नाई की दुकान से चल रहा था देश विरोधी नेटवर्क, क्यूआर कोड के जरिए रची थी साजिश, UP ATS ने 4 को दबोचा।

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में आतंकवाद निरोधी दस्ते (ATS) ने एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए पाकिस्तान से संचालित हो

By INA News Desk
Apr 4, 2026 - 15:05
71 Views
नाई की दुकान से चल रहा था देश विरोधी नेटवर्क, क्यूआर कोड के जरिए रची थी साजिश, UP ATS ने 4 को दबोचा।
नाई की दुकान से चल रहा था देश विरोधी नेटवर्क, क्यूआर कोड के जरिए रची थी साजिश, UP ATS ने 4 को दबोचा।
Advertisement
Advertisement
  • लखनऊ में यूपी एटीएस की बड़ी कार्रवाई, पाकिस्तान से जुड़े 'सबोटैज' मॉड्यूल का भंडाफोड़, 4 संदिग्ध गिरफ्तार
  • रेलवे और सार्वजनिक संपत्तियों को दहलाने की थी साजिश, सोशल मीडिया के जरिए सीमा पार बैठे हैंडलर्स के संपर्क में थे आरोपी

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में आतंकवाद निरोधी दस्ते (ATS) ने एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए पाकिस्तान से संचालित हो रहे एक खतरनाक आतंकी मॉड्यूल का पर्दाफाश किया है। शुक्रवार, 3 अप्रैल 2026 को एटीएस ने लखनऊ से चार संदिग्धों को गिरफ्तार किया, जो कथित तौर पर सीमा पार बैठे अपने आकाओं के निर्देश पर राज्य में सार्वजनिक व्यवस्था को बिगाड़ने और महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने की फिराक में थे। जांच में यह तथ्य सामने आया है कि यह समूह 'सबोटैज' (तोड़फोड़) और जासूसी की गतिविधियों में लिप्त था। पकड़े गए आरोपियों में साकिब उर्फ जावेद (25) और अरबाज (20) मेरठ के रहने वाले हैं, जबकि विकास गहलोत उर्फ रौनक (27) और लोकेश उर्फ पप्पू पंडित (19) गौतमबुद्ध नगर के निवासी हैं। एटीएस के अनुसार, यह मॉड्यूल मुख्य रूप से रेलवे सिग्नल बॉक्स, गैस सिलेंडर ढोने वाले वाहनों और अन्य सार्वजनिक संपत्तियों में आगजनी कर दहशत फैलाने का काम सौंपा गया था।

एटीएस की विस्तृत जांच में यह जानकारी प्राप्त हुई है कि इस गिरोह का मास्टरमाइंड साकिब उर्फ जावेद है, जो पेशे से एक नाई है। साकिब अपनी दुकान की आड़ में इस नेटवर्क को संचालित कर रहा था और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स जैसे टेलीग्राम, सिग्नल और इंस्टाग्राम के जरिए पाकिस्तानी हैंडलर्स के लगातार संपर्क में था। ये हैंडलर्स विदेशी नंबरों का उपयोग कर रहे थे और इन्होंने ही इन संदिग्धों को संवेदनशील स्थानों की 'गूगल लोकेशन' साझा की थी। इन लोकेशन के आधार पर आरोपी रेकी करते थे और वहां की वीडियो व तस्वीरें वापस सीमा पार भेजते थे। एटीएस ने यह भी बताया कि पकड़े जाने से पहले यह समूह मेरठ के खरखौदा रेलवे स्टेशन के पास एक रेलवे सिग्नल बॉक्स में आग लगाने की बड़ी योजना बना चुका था, जिसे समय रहते विफल कर दिया गया।

  • डिजिटल पेमेंट और कट्टरपंथ का खतरनाक गठजोड़

इस मॉड्यूल की कार्यप्रणाली काफी आधुनिक और गुप्त थी। आरोपियों को प्रत्येक कार्य (Task) के बदले क्यूआर कोड (QR Code) आधारित यूपीआई ट्रांजैक्शन के माध्यम से भुगतान किया जाता था। पाकिस्तानी हैंडलर्स ने इन्हें कट्टरपंथी बनाने के लिए सोशल मीडिया पर भड़काऊ और सांप्रदायिक रूप से संवेदनशील संदेशों का उपयोग किया। एटीएस को इनके पास से सात स्मार्टफोन, 24 भड़काऊ पैम्फलेट और ज्वलनशील तरल का एक कैन बरामद हुआ है।

पकड़े गए संदिग्धों ने पूछताछ में स्वीकार किया है कि उन्होंने पहले भी कुछ छोटी आगजनी की घटनाओं को अंजाम दिया था और उनके वीडियो बनाकर अपने पाकिस्तानी आकाओं को भेजे थे ताकि वे अपनी 'क्षमता' साबित कर सकें। इनका मुख्य उद्देश्य किसी बड़े आतंकवादी हमले के बजाय ऐसी छोटी-छोटी विध्वंसक घटनाओं को अंजाम देना था, जिससे जनता में भय का माहौल पैदा हो और सरकारी तंत्र को अस्थिर किया जा सके। एटीएस की टीम ने इन आरोपियों को उस समय दबोचा जब वे अपनी अगली बड़ी वारदात को अंजाम देने के लिए मेरठ में इकट्ठा होने वाले थे। इनके पास से बरामद मोबाइल फोन्स में कई संवेदनशील स्थानों के मैप और वीडियो पाए गए हैं, जिनकी अब गहनता से फॉरेंसिक जांच की जा रही है।

लखनऊ स्थित एटीएस थाने में इस संबंध में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 148 (दंगा भड़काने का प्रयास) और 152 (देश की संप्रभुता के विरुद्ध कृत्य) के साथ-साथ सार्वजनिक संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम, 1967 की सुसंगत धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है। अधिकारियों का मानना है कि यह मॉड्यूल केवल उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं था, बल्कि इसके तार अन्य राज्यों और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क से भी जुड़े हो सकते हैं। एटीएस अब उन बैंक खातों और यूपीआई आईडी की पड़ताल कर रही है जिनसे आरोपियों को फंड ट्रांसफर किया गया था। जांच का एक मुख्य पहलू यह भी है कि पाकिस्तान में बैठे इन हैंडलर्स का वास्तविक हुलिया और पहचान क्या है, जो भारतीय युवाओं को पैसों और कट्टरपंथ के लालच में देशद्रोही गतिविधियों की ओर धकेल रहे हैं।

यह कार्यवाही उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा आतंकवाद के विरुद्ध चलाए जा रहे व्यापक अभियान का हिस्सा है। पिछले कुछ हफ्तों में एटीएस ने कई अन्य ऑनलाइन मॉड्यूल और संदिग्धों को भी पकड़ा है। हाल ही में सहारनपुर और मुरादाबाद क्षेत्र से भी एक दंत चिकित्सा (BDS) के छात्र को आईएसआईएस (ISIS) के ऑनलाइन मॉड्यूल से जुड़े होने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। इन निरंतर गिरफ्तारियों से यह स्पष्ट होता है कि सुरक्षा एजेंसियां अब 'डिजिटल फुटप्रिंट्स' के आधार पर संदिग्धों को ट्रैक करने में काफी सक्षम हो गई हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एटीएस की इस सफलता की सराहना करते हुए कहा है कि प्रदेश की सुरक्षा से खिलवाड़ करने वाले किसी भी तत्व को बख्शा नहीं जाएगा।

वर्तमान में, लखनऊ एटीएस मुख्यालय में इन चारों आरोपियों से सुरक्षा एजेंसियों की एक संयुक्त टीम पूछताछ कर रही है। इसमें इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) और अन्य खुफिया एजेंसियां भी शामिल हैं। पूछताछ का उद्देश्य यह पता लगाना है कि क्या इनके समूह में और भी सदस्य शामिल हैं जो अभी गिरफ्त से बाहर हैं। रेलवे संपत्तियों को निशाना बनाने की इनकी योजना ने परिवहन विभाग की भी चिंता बढ़ा दी है, जिसके बाद महत्वपूर्ण रेलवे स्टेशनों और ट्रैक सिग्नलिंग पॉइंट्स पर सुरक्षा व्यवस्था को पहले से अधिक कड़ा कर दिया गया है। पुलिस ने आम जनता से भी अपील की है कि किसी भी संदिग्ध गतिविधि या लावारिस वस्तु दिखने पर तुरंत आपातकालीन नंबरों पर सूचित करें।

Also Read- सीबीआई का बड़ा एक्शन: डिप्टी कमिश्नर को सीबीआई ने ट्रैप लगाकर4 लाख रुपये की रिश्वत लेते दबोचा।

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow

Advertisement
Advertisement