Trending News: मैनपुरी में फर्जी आर्मी ट्रेनिंग सेंटर का भंडाफोड़- 600 युवकों से करोड़ों की ठगी, तेलंगाना पुलिस की जांच शुरू। 

भारतीय पुलिस प्रोटेक्शन फोर्स’ और ‘हिंदुस्तान रक्षा धर्म’ के नाम पर चल रहे फर्जी केंद्रों ने युवाओं को बनाया निशाना...

Jun 4, 2025 - 14:56
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Trending News: मैनपुरी में फर्जी आर्मी ट्रेनिंग सेंटर का भंडाफोड़- 600 युवकों से करोड़ों की ठगी, तेलंगाना पुलिस की जांच शुरू। 

लखनऊ: उत्तर प्रदेश के मैनपुरी जिले में एक सनसनीखेज ठगी का मामला सामने आया है, जहां फर्जी आर्मी ट्रेनिंग सेंटरों के जरिए करीब 600 युवकों से करोड़ों रुपये की ठगी की गई। ये फर्जी केंद्र ‘भारतीय पुलिस प्रोटेक्शन फोर्स’ और ‘हिंदुस्तान रक्षा धर्म’ के नाम से संचालित किए जा रहे थे। तेलंगाना के कुछ युवकों की शिकायत के बाद इस घोटाले का खुलासा हुआ, जिसके बाद मैनपुरी पुलिस और तेलंगाना पुलिस ने संयुक्त रूप से जांच शुरू कर दी है। आरोप है कि सेंटर संचालकों ने प्रत्येक युवक से 3 से 5 लाख रुपये वसूल किए, और उन्हें भारतीय सेना में नौकरी दिलाने का झांसा दिया। यह मामला न केवल मैनपुरी, बल्कि कई अन्य राज्यों में भी फैले होने की आशंका जताई जा रही है।

3 जून 2025 को तेलंगाना के छह युवकों ने मैनपुरी पुलिस को सूचना दी कि उन्हें ‘भारतीय पुलिस प्रोटेक्शन फोर्स’ और ‘हिंदुस्तान रक्षा धर्म’ नामक ट्रेनिंग सेंटरों द्वारा ठगा गया है। इन युवकों ने बताया कि सेंटर संचालकों ने उनसे सेना में भर्ती का वादा करते हुए लाखों रुपये वसूल किए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, ये सेंटर मैनपुरी के ग्रामीण इलाकों में संचालित हो रहे थे, जहां युवाओं को सैन्य प्रशिक्षण के नाम पर फर्जी दस्तावेज और पहचान पत्र जारी किए गए। शिकायत मिलने के बाद मैनपुरी पुलिस ने तत्काल कार्रवाई शुरू की और तेलंगाना पुलिस के साथ समन्वय स्थापित किया।

X पर वायरल पोस्ट्स के अनुसार, सेंटर संचालकों ने युवाओं को सेना की वर्दी, फर्जी नियुक्ति पत्र, और प्रशिक्षण के लिए कैंपिंग उपकरण प्रदान किए, जो दिल्ली और देहरादून के स्थानीय बाजारों से खरीदे गए थे। ये केंद्र इतने व्यवस्थित थे कि कई युवकों को इनकी सत्यता पर कोई संदेह नहीं हुआ।

  • ठगी का तरीका

जांच में पता चला कि सेंटर संचालक युवाओं को भर्ती रैलियों और कोचिंग सेंटरों के जरिए निशाना बनाते थे। वे विशेष रूप से आर्थिक रूप से कमजोर और सेना में नौकरी की चाह रखने वाले युवाओं को लुभाते थे। ठगों का तरीका बेहद सुनियोजित था:

लालच: युवाओं को सेना और सैन्य इंजीनियरिंग सेवाओं (MES) में नौकरी का वादा किया जाता था।
फर्जी दस्तावेज: प्रत्येक उम्मीदवार को फर्जी पहचान पत्र और नियुक्ति पत्र जारी किए जाते थे, जिनमें वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों के नाम का दुरुपयोग किया गया।
प्रशिक्षण शिविर: मैनपुरी के ग्रामीण इलाकों में फर्जी प्रशिक्षण शिविर आयोजित किए गए, जहां सैन्य वर्दी में ठग प्रशिक्षण देते थे।
वित्तीय शोषण: प्रत्येक युवक से 3 से 5 लाख रुपये वसूल किए गए, जिसके बदले उन्हें फर्जी मेडिकल टेस्ट और प्रशिक्षण सत्रों में शामिल किया गया।

पुलिस का अनुमान है कि इस घोटाले में करीब 3 से 4 करोड़ रुपये की ठगी की गई, और इसमें मैनपुरी के अलावा तेलंगाना, कर्नाटक, बिहार, और उत्तर प्रदेश के अन्य हिस्सों के युवा शामिल हैं।

मैनपुरी पुलिस ने तेलंगाना पुलिस के सहयोग से सेंटर संचालकों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। मैनपुरी के पुलिस अधीक्षक (SP) विनोद कुमार ने बताया कि प्रारंभिक जांच में दो मुख्य संचालकों की पहचान की गई है, जिनके नाम अभी गोपनीय रखे गए हैं। पुलिस ने फर्जी सेंटरों से दस्तावेज, सैन्य वर्दी, और अन्य सामग्री जब्त की है। इसके अलावा, डिजिटल लेनदेन और बैंक खातों की जांच के लिए साइबर क्राइम सेल की मदद ली जा रही है।

तेलंगाना पुलिस ने भी इस मामले को गंभीरता से लिया है, क्योंकि शिकायतकर्ता उनके राज्य से हैं। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि सेंटर संचालकों के तार कई राज्यों में फैले हो सकते हैं, और इसकी जांच के लिए विशेष कार्य बल (STF) का गठन किया गया है।

यह कोई पहला मामला नहीं है जब फर्जी भर्ती केंद्रों के जरिए युवाओं को ठगा गया हो। सितंबर 2024 में, महाराष्ट्र के अहमदनगर में सत्यजीत बारथ कांबले नामक एक व्यक्ति को फर्जी आर्मी मेजर बनकर ठगी करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। कांबले ने देहरादून और औरंगाबाद में फर्जी प्रशिक्षण शिविर चलाए थे, और करीब 300 युवाओं से 3-4 करोड़ रुपये की ठगी की थी।

इसी तरह, 2021 में पुणे पुलिस और मिलिट्री इंटेलिजेंस ने एक फर्जी भर्ती रैकेट का भंडाफोड़ किया था, जिसमें फर्जी वेब पोर्टल और प्रशिक्षण शिविरों का इस्तेमाल किया गया था। इन मामलों से स्पष्ट है कि ठग देशभर में एक सुनियोजित नेटवर्क के जरिए युवाओं को निशाना बना रहे हैं।

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इस घोटाले ने न केवल युवाओं के सपनों को चकनाचूर किया, बल्कि उनके परिवारों पर भी गहरा आर्थिक और भावनात्मक प्रभाव डाला है। तेलंगाना के एक शिकायतकर्ता ने बताया कि उसने अपनी जमीन बेचकर 4 लाख रुपये सेंटर को दिए थे, और अब वह कर्ज में डूब गया है। ऐसे कई युवक हैं, जो आर्थिक रूप से कमजोर पृष्ठभूमि से आते हैं और सरकारी नौकरी की उम्मीद में अपनी जमा-पूंजी खो चुके हैं।

सामाजिक कार्यकर्ता और सैन्य विशेषज्ञ कर्नल (रिटायर्ड) ए.एस. वर्मा ने कहा, “ऐसे ठग समाज के लिए खतरा हैं, क्योंकि ये युवाओं की भावनाओं और विश्वास का शोषण करते हैं। सरकार को भर्ती प्रक्रिया को और पारदर्शी बनाने के साथ-साथ जागरूकता अभियान चलाने चाहिए।”

इस घटना ने सैन्य भर्ती प्रक्रिया में सुधार की आवश्यकता को रेखांकित किया है। विशेषज्ञों का सुझाव है कि बायोमेट्रिक सत्यापन और डिजिटल निगरानी जैसी तकनीकों का उपयोग बढ़ाया जाए। उत्तर प्रदेश पुलिस ने पहले भी फर्जी खबरों और ठगी के खिलाफ ‘डिजिटल आर्मी’ जैसी पहल शुरू की थी, और अब इस मामले में भी सख्त कार्रवाई की बात कही जा रही है।

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