आसमान से बरसेगी आग: पश्चिमी उत्तर प्रदेश से लेकर पूर्वांचल तक लू का कहर, जानें कब मिलेगी चिलचिलाती गर्मी से राहत।

उत्तर प्रदेश में गर्मी ने समय से पहले ही अपने तीखे तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं, जिससे जनजीवन पूरी तरह से अस्त-व्यस्त हो गया

Apr 24, 2026 - 12:05
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आसमान से बरसेगी आग: पश्चिमी उत्तर प्रदेश से लेकर पूर्वांचल तक लू का कहर, जानें कब मिलेगी चिलचिलाती गर्मी से राहत।
आसमान से बरसेगी आग: पश्चिमी उत्तर प्रदेश से लेकर पूर्वांचल तक लू का कहर, जानें कब मिलेगी चिलचिलाती गर्मी से राहत।
  • उत्तर प्रदेश में भीषण हीटवेव का तांडव, 32 जिलों में 'रेड अलर्ट' जारी, 45 डिग्री के पार जा सकता है पारा
  • भीषण गर्मी की चपेट में समूचा यूपी, अगले 72 घंटे बेहद नाजुक, मौसम विभाग ने दोपहर में घर से बाहर न निकलने की दी सलाह

उत्तर प्रदेश में गर्मी ने समय से पहले ही अपने तीखे तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं, जिससे जनजीवन पूरी तरह से अस्त-व्यस्त हो गया है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने राज्य के 32 जिलों के लिए 'रेड अलर्ट' जारी करते हुए अगले तीन दिनों तक भीषण हीटवेव (उष्ण लहर) चलने की चेतावनी दी है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, राजस्थान की ओर से आने वाली शुष्क और गर्म पछुआ हवाओं ने उत्तर प्रदेश के मैदानी इलाकों को तपाना शुरू कर दिया है, जिसके कारण तापमान सामान्य से 4 से 6 डिग्री सेल्सियस अधिक दर्ज किया जा रहा है। विशेष रूप से पश्चिमी उत्तर प्रदेश और बुंदेलखंड के इलाकों में स्थिति अधिक गंभीर बनी हुई है, जहाँ पारा 44 डिग्री सेल्सियस को पार कर चुका है। प्रशासन ने लोगों को इस भीषण गर्मी के प्रति आगाह करते हुए विशेष सावधानी बरतने के निर्देश दिए हैं।

भीषण गर्मी का सबसे अधिक प्रभाव राज्य के उन 32 जिलों में देखा जा रहा है जहाँ मौसम विभाग ने रेड अलर्ट घोषित किया है। इन जिलों में आगरा, मथुरा, झांसी, प्रयागराज, कानपुर, लखनऊ, वाराणसी और अयोध्या जैसे प्रमुख शहर शामिल हैं। इन क्षेत्रों में दोपहर के समय चलने वाली गर्म हवाएं (लू) इतनी तीव्र हैं कि सड़कों पर सन्नाटा पसर जाता है। मौसम विभाग का पूर्वानुमान है कि अगले 48 से 72 घंटों के दौरान इन जिलों में तापमान में 2 से 3 डिग्री की और बढ़ोतरी हो सकती है, जिससे गर्मी के पुराने रिकॉर्ड टूट सकते हैं। रात के तापमान में भी वृद्धि देखी जा रही है, जिससे लोगों को चौबीसों घंटे चैन नहीं मिल रहा है। 'वॉर्म नाइट' (गर्म रात) की स्थिति के कारण शरीर को गर्मी से उबरने का पर्याप्त समय नहीं मिल पा रहा है, जो स्वास्थ्य के लिहाज से बेहद चिंताजनक है।

कृषि और पशुपालन पर भी इस हीटवेव का व्यापक असर पड़ रहा है। भीषण तापमान के कारण मिट्टी की नमी तेजी से कम हो रही है, जिससे खड़ी फसलों, विशेषकर सब्जियों और चारे की फसलों को भारी नुकसान होने की आशंका है। कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी है कि वे अपनी फसलों को बचाने के लिए केवल शाम के समय या अलसुबह ही हल्की सिंचाई करें, ताकि पौधों को झुलसने से बचाया जा सके। इसके साथ ही, पशुपालकों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने पशुओं को दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे के बीच खुले में न चराएं और उन्हें ठंडे व छायादार स्थानों पर रखें। पानी की कमी के कारण पशुओं में 'हीट स्ट्रोक' के मामले बढ़ने का खतरा बना हुआ है, जिसे रोकने के लिए उन्हें पर्याप्त मात्रा में तरल आहार और पानी उपलब्ध कराना अनिवार्य है।

हीटवेव से बचाव के जरूरी उपाय

दोपहर 12 से 4 बजे के बीच घर से बाहर निकलने से बचें।

यदि बाहर निकलना जरूरी हो, तो सिर को गीले कपड़े, टोपी या छतरी से ढकें।

सूती और ढीले कपड़े पहनें ताकि शरीर का तापमान संतुलित रहे।

प्यास न लगने पर भी पर्याप्त पानी, ओआरएस, लस्सी या नींबू पानी पीते रहें।

आंखों की सुरक्षा के लिए सनग्लासेस का उपयोग करें।

स्वास्थ्य विभाग ने गर्मी जनित बीमारियों के प्रति लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। अस्पतालों को हाई अलर्ट पर रखा गया है और हीट स्ट्रोक के मरीजों के लिए विशेष वार्ड बनाए गए हैं। डॉक्टरों के अनुसार, इस मौसम में निर्जलीकरण (डिहाइड्रेशन) और चक्कर आने जैसी समस्याएं आम हो जाती हैं। बच्चों और बुजुर्गों को इस मौसम में सबसे ज्यादा खतरा रहता है, इसलिए उन्हें धूप के सीधे संपर्क में आने से रोकना चाहिए। नगर निगमों को सार्वजनिक स्थानों पर प्याऊ की व्यवस्था करने और बाजारों में फॉगिंग मशीन या पानी के छिड़काव की योजना बनाने के निर्देश दिए गए हैं ताकि स्थानीय स्तर पर तापमान को थोड़ा नियंत्रित किया जा सके। बिजली विभाग पर भी इस दौरान भारी दबाव है क्योंकि एयर कंडीशनर और कूलरों के लगातार चलने से बिजली की मांग अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है।

पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिलों जैसे नोएडा, गाजियाबाद, मेरठ और सहारनपुर में भी गर्मी का प्रकोप चरम पर है। यहां चलने वाली धूल भरी गर्म हवाओं ने न केवल तापमान बढ़ाया है, बल्कि वायु गुणवत्ता को भी प्रभावित किया है। धूल के कण हवा में मिलकर सांस लेने में कठिनाई पैदा कर रहे हैं। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, प्रयागराज और झांसी जैसे जिलों में इस साल अप्रैल महीने में ही मई जैसी गर्मी का अनुभव हो रहा है। प्रशासन ने स्कूलों के समय में भी बदलाव करने पर विचार करना शुरू कर दिया है ताकि बच्चों को दोपहर की भीषण तपन से बचाया जा सके। कई इलाकों में दोपहर के वक्त अघोषित कर्फ्यू जैसी स्थिति नजर आती है, जहाँ आवश्यक सेवाओं को छोड़कर शेष गतिविधियां थम सी गई हैं।

राहत की बात करें तो मौसम विभाग ने एक पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) के सक्रिय होने के संकेत दिए हैं। अनुमान है कि 26 अप्रैल की शाम या 27 अप्रैल से उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में बादलों की आवाजाही शुरू हो सकती है। 28 और 29 अप्रैल को राज्य के पश्चिमी और मध्य भागों में हल्की बूंदाबांदी या धूल भरी आंधी चलने की संभावना है, जिससे तापमान में 2 से 4 डिग्री सेल्सियस की गिरावट आ सकती है। हालांकि, यह राहत अस्थायी हो सकती है, क्योंकि मई का महीना शुरू होते ही गर्मी के एक बार फिर प्रचंड होने के आसार हैं। तब तक लोगों को सलाह दी गई है कि वे मौसम विभाग की चेतावनियों का पालन करें और प्रकृति के इस प्रकोप से बचने के लिए सुरक्षात्मक उपाय अपनाएं।

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