अमित शाह का लोकसभा में बड़ा बयान: 'इंदिरा गांधी की सत्ता ललक के कारण देश में फैला नक्सलवाद का जहर'।

संसद के बजट सत्र के दौरान 30 मार्च 2026 को लोकसभा में 'देश को वामपंथी उग्रवाद से मुक्त करने के प्रयासों' पर हुई अल्पकालिक चर्चा का जवाब

Mar 31, 2026 - 15:25
 0  2
अमित शाह का लोकसभा में बड़ा बयान: 'इंदिरा गांधी की सत्ता ललक के कारण देश में फैला नक्सलवाद का जहर'।
अमित शाह का लोकसभा में बड़ा बयान: 'इंदिरा गांधी की सत्ता ललक के कारण देश में फैला नक्सलवाद का जहर'।
  • 31 मार्च 2026 की समय सीमा और नक्सल मुक्त भारत: गृह मंत्री ने सदन में गिनाईं मोदी सरकार की ऐतिहासिक उपलब्धियां
  • विचारधारा बनाम विकास: अमित शाह ने नक्सलवाद के मूल कारणों का विश्लेषण करते हुए कांग्रेस की पुरानी नीतियों पर किया तीखा प्रहार

संसद के बजट सत्र के दौरान 30 मार्च 2026 को लोकसभा में 'देश को वामपंथी उग्रवाद से मुक्त करने के प्रयासों' पर हुई अल्पकालिक चर्चा का जवाब देते हुए अमित शाह ने बेहद आक्रामक रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि आज देश गर्व के साथ कह सकता है कि वह नक्सलवाद के दंश से लगभग मुक्त हो चुका है। गृह मंत्री ने 31 मार्च 2026 की उस समय सीमा को दोहराया, जिसे उन्होंने पहले निर्धारित किया था। उन्होंने सदन को सूचित किया कि दशकों से देश के 12 राज्यों के 126 जिलों में फैला 'रेड कॉरिडोर' अब सिमटकर छत्तीसगढ़ के मात्र कुछ चुनिंदा इलाकों तक रह गया है। उन्होंने नक्सलवाद के खिलाफ इस सफलता को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक बताया।

अपने संबोधन के दौरान अमित शाह ने नक्सलवाद के इतिहास की परतों को खोलते हुए पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी पर सीधा हमला बोला। उन्होंने दावा किया कि 1969-70 के दौर में जब कांग्रेस के भीतर सत्ता का संघर्ष चल रहा था, तब तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने अपनी राजनीतिक स्थिति मजबूत करने के लिए वामपंथी विचारधारा का सहारा लिया था। शाह के अनुसार, 1969 के राष्ट्रपति चुनाव में अपने पसंदीदा उम्मीदवार वी.वी. गिरि को जिताने के लिए इंदिरा गांधी ने वामपंथी दलों और उनकी विचारधारा से समझौता किया। उन्होंने आरोप लगाया कि इसी दौर में माओवादी विचारधारा को पनपने का मौका मिला और यह 'विकास की मांग' के बजाय एक खतरनाक 'विनाशकारी विचारधारा' के रूप में देश के भीतरी हिस्सों में फैल गई।

गृह मंत्री ने आंकड़ों के माध्यम से यह समझाने का प्रयास किया कि कैसे दशकों तक नक्सल प्रभावित क्षेत्रों को विकास से वंचित रखा गया। उन्होंने कहा कि पिछले 60 वर्षों में इन क्षेत्रों में रहने वाले 12 करोड़ लोग गरीबी और अभाव में जीवन जीने को मजबूर थे। उनके पास न घर थे, न स्वच्छ पानी और न ही शिक्षा की कोई व्यवस्था। शाह ने कांग्रेस से सवाल किया कि जो आज जवाबदेही मांग रहे हैं, उन्होंने दशकों तक इन क्षेत्रों में मोबाइल टावर, बैंक और स्कूल क्यों नहीं पहुंचने दिए? उन्होंने कहा कि 1970 से लेकर 2026 तक लगभग 20,000 निर्दोष लोगों और सुरक्षाकर्मियों ने अपनी जान गंवाई है, जिसके लिए सीधे तौर पर वे लोग जिम्मेदार हैं जिन्होंने इस विचारधारा को संरक्षण दिया।

सुरक्षा बलों की उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए अमित शाह ने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में माओवादी नेतृत्व की कमर तोड़ दी गई है। उन्होंने 'ऑपरेशन ब्लैक फॉरेस्ट' और 'ऑपरेशन सिंदूर' जैसे मिशनों का उल्लेख किया, जिनके माध्यम से शीर्ष माओवादी नेताओं को या तो मार गिराया गया या उन्हें आत्मसमर्पण के लिए मजबूर किया गया। उन्होंने विशेष रूप से हिड़मा जैसे खूंखार कमांडरों के खात्मे का जिक्र करते हुए कहा कि अब बस्तर जैसे दुर्गम क्षेत्रों में भी तिरंगा शान से लहरा रहा है। गृह मंत्री ने कहा कि नक्सलवाद केवल बंदूक से खत्म नहीं हुआ है, बल्कि मोदी सरकार की 'प्रहार और विकास' की दोहरी नीति (Double-pronged strategy) ने इसे जड़ से उखाड़ फेंका है।

माओवादी नेतृत्व का पतन

आंकड़ों के अनुसार, 2025-26 के बीच नक्सलवाद के खिलाफ चलाए गए अभियानों में सीपीआई (माओवादी) की केंद्रीय समिति और पोलित ब्यूरो के 21 में से 20 सदस्य या तो मारे जा चुके हैं या जेल में हैं या उन्होंने आत्मसमर्पण कर दिया है। 2025 में ही 300 से अधिक नक्सली ढेर किए गए और लगभग 2,000 ने मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया।

अमित शाह ने वैचारिक लड़ाई पर जोर देते हुए उन बुद्धिजीवियों की भी आलोचना की जो नक्सलियों के 'मानवाधिकारों' की बात करते हैं। उन्होंने पूछा कि उन माताओं के मानवाधिकारों का क्या, जिनके बच्चों को जबरन नक्सली बना दिया गया, या उन विधवाओं का क्या, जिनके पति इन हिंसक हमलों में शहीद हुए? उन्होंने कहा कि नक्सलियों के समर्थक भी उतने ही दोषी हैं जितने कि हिंसा करने वाले। गृह मंत्री ने स्पष्ट किया कि विकास की कमी नक्सलवाद का कारण नहीं थी, बल्कि नक्सलवाद विकास को रोकने का एक जरिया था ताकि एक विशेष विचारधारा के माध्यम से सत्ता को चुनौती दी जा सके। मोदी सरकार की विकास योजनाओं का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि कैसे अब नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के हर गांव में राशन की दुकानें और स्कूल खुल रहे हैं। उन्होंने कहा कि 'असम गति शक्ति' और 'पीएम जनमन' जैसी योजनाओं के माध्यम से उन जनजातीय समुदायों तक पहुंचा जा रहा है जिन्हें दशकों तक नजरअंदाज किया गया था। शाह ने विश्वास जताया कि 31 मार्च 2026 के बाद भारत पूरी तरह से 'लाल आतंक' से मुक्त होगा और विकास की एक नई इबारत लिखी जाएगी। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई केवल सुरक्षा की नहीं, बल्कि उन 12 करोड़ लोगों के सम्मान और अधिकारों की है जिन्हें वर्षों तक बंधक बनाकर रखा गया था।

Also Read- इजरायल और अमेरिका का ईरान पर भीषण हवाई हमला: रणनीतिक ठिकाने तबाह, 20 की मौत के बाद तेहरान में हड़कंप।

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow

INA News_Admin आई.एन. ए. न्यूज़ (INA NEWS) initiate news agency भारत में सबसे तेजी से बढ़ती हुई हिंदी समाचार एजेंसी है, 2017 से एक बड़ा सफर तय करके आज आप सभी के बीच एक पहचान बना सकी है| हमारा प्रयास यही है कि अपने पाठक तक सच और सही जानकारी पहुंचाएं जिसमें सही और समय का ख़ास महत्व है।