Hardoi : पुलिस हिरासत में युवक की मौत, लड़की को भगा ले जाने का था आरोप, परिजनों ने गुपचुप तरीके से मार डालने का लगाया आरोप

मृतक रवि के चाचा ने मीडिया को बताया कि पुलिस ने लड़की पक्ष के लोगों से पैसे लेकर मामले को दबाए रखा और रवि को गुप्त तरीके से अपनी हिरासत में रखकर रविवार को उ

Sep 1, 2025 - 00:00
Sep 1, 2025 - 00:20
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Hardoi : पुलिस हिरासत में युवक की मौत, लड़की को भगा ले जाने का था आरोप, परिजनों ने गुपचुप तरीके से मार डालने का लगाया आरोप
पुलिस हिरासत में युवक की मौत, लड़की को भगा ले जाने का था आरोप, परिजनों ने गुपचुप तरीके से मार डालने का लगाया आरोप

हाइलाइट्स :

1. पुलिस हिरासत में युवक की मौत: हरदोई के शाहाबाद थाना क्षेत्र में रवि नामक युवक की पुलिस हिरासत में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत, परिजनों ने हत्या का आरोप लगाया।
2. लड़की भगाने का आरोप: रवि पर एक लड़की को बहला-फुसलाकर भगाने का आरोप था, जिसके चलते उसे 5 दिन पहले हिरासत में लिया गया था।
3. पुलिस पर गंभीर आरोप: परिजनों का दावा, पुलिस ने रवि की गिरफ्तारी को गुप्त रखा और उसे तड़के मार डाला, लड़की पक्ष से पैसे लेने का भी आरोप।
4. कानूनी प्रक्रिया पर सवाल: 5 दिन तक हिरासत में रखने के बावजूद रवि को कोर्ट में पेश नहीं किया गया, पुलिस की कार्यशैली पर उठे सवाल।
5. 11 दिन में दूसरा मामला: शाहाबाद में पहले भाजपा बूथ अध्यक्ष की हत्या के बाद पुलिस की लापरवाही सामने आई थी, अब रवि की मौत से फिर सवाल।
6. एसपी की कार्रवाई: एसपी नीरज कुमार जादौन ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू की, स्थानीय लोगों को कड़ी कार्रवाई की उम्मीद।

हरदोई : जिले के शाहाबाद थाना क्षेत्र में रविवार को एक युवक को पुलिस हिरासत में मार डालने का आरोप परिजनों ने लगाया है। बताया जा रहा है कि मृतक कुछ दिन पहले किसी लड़की को भगा ले जाने के मामले में आरोपी था। मृतक के परिजनों ने पुलिस पर अपनी हिरासत में युवक को गुपचुप तड़के से मार डालने व मामले को दबाने का आरोप लगाया है। जानकारी के मुताबिक, युवक रवि को करीब 5 दिन पहले एक लड़की को बहला-फुसलाकर भगा ले जाने के आरोप में हिरासत में लिया गया था। इसी बीच रविवार तक उसे पुलिस हिरासत में रखा गया।परिजनों के मुताबिक, पुलिस ने गुपचुप तरीके से मृत युवक की गिरफ्तारी को छिपाए रखा और आज उसे मार डाला। इस मामले को लेकर अस्पताल के डॉक्टर ने बताया कि पुलिस मृतक रवि को रविवार शाम 07:50 बजे हॉस्पिटल लेकर गयी थी, जहां पर डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया था। पुलिस इसके बाद मृत रवि के शव को वहां से लेकर चली गयी। स्थानीय लोगों ने इस मामले पर कहा कि पुलिस ने कानून को ताक पर रखकर रवि के साथ अनैतिक बर्ताव किया और ऐसे में आरोपियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।वहीं इस मामले में मृतक रवि के चाचा ने मीडिया को बताया कि पुलिस ने लड़की पक्ष के लोगों से पैसे लेकर मामले को दबाए रखा और रवि को गुप्त तरीके से अपनी हिरासत में रखकर रविवार को उसे मार डाला। घटना के बाद जिले के एसपी नीरज कुमार जादौन, एएसपी मौके पर पहुंचे और उन्होंने मृतक के परिजनों सहित आसपास के लोगों से आवश्यक जानकारी हासिल की। खबर लिखे जाने तक इस मामले में किसी भी अधिकारी का कोई बयान सामने नहीं आया था। घटना की जानकारी के बाद देखते ही देखते शाहाबाद कोतवाली में सैकड़ों लोगों का तांता लग गया।

11 दिन में दूसरा मामला, जिसमें पुलिस की भूमिका संदिग्ध

इस मामले से पहले शाहाबाद में ही भाजपा बूथ अध्यक्ष शैलेन्द्र मिश्रा की गुमशुदगी के बाद उनकी हत्या और तालाब में खूंटे से बंधे शव के मिलने के बाद कोतवाल व दरोगा द्वारा मृतक के परिजनों के साथ अभद्र व्यवहार करना व गुमशुदगी की रिपोर्ट के बाद उन्हें ढूंढने में भी कोताही बरतने की बात सामने आई थी।मृतक के चाचा

हालांकि एसपी के संज्ञान में मामला आने के बाद दोनों पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर दिया गया था। रवि की मौत के मामले में भी सस्पेंडेड कोतवाल पर सवाल उठ रहे हैं क्योंकि रवि की गिरफ्तारी के समय शाहाबाद के कोतवाल वही थे।

यदि गिरफ्तारी 5 दिन पहले हुई तो कोर्ट में क्यों नहीं किया गया पेश

सवाल यह भी उठ रहा है कि यदि रवि को लड़की को भगा ले जाने के मामले में पुलिस ने करीब 5 दिन पहले ही गिरफ्तार किया था तो फिर कानूनन उसे कोर्ट में पेश क्यों नहीं किया गया। शाहाबाद पुलिस की इस कार्यशैली पर भी परिजनों ने सवाल खड़े किए हैं।

गिरफ्तारी हुई तो शाहाबाद पुलिस ने प्रेस नोट जारी क्यों नहीं किया?

हर जिले की पुलिस द्वारा अपनी कानूनी कार्रवाई करने व किसी भी आरोपी को गिरफ्तार करने के बाद प्रेस नोट जारी किया जाता है, जिसमें उसके द्वारा किये गए अपराध और आरोपी से जुड़ी जरूरी जानकारी प्रेस नोट के माध्यम से दी जाती है लेकिन इस मामले में शाहाबाद पुलिस ने न तो कोई प्रेस नोट जारी किया और न ही इस बावत कोई जानकारी बाहर आने दी। इस एवज में पुलिस की भूमिका को संदिग्ध कहा जाना गलत नहीं होगा।

न्यायप्रिय एसपी के जिले में शाहाबाद पुलिस का अन्याय आखिर कैसे बर्दाश्त?

अनुशासनप्रिय, न्यायप्रिय व बेहतर कानून व्यवस्था के पर्याय एसपी नीरज कुमार जादौन के जिले में शाहाबाद पुलिस द्वारा इस मामले में बरती गई कोताही जिले की पुलिस की न्याय व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा करती है।व्यक्ति किसी भी आरोप में आरोपी हो लेकिन पुलिस को कानूनन उसे न्याय व्यवस्था के अनुसार ही कार्रवाई करने का अधिकार है लेकिन भीतर ही भीतर युवक पर को 5 दिन से हिरासत में रखना और फिर अचानक परिजनों को उसके मर जाने की जानकारी देना इस मामले को एक नया मोड़ दे सकती है।

क्या शाहाबाद कोतवाली बन गयी न्यायपालिका, जबकि ये हैं नियम

यदि किसी आरोपी की पुलिस कस्टडी में मौत हो जाती है तो पुलिस द्वारा मजिस्ट्रेट को तुरंत सूचित किया जाता है, ताकि मृत्यु की जांच के लिए मजिस्ट्रियल जांच शुरू की जा सके। यह जांच दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 176 के तहत की जाती है, और इसकी सूचना तत्काल दी जानी चाहिए।रवि को मृत घोषित करने के बारे में जानकारी देते डॉक्टर

यदि मृत्यु संदिग्ध परिस्थितियों में होती है, तो पुलिस को वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों (जैसे पुलिस अधीक्षक या समकक्ष) और संबंधित जिला कलेक्टर/जिला मजिस्ट्रेट को भी तुरंत सूचित करना होता है। NHRC के दिशानिर्देशों के अनुसार, हिरासत में मृत्यु के मामले में पोस्टमार्टम अनिवार्य है, और इसे वीडियोग्राफी के साथ किया जाना चाहिए जबकि शाहाबाद पुलिस ने इन नियमों से से कई का पालन नहीं किया है।बहरहाल, जिले के कप्तान नीरज कुमार जादौन इस मामले में आवश्यक कार्रवाई कर रहे हैं। स्थानीय लोगों ने भरोसा जताया है कि एसपी इस घटना में शामिल लोगों को नहीं बख्शेंगे। उधर, परिजनों ने हत्या का मुकदमा लिखे जाने की मांग की है।

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