगरेप की पुष्टि हुई थी। इस मामले में आरोपी की पुलिस हिरासत में मौत हो गई थी। अब अदालत ने इन पुलिसकर्मियों को दोषी ठहराया है और मामले में सजा सुनाने की तिथि 27 जनवरी तय की है।

  • सीबीआई को हिमाचल प्रदेश की सरकार ने सौंपी थी जांच

राज्य में भारी जनाक्रोश के बीच, तत्कालीन राज्य सरकार ने जैदी की अध्यक्षता में एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया था। एसआईटी ने छह आरोपियों को गिरफ्तार किया, जिनमें से एक आरोपी, सूरज, की पुलिस हिरासत में मौत हो गई। पुलिस अधिकारियों ने सूरज की हत्या के लिए राजिंदर, जो सामूहिक बलात्कार मामले का एक आरोपी था, के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की। 

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हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने मामले की गंभीरता को देखते हुए दोनों मामलों की जांच सीबीआई को सौंप दी। इसके बाद, सीबीआई ने हिरासत में हुई मौत के सिलसिले में जैदी, डीसीपी जोशी और अन्य पुलिसकर्मियों को गिरफ्तार किया। सीबीआई ने आपराधिक साजिश, हत्या, झूठे साक्ष्य गढ़ने, सबूत नष्ट करने, कबूलनामा लेने के लिए पुलिस हिरासत में यातना देने, और झूठे रिकॉर्ड तैयार करने जैसे गंभीर आरोपों पर गहन जांच की और आरोपी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया। 

इस मामले की सुनवाई में बाद में शीर्ष अदालत ने मई 2019 में हिरासत में हुई मौत से संबंधित मामले को शिमला से चंडीगढ़ स्थानांतरित कर दिया, ताकि निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से सुनवाई की जा सके। वही 8 साल बाद फैसला आया है जिसमें जिसमे 8 पुलिसकर्मियों को दोषी पाया गया।

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