Hardoi: शीत लहर एवं ठंड से पशुओं की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण सलाह।
मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी ने पशु पालकों से अपील की है कि पशु/पक्षियों को आसमान के नीचे खुले स्थान में न बाधें/रखे। पशुओं को घिरी
Hardoi: मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी ने पशु पालकों से अपील की है कि पशु/पक्षियों को आसमान के नीचे खुले स्थान में न बाधें/रखे। पशुओं को घिरी जगह एवं छप्पर/शेड से ढके हुए स्थानों में रखें। यह विशेष ध्यान रखें कि रोशनदान, दरवाजे एवं खिड़कियों को टाट/बोरे से आवश्यकतानुसार ढक दें, जिससे सीधी हवा का झोंका पशुओं तक न पहुंचें। पशु बाड़े में गोबर एवं मूत्र निकास की उचित व्यवस्था करें। मूत्र, जल भराव न होने दें। बिछावन में पुआल/लकड़ी का बुरादा/गन्ने की खोई आदि का प्रयोग करें। पशुओं को ताजा पानी पिलायें। पशुओं को जूट के बोरे का झूल पहनायें तथा ध्यान रखें कि झूल खिसके नही, अतः नीचें से जरूर बांध दें।
आवश्यकतानुसार आग जलायें, इस बात का विशेष ध्यान रखें कि अलाव पशुओं के बच्चे की पहुंच से दूर रखने के लिये पशु के गले में रस्सी बांधे जिससे की पशु अलाव तक न पहुंच सके। बाड़े में अलाव जलाने पर गैस बाहर निकलने के लिये रोशनदान खोल दें। संतुलित आहार पशुओं को दें। आहार में खली, दाना, चोकर की मात्रा बढ़ा दें। धूप निकलने पर पशु को अवश्य ही बाहर खुले स्थान पर धूप में खड़ा करें। नवजात बच्चों को खीस (कोलस्ट्रम) पिलायें, इससे बीमारी से लड़ने की क्षमता में वृद्धि होती है। प्रसव के बाद में मां को ठण्डा पानी न पिलाकर गुनगना पानी अजवाइन मिलाकर पिलायें। भेड़ बकरियों में पी०पी०आर० बीमारी फैलने की सम्भावना बढ़ जाती है। अतः बीमारी से बचाव का टीका अवश्य लगवायें। गर्भित पशु का विशेष ध्यान रखें एवं प्रसव के दौरान जच्चा-बच्चा को ध्यान में रख कर ठण्ड/शीत लहर से बचाव करें। पशु से सम्बन्धित किसी भी प्रकार की समस्या/असुविधा/जानकारी के लिए टोल फ्री नम्बर-1962 पर सम्पर्क करें।
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