‘खामोश कराया गया, हारा नहीं’ वाले राघव चड्ढा के बयान पर भड़के दिल्ली के मंत्री, बोले- ‘आप तो पंजाब के मुद्दे उठाने से भी डरते हैं’.

आम आदमी पार्टी (AAP) के भीतर चल रही अंदरूनी खींचतान अब पूरी तरह से सार्वजनिक हो चुकी है। ताजा घटनाक्रम में पार्टी के वरिष्ठ नेता और

Apr 4, 2026 - 14:56
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‘खामोश कराया गया, हारा नहीं’ वाले राघव चड्ढा के बयान पर भड़के दिल्ली के मंत्री, बोले- ‘आप तो पंजाब के मुद्दे उठाने से भी डरते हैं’.
‘खामोश कराया गया, हारा नहीं’ वाले राघव चड्ढा के बयान पर भड़के दिल्ली के मंत्री, बोले- ‘आप तो पंजाब के मुद्दे उठाने से भी डरते हैं’.
  • आम आदमी पार्टी में मची बड़ी रार, राघव चड्ढा को पद से हटाए जाने के बाद सौरभ भारद्वाज का सीधा हमला
  • अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी के समय विदेश जाने पर भी उठा सवाल, AAP के भीतर की गुटबाजी अब खुलकर आई सामने

आम आदमी पार्टी (AAP) के भीतर चल रही अंदरूनी खींचतान अब पूरी तरह से सार्वजनिक हो चुकी है। ताजा घटनाक्रम में पार्टी के वरिष्ठ नेता और दिल्ली सरकार में मंत्री सौरभ भारद्वाज ने अपनी ही पार्टी के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा पर तीखा हमला बोला है। भारद्वाज ने चड्ढा को संबोधित करते हुए एक वीडियो संदेश जारी किया और प्रसिद्ध फिल्मी संवाद का सहारा लेते हुए कहा, "जो डर गया समझो मर गया।" यह तल्ख टिप्पणी उस समय आई है जब राघव चड्ढा को राज्यसभा में आम आदमी पार्टी के 'डिप्टी लीडर' (उप-नेता) के पद से हटा दिया गया है और उनकी जगह अशोक मित्तल को यह जिम्मेदारी दी गई है। इस फेरबदल के बाद से ही पार्टी के भीतर असंतोष के स्वर तेज हो गए हैं।

विवाद की शुरुआत तब हुई जब पद से हटाए जाने के बाद राघव चड्ढा ने सोशल मीडिया पर एक भावुक वीडियो संदेश साझा किया। इस वीडियो में चड्ढा ने कहा कि उन्हें 'खामोश करवाया गया है, लेकिन वे हारे नहीं हैं।' उन्होंने जनता से अपना साथ बनाए रखने की अपील की और खुद को एक ऐसा 'दरिया' बताया जो वक्त आने पर 'सैलाब' बन जाएगा। चड्ढा का यह इशारा साफ तौर पर पार्टी नेतृत्व के उस फैसले की ओर था, जिसमें उन्हें संसदीय जिम्मेदारी से मुक्त कर दिया गया। हालांकि, सौरभ भारद्वाज को चड्ढा का यह 'विक्टिम कार्ड' खेलना रास नहीं आया और उन्होंने तुरंत पलटवार करते हुए उनके राजनीतिक साहस पर ही सवाल उठा दिए।

राघव चड्ढा की लंबी चुप्पी और विदेश प्रवास

राघव चड्ढा पिछले काफी समय से पार्टी की मुख्य गतिविधियों से दूर नजर आ रहे थे। पार्टी प्रमुख अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी के समय भी वे देश में मौजूद नहीं थे, बल्कि लंदन में अपनी आंखों की सर्जरी करवा रहे थे। उनके इस प्रवास को लेकर विपक्षी दलों के साथ-साथ अब उनकी अपनी ही पार्टी के नेता भी सवाल उठाने लगे हैं कि संकट के समय वे 'मैदान' छोड़कर क्यों चले गए थे।

सौरभ भारद्वाज ने अपने आरोपों की झड़ी लगाते हुए कहा कि राजनीति में डर की कोई जगह नहीं होती। उन्होंने आरोप लगाया कि राघव चड्ढा पिछले काफी समय से सदन में महत्वपूर्ण मुद्दों पर बोलने से कतरा रहे हैं। भारद्वाज ने सवाल उठाया कि जब पूरा विपक्ष किसी गंभीर मुद्दे पर सदन से वॉकआउट करता है, तब चड्ढा उसमें शामिल क्यों नहीं होते? उन्होंने यह भी दावा किया कि चड्ढा ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) के महाभियोग से जुड़े प्रस्ताव पर हस्ताक्षर करने से भी मना कर दिया था। भारद्वाज के अनुसार, यह व्यवहार एक क्रांतिकारी पार्टी के नेता को शोभा नहीं देता, जो हर मुद्दे पर सरकार की आंखों में आंखें डालकर बात करने का दावा करती है।

पंजाब की राजनीति को लेकर भी भारद्वाज ने चड्ढा को घेरा। उन्होंने कहा कि जिस पंजाब की जनता ने उन्हें चुनकर राज्यसभा भेजा है, राघव चड्ढा वहां के गंभीर मुद्दे उठाने से भी घबराते हैं। भारद्वाज ने गुजरात का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां पार्टी के करीब 160 कार्यकर्ताओं पर फर्जी मुकदमे दर्ज हुए और गिरफ्तारियां हुईं, लेकिन चड्ढा की ओर से कोई ठोस प्रतिक्रिया नहीं आई। दिल्ली के मंत्री ने तंज कसते हुए कहा कि संसद में समोसे या छोटे-मोटे विषयों पर बात करने से जनता का भला नहीं होता, बल्कि देश के बड़े और ज्वलंत मुद्दों पर स्टैंड लेना जरूरी होता है, जो चड्ढा करने में विफल रहे हैं।

यह कलह तब और स्पष्ट हो गई जब पार्टी के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अनुराग ढांडा ने भी भारद्वाज की बातों का समर्थन किया। ढांडा ने संकेत दिए कि पार्टी अब ऐसे चेहरों को आगे रखना चाहती है जो संघर्ष के समय पीछे न हटें। आम आदमी पार्टी के भीतर इस समय दो गुट साफ नजर आ रहे हैं—एक वो जो पुराने संघर्षी नेताओं का है और दूसरा वो जो युवा और हाई-प्रोफाइल चेहरों का। राघव चड्ढा के पद से हटने को पार्टी के नए डिप्टी लीडर अशोक मित्तल ने एक 'रूटीन प्रक्रिया' बताया था, लेकिन जिस तरह से भारद्वाज और चड्ढा के बीच जुबानी जंग छिड़ी है, उससे साफ है कि यह महज एक साधारण फेरबदल नहीं है।

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