कृषि विशेष : बदलते मौसम में आम की फसल को खर्रा, दहिया और कीटों से बचाएं- कृष्ण मोहन चौधरी
भुनगा और थ्रिप्स खतरनाक कीट हैं जो फसल को भारी नुकसान पहुंचाते हैं। जब प्रति बौर डंठल या पत्ती पर 10-12 कीट दिखें तो नीला या पीला चिपचिपा जाल 40-50 प्रति हेक्टेयर लटका
लखनऊ। मौसम के बदलाव से आम के बागों में कीट और रोगों का खतरा बढ़ जाता है। औद्यानिक प्रयोग एवं प्रशिक्षण केंद्र मलिहाबाद के मुख्य उद्यान विशेषज्ञ कृष्ण मोहन चौधरी ने बताया कि फूल आने से फल लगने तक बाग का वैज्ञानिक प्रबंधन जरूरी है। मार्च में बौर लगते हैं और छोटे फल बनते हैं, जिससे कई कीट-रोग बढ़ सकते हैं। पलपट्टी क्षेत्र में हल्की बारिश और बादल छाए रहने से नमी 50 से 60 प्रतिशत तक है। इससे पछेती किस्मों में पाउडरी मिल्ड्यू यानी खर्रा या दहिया रोग का प्रकोप बढ़ सकता है। गुझिया कीट भी सक्रिय हो जाते हैं। साथ ही भुनगा और थ्रिप्स (रुजी) कीट का हमला हो सकता है।
भुनगा और थ्रिप्स खतरनाक कीट हैं जो फसल को भारी नुकसान पहुंचाते हैं। जब प्रति बौर डंठल या पत्ती पर 10-12 कीट दिखें तो नीला या पीला चिपचिपा जाल 40-50 प्रति हेक्टेयर लटकाएं। रासायनिक नियंत्रण के लिए इमिडाक्लोरोप्रिड 17.8 प्रतिशत एसएल या थियाक्लोप्रिड 21.7 प्रतिशत एससी की 0.5 मिली प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें। खर्रा रोग कवक से होता है जो उत्पादन घटाता है। अगर घुलनशील गंधक 2 ग्राम प्रति लीटर छिड़क चुके हैं या नहीं तो रोग दिखने पर हेक्साकोनाजोल या प्रोपीकोनाजोल 1 मिली प्रति लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें। तापमान 35 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा होने पर रोग की तीव्रता कम हो जाती है।
टिकोले (छोटे फल) गिरने से रोकने के लिए प्लानोफिक्स (NAA) 1 मिली प्रति 4 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें और नमी बनाए रखें। गुझिया कीट के लिए अगर अल्काथीन पट्टी नहीं लगाई तो इमिडाक्लोरोप्रिड या थियाक्लोप्रिड 0.5 मिली प्रति लीटर पानी में निरमा पाउडर या शैंपू 1 ग्राम प्रति लीटर मिलाकर केंद्र से छिड़काव करें।
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