अजब गजब: भोपाल का ऐशबाग ओवरब्रिज- 90 डिग्री टर्न ने बनाया मजाक का विषय, इंजीनियरिंग लापरवाही पर सोशल मीडिया पर उमड़ा आलोचना का सैलाब।
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में ऐशबाग स्टेडियम के पास नवनिर्मित रेलवे ओवरब्रिज (आरओबी) अपने अनोखे और खतरनाक डिजाइन के कारण ...
भोपाल : मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में ऐशबाग स्टेडियम के पास नवनिर्मित रेलवे ओवरब्रिज (आरओबी) अपने अनोखे और खतरनाक डिजाइन के कारण चर्चा का केंद्र बन गया है। 18 करोड़ रुपये की लागत और 8 साल की मेहनत से बने इस ओवरब्रिज पर लगभग 90 डिग्री का तीखा मोड़ बना हुआ है, जिसे देखकर स्थानीय लोग और वाहन चालक हैरान हैं। इस असामान्य डिजाइन ने न केवल इंजीनियरिंग की गुणवत्ता पर सवाल उठाए हैं, बल्कि सोशल मीडिया पर इसे लेकर आलोचना का सैलाब उमड़ पड़ा है। लोग इसे "अजब मध्य प्रदेश का गजब पुल" करार दे रहे हैं, और कई यूजर्स ने इसे हादसों का न्योता और इंजीनियरिंग लापरवाही का नतीजा बताया है। इस घटना ने भोपाल के बुनियादी ढांचे और सरकारी परियोजनाओं की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
- ऐशबाग ओवरब्रिज
ऐशबाग रेलवे क्रॉसिंग पर लंबे समय से ट्रैफिक जाम और फाटक बंद होने की समस्या थी, जिसके कारण स्थानीय लोग महामाई बाग, पुष्पा नगर, और स्टेशन क्षेत्र से आवागमन में परेशानी झेल रहे थे। इस समस्या को हल करने के लिए 21 मार्च 2013 को इस रेलवे ओवरब्रिज का निर्माण कार्य शुरू हुआ था। सरकारी विज्ञप्ति के अनुसार, 648 मीटर लंबा और 8.5 मीटर चौड़ा यह ओवरब्रिज प्रतिदिन लगभग तीन लाख लोगों की आवाजाही को सुगम बनाने के लिए बनाया गया था। सरकार का दावा था कि इससे न केवल ट्रैफिक जाम की समस्या खत्म होगी, बल्कि लोगों को लंबा चक्कर लगाने की जरूरत भी नहीं पड़ेगी।
हालांकि, इस ओवरब्रिज का निर्माण कार्य कई बार देरी का शिकार हुआ। आठ साल से अधिक समय तक चले निर्माण के बाद, यह ओवरब्रिज अब अपने आधिकारिक उद्घाटन से पहले ही विवादों में घिर गया है। इसका कारण है इसका असामान्य डिजाइन, जिसमें एक 90 डिग्री का तीखा मोड़ शामिल है। यह मोड़ ओवरब्रिज के रेलवे हिस्से में 70 मीटर की लंबाई पर बना हुआ है, जो वाहन चालकों के लिए खतरनाक साबित हो सकता है।
- 90 डिग्री टर्न: इंजीनियरिंग की मिसाल या लापरवाही?
ऐशबाग ओवरब्रिज का यह 90 डिग्री का टर्न सोशल मीडिया पर मजाक और आलोचना का विषय बन गया है। स्थानीय वाहन चालकों और निवासियों ने इस डिजाइन को अव्यवहारिक और खतरनाक बताया है। एक स्थानीय टैक्सी चालक, रमेश सोलंकी, ने कहा, "इस तरह का मोड़ हाईवे या रेलवे ओवरब्रिज पर नहीं देखा जाता। इतना तीखा टर्न लेते समय गाड़ी का संतुलन बिगड़ सकता है, और हादसे की आशंका बहुत ज्यादा है।"
सोशल मीडिया पर यूजर्स ने इस डिजाइन को इंजीनियरिंग की "अद्भुत गलती" और "तुक्के का नतीजा" करार दिया है। @Vyangyabaazi ने 'एक्स' पर लिखा, "सख्त हिदायत: ये टेक्नोलॉजी देश से बाहर नहीं जाना चाहिए। भोपाल के रेलवे ओवर ब्रिज में 88 डिग्री का टर्न, 18 करोड़ रुपये की लागत से बना है यह अद्भुत नमूना।" एक अन्य यूजर, @nitendrasharma2, ने लिखा, "यह भोपाल का ऐशबाग आरओबी है जो 90 डिग्री पर मुड़ने के कारण एक्सीडेंट का कारण बनेगा। ऐसे डिजाइन वाले पुल के कारण ही तो एमपी को अजब और गजब माना जाता है।"
- सोशल मीडिया पर आलोचना का सैलाब
सोशल मीडिया पर इस ओवरब्रिज की तस्वीरें और वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं। कई यूजर्स ने इसे इंजीनियरिंग की विफलता और सरकारी परियोजनाओं में लापरवाही का प्रतीक बताया है। @AbhishekSay ने व्यंग्यात्मक लहजे में लिखा, "आधुनिक वास्तुकला का उत्कृष्ट नमूना! ये ऐशबाग, भोपाल में बना ओवरब्रिज है। इस पुल पर टर्निंग पॉइंट लगभग 90° है। इस अद्भुत वास्तुकला के वास्तुकार कौन हैं? ये तकनीक भारत से लीक नहीं होनी चाहिए।"
कई यूजर्स ने इस डिजाइन को मुख्यमंत्री मोहन यादव के कार्यकाल से जोड़कर भी आलोचना की। @MulayamSinghKP ने लिखा, "मुख्यमंत्री मोहन यादव के कार्यकाल में बना, सदियों तक यादव जाति पर उपहास रहेगा।" यह आलोचना न केवल डिजाइन की खामियों को उजागर करती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि जनता सरकारी परियोजनाओं की गुणवत्ता को लेकर कितनी सजग है।
- इंजीनियरिंग विशेषज्ञों की राय
इंजीनियरिंग विशेषज्ञों ने भी इस डिजाइन पर गंभीर सवाल उठाए हैं। एक सिविल इंजीनियर, प्रोफेसर अजय शर्मा, ने कहा, "आधुनिक रेलवे ओवरब्रिज या फ्लाईओवर में इतना तीखा मोड़ असामान्य है। यह न केवल वाहन चालकों के लिए खतरनाक है, बल्कि भारी वाहनों, जैसे बसों और ट्रकों, के लिए भी असुरक्षित है। डिजाइन में सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया गया लगता।" उन्होंने यह भी बताया कि सामान्य रूप से, फ्लाईओवर या ओवरब्रिज में टर्न का कोण 30 से 45 डिग्री से अधिक नहीं होना चाहिए, ताकि वाहन आसानी से और सुरक्षित रूप से मुड़ सकें।
सड़क सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के तीखे मोड़ हादसों का कारण बन सकते हैं, खासकर रात के समय या बारिश के मौसम में, जब सड़कें फिसलन भरी होती हैं। मध्य प्रदेश में सड़क हादसों की पहले से ही चिंताजनक स्थिति है। 2023 में, उत्तर प्रदेश के बाद मध्य प्रदेश में सड़क हादसों में सबसे ज्यादा मौतें (11,000 से अधिक) दर्ज की गई थीं। ऐसे में, इस तरह के डिजाइन से हादसों का खतरा और बढ़ सकता है।
- प्रशासन की चुप्पी और जनता की मांग
इस ओवरब्रिज के डिजाइन पर बढ़ती आलोचना के बावजूद, लोक निर्माण विभाग (PWD) और रेलवे अधिकारियों ने अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। कुछ अधिकारियों ने अनौपचारिक रूप से कहा कि यह डिजाइन भौगोलिक और तकनीकी बाधाओं के कारण बनाया गया हो सकता है, लेकिन इसकी पुष्टि के लिए कोई विस्तृत बयान जारी नहीं किया गया।
स्थानीय निवासियों और वाहन चालकों ने मांग की है कि इस मोड़ को ठीक करने के लिए तत्काल कदम उठाए जाएं। एक स्थानीय निवासी, श्याम सुंदर, ने कहा, "18 करोड़ रुपये खर्च करने के बाद अगर यह पुल हादसों का कारण बनता है, तो यह जनता के साथ धोखा है। सरकार को इस डिजाइन को सुधारना चाहिए।" कुछ लोगों ने यह भी सुझाव दिया कि इस मोड़ पर स्पीड ब्रेकर, चेतावनी संदेश, और अतिरिक्त रेलिंग लगाई जाएं, ताकि हादसों का खतरा कम हो। यह घटना मध्य प्रदेश में बुनियादी ढांचे की परियोजनाओं में गुणवत्ता और जवाबदेही की कमी को उजागर करती है। हाल के वर्षों में, राज्य में कई ऐसी परियोजनाएं चर्चा में रही हैं, जिनमें निर्माण में लापरवाही या डिजाइन की खामियां सामने आई हैं। उदाहरण के लिए, 2022 में भोपाल के एक नवनिर्मित फ्लाईओवर में दरारें पड़ गई थीं, जिसके बाद इसे कई महीनों तक बंद रखना पड़ा था।
ऐशबाग ओवरब्रिज का मामला भी इस बात का प्रतीक है कि सरकारी परियोजनाओं में पारदर्शिता और जनता की भागीदारी की कमी है। कई यूजर्स ने सोशल मीडिया पर सवाल उठाया कि इतने बड़े प्रोजेक्ट के डिजाइन को मंजूरी देने से पहले क्या कोई विशेषज्ञ समीक्षा हुई थी। @Raghavendra_x ने लिखा, "90 डिग्री टर्न वाला ये ब्रिज भोपाल में बना है। 18 करोड़ रुपये से तैयार मध्यप्रदेश में डेवलपमेंट के इस नए एंगल को भविष्य में हादसे के कोण के रूप में जाना जाएगा।" भोपाल का ऐशबाग रेलवे ओवरब्रिज, जिसे जनता की सुविधा के लिए बनाया गया था, अब अपनी खराब डिजाइन के कारण मजाक और चिंता का विषय बन गया है। 90 डिग्री का तीखा मोड़ न केवल इंजीनियरिंग की लापरवाही को दर्शाता है, बल्कि यह भी सवाल उठाता है कि इतने बड़े प्रोजेक्ट में इतनी बड़ी चूक कैसे हो सकती है। सोशल मीडिया पर जनता की नाराजगी और व्यंग्य इस बात का संकेत है कि लोग अब सरकारी परियोजनाओं की गुणवत्ता को लेकर पहले से कहीं ज्यादा सजग हैं।
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