भीषण भूकंप के कहर से ढह गए मकान, 8 लोगों की दर्दनाक मौत से पसरा मातम, दिल्ली-एनसीआर में...।
अफगानिस्तान के हिंदू कुश क्षेत्र में शुक्रवार की रात आए 5.9 तीव्रता के शक्तिशाली भूकंप ने दक्षिण एशिया के एक बड़े हिस्से को दहला दिया है।
- भारत और पाकिस्तान तक महसूस किए गए तेज झटके, दिल्ली-एनसीआर में आधी रात को सड़कों पर निकले लोग, दहशत का माहौल
- 177 किलोमीटर गहराई में था भूकंप का केंद्र, झटकों के बाद काबुल में रेस्क्यू ऑपरेशन तेज, मलबे में दबे हो सकते हैं कई और लोग
अफगानिस्तान के हिंदू कुश क्षेत्र में शुक्रवार की रात आए 5.9 तीव्रता के शक्तिशाली भूकंप ने दक्षिण एशिया के एक बड़े हिस्से को दहला दिया है। भूकंप का असर इतना व्यापक था कि इसके झटके न केवल अफगानिस्तान के सुदूर इलाकों में, बल्कि भारत की राजधानी दिल्ली और पाकिस्तान के इस्लामाबाद तक महसूस किए गए। काबुल से मिल रही शुरुआती रिपोर्ट्स के अनुसार, इस प्राकृतिक आपदा ने राजधानी में भारी तबाही मचाई है, जहाँ एक पुराने रिहायशी मकान के ढह जाने से एक ही परिवार के आठ सदस्यों की मौत हो गई है। मरने वालों में महिलाएं और बच्चे भी शामिल बताए जा रहे हैं। भूकंप के बाद स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन टीमों ने प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिया है, ताकि मलबे में दबे अन्य लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा सके।
भूकंप का केंद्र अफगानिस्तान के हिंदू कुश पर्वतमाला के भीतर जोर्म (Jorm) के पास स्थित था। जर्मन रिसर्च सेंटर फॉर जियोसाइंसेस (GFZ) के अनुसार, भूकंप की गहराई जमीन से करीब 177 किलोमीटर नीचे थी। इतनी अधिक गहराई पर केंद्र होने के बावजूद, भूकंप की तीव्रता इतनी अधिक थी कि इसने सैकड़ों किलोमीटर दूर स्थित शहरों की इमारतों को हिला कर रख दिया। काबुल के बाहरी इलाकों में कच्ची और पुरानी इमारतों को सबसे ज्यादा नुकसान पहुँचा है। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने पुष्टि की है कि काबुल में जिस घर के ढहने से आठ लोगों की जान गई, वहां एक बच्चा गंभीर रूप से घायल अवस्था में मिला है जिसे अस्पताल में भर्ती कराया गया है। प्रशासन ने पूरे देश में स्वास्थ्य इकाइयों को हाई अलर्ट पर रहने के निर्देश दिए हैं।
भूकंप के प्रति संवेदनशील है हिंदू कुश
हिंदू कुश का यह क्षेत्र दुनिया के सबसे सक्रिय भूकंपीय क्षेत्रों में से एक माना जाता है। यह इलाका भारतीय और यूरेशियन टेक्टोनिक प्लेटों के मिलन स्थल पर स्थित है, जहाँ प्लेटों के आपस में टकराने या खिसकने से अक्सर बड़े भूकंप आते हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार, यहाँ आने वाले गहरे केंद्र वाले भूकंपों का प्रभाव बहुत बड़े भौगोलिक क्षेत्र में महसूस किया जाता है, जैसा कि इस बार भारत और पाकिस्तान में देखा गया।
भारत में इस भूकंप के झटके रात करीब 9:50 बजे (IST) महसूस किए गए। दिल्ली-एनसीआर, जम्मू-कश्मीर, पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ के निवासियों ने तेज कंपन का अनुभव किया। कई जगहों पर पंखे और झूमर हिलते हुए देखे गए, जिसके बाद लोग घबराकर अपने घरों और ऊंची इमारतों से बाहर निकल आए। सोशल मीडिया पर साझा किए गए वीडियो में लोग सड़कों पर खड़े और एक-दूसरे का हाल जानते हुए दिखाई दे रहे हैं। जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर, उधमपुर और पुंछ जैसे इलाकों में झटके काफी तेज थे, जिससे वहां के निवासियों में पुरानी त्रासदियों की यादें ताजा हो गईं। हालांकि, भारत की ओर से अभी तक किसी जान-माल के नुकसान की कोई आधिकारिक सूचना प्राप्त नहीं हुई है, लेकिन इमारतों में दरारें आने की कुछ शिकायतें मिली हैं।
पड़ोसी देश पाकिस्तान में भी इस भूकंप का असर बहुत गहरा रहा। राजधानी इस्लामाबाद के अलावा पेशावर, लाहौर और खैबर पख्तूनख्वा के कई जिलों में जमीन बुरी तरह हिली। गिलगित-बाल्टिस्तान के दुर्गम इलाकों में भी झटके महसूस किए गए, जहाँ भूस्खलन की आशंका के चलते लोगों को सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी गई है। काबुल में हुई मौतों के बाद पूरे क्षेत्र में एक बार फिर प्राकृतिक आपदाओं से निपटने की तैयारियों पर चर्चा शुरू हो गई है। अफगानिस्तान, जो पहले से ही आर्थिक संकट और बुनियादी ढांचे की कमी से जूझ रहा है, उसके लिए ऐसी आपदाएं दोहरी मार की तरह साबित होती हैं। वहाँ के सुदूर पहाड़ी गांवों से जानकारी जुटाने में काफी समय लग सकता है, जिससे हताहतों की संख्या बढ़ने का खतरा बना हुआ है।
अफगानिस्तान के प्रांतीय स्वास्थ्य अधिकारियों ने बताया कि भूकंप के बाद कई लोग दहशत के कारण घरों से बाहर भागते समय चोटिल हुए हैं। काबुल के अस्पतालों में आपातकाल घोषित कर दिया गया है और एम्बुलेंस सेवाओं को तैनात रखा गया है। संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय मानवीय संगठनों ने स्थिति पर नजर रखनी शुरू कर दी है ताकि जरूरत पड़ने पर तत्काल सहायता उपलब्ध कराई जा सके। अफगानिस्तान में पिछले कुछ वर्षों में आए भीषण भूकंपों ने हजारों लोगों की जान ली है, जिसके कारण वहां की जनता में मामूली झटकों के बाद भी भारी डर बैठ गया है। इस बार भी लोग पूरी रात कड़ाके की ठंड के बावजूद घरों के भीतर जाने से कतराते रहे, क्योंकि उन्हें शक्तिशाली आफ्टरशॉक्स (भूकंप के बाद के झटके) आने का डर था।
भूकंप के तकनीकी पहलुओं की बात करें तो नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी (NCS) ने भी इसकी तीव्रता की पुष्टि करते हुए बताया कि केंद्र का अक्षांश 36.52 डिग्री उत्तर और देशांतर 71.01 डिग्री पूर्व था। इतनी गहराई वाले भूकंप आमतौर पर बहुत बड़ी तबाही नहीं मचाते, लेकिन अगर वे कमजोर बुनियादी ढांचे वाले घनी आबादी वाले क्षेत्रों के नीचे आते हैं, तो जान-माल का नुकसान अपरिहार्य हो जाता है। काबुल में हुई मौतों ने एक बार फिर शहरी इलाकों में इमारतों की मजबूती और सुरक्षा मानकों की कमी को सबके सामने रख दिया है। प्रशासन अब अन्य प्रभावित जिलों जैसे बदख्शां और कुंदुज से भी जानकारी प्राप्त करने की कोशिश कर रहा है, जो केंद्र के सबसे करीब स्थित थे।
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